Himanta Biswa Sarma: ‘मुस्लिम-ईसाई नहीं, लेफ्ट-लिबरल से है हिंदुओं को खतरा’, हिमंत बिस्वा सरमा का बड़ा हमला

Himanta Biswa Sarma: असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा रविवार को पश्चिम बंगाल के दौरे पर थे. जहां उन्होंने लेफ्ट और उदारवादियों पर जोरदार हमला बोला. उन्होंने कहा- वामपंथी और उदारवादी हिंदुओं के लिए सबसे बड़ा खतरा है.

Assam CM Himanta Biswa Sarma

Himanta Biswa Sarma: असम के सीएम ने दावा किया कि मुसलमान या ईसाई कभी भी हिंदुओं के लिए खतरा नहीं हैं बल्कि हिंदुओं को कमजोर करने वाले लोग उनके अपने समाज में ही हैं. एक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए हिमंत बिस्वा सरमा ने कहा- “मेरा मानना ​​है कि वामपंथी और उदारवादी लोग हिंदुओं के लिए सबसे बड़ा खतरा हैं.” असम के सीएम ने पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी पर निशाना साधते हुए कहा- “बंगाल में हिंदुओं को कमजोर करने की प्रवृति ममता बनर्जी को वामपंथियों और उदारवादियों से विरासत में मिली है.”

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राहुल और ममता बनर्जी हिंदू धर्म को खत्म करना चाहते हैं : हिमंत बिस्वा सरमा

असम के सीएम हिमंत बिस्वा सरमा ने कहा, “औरंगजेब ने हिंदू धर्म को नष्ट करने की कसम खाई थी, लेकिन हिंदू धर्म खत्म नहीं हुआ, औरंगजेब खत्म हो गया. आज मैं ममता बनर्जी और राहुल गांधी से कहना चाहूंगा कि अगर उन्हें लगता है कि वे हिंदू धर्म को खत्म कर सकते हैं, तो मैं उन्हें बताना चाहूंगा कि हिंदू धर्म खत्म नहीं होगा, खुद खत्म हो जाएंगे. हिंदू धर्म कभी खत्म नहीं हो सकता.”

भारत की सभ्यता 5000 साल पुरानी: हिमंत

असम के सीएम ने कहा, “व्यक्ति को यह याद रखना चाहिए कि भारत की सभ्यता 5000 वर्ष से अधिक पुरानी है और इसकी शुरुआत 1947 में देश की आजादी के साथ नहीं हुई.” उन्होंने दावा किया, “असम में हिंदुओं का प्रतिशत घटकर 58 प्रतिशत रह गया है, जबकि पश्चिम बंगाल में हो सकता है कि यह समुदाय घटकर लगभग 65 प्रतिशत रह गया हो.” उन्होंने कहा कि हिंदू सभ्यता बनी रहेगी और फूलती-फलती रहेगी.

वक्फ कानून को खत्म कर दिया जाए : हिमंत

हिमंत बिस्वा सरमा ने कहा- “राम मंदिर 500 साल बाद बना है…अब समय आ गया है कि (मौजूदा) वक्फ कानून को खत्म कर दिया जाए.” “तीन तलाक को पहले ही समाप्त कर दिया गया है और देश में समान नागरिक संहिता लागू होने के संकेत भी दिखने लगे हैं.”

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लेखक के बारे में

Published by: Arbindkumar mishra

अरबिंद कुमार मिश्रा मुख्यधारा की पत्रकारिता में 15 वर्षों से अधिक का अनुभव रखने वाले एक वरिष्ठ पत्रकार और लेखक हैं. वर्तमान में, वह प्रभात खबर डॉट कॉम (Prabhat Khabar) में सीनियर कंटेंट राइटर के रूप में अपनी सेवाएं दे रहे हैं. अरबिंद नेशनल, इंटरनेशनल और स्पोर्ट्स कैटेगरी में अपनी लेखनी के लिए जाने जाते हैं. गहरी रिसर्च पर आधारित स्पेशल स्टोरीज, रिपोर्टिंग और जटिल मुद्दों पर आसान भाषा में 'एक्सप्लेनर' लिखना उनकी मुख्य यूएसपी (USP) है.

झारखंड की समृद्ध संस्कृति और लोक परंपराओं में उनकी गहरी रुचि है. अपनी उत्कृष्ट और सरोकार से जुड़ी रिपोर्टिंग के लिए उन्हें संस्थान स्तर पर कई बार सम्मानित और पुरस्कृत भी किया जा चुका है.

करियर का सफरनामा

अरबिंद ने अपने पत्रकारिता करियर की शुरुआत देश की प्रतिष्ठित बहुभाषी न्यूज एजेंसी 'हिंदुस्थान समाचार' से बतौर रिपोर्टर की थी. इसके बाद उन्होंने प्रसार भारती के अंग दूरदर्शन और आकाशवाणी के साथ भी काम किया, जहां उन्होंने एंकरिंग, वॉइस-ओवर और रिपोर्टिंग के गुर सीखे. साल 2011 में वह 'प्रभात खबर डॉट कॉम' से जुड़े और तब से लगातार डिजिटल पत्रकारिता के क्षेत्र में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं.

प्रमुख उपलब्धियां और ग्राउंड रिपोर्टिंग

खेल पत्रकारिता और जमीनी रिपोर्टिंग में अरबिंद का योगदान उल्लेखनीय रहा है. उनकी कुछ सबसे बड़ी उपलब्धियों में शामिल हैं:

34वें राष्ट्रीय खेल: झारखंड में आयोजित ऐतिहासिक 34वें नेशनल गेम्स की बेहतरीन और व्यापक ग्राउंड रिपोर्टिंग.

अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट: रांची के जेएससीए (JSCA) स्टेडियम में आयोजित कई इंटरनेशनल क्रिकेट मैचों को करीब से कवर किया.

पुरुष हॉकी वर्ल्ड कप (2018): भुवनेश्वर में आयोजित वर्ल्ड कप के फाइनल मुकाबले की शानदार स्पोर्ट्स रिपोर्टिंग.

पंचायतनामा: प्रभात खबर के इस खास विंग के लिए ग्रामीण इलाकों का दौरा कर कई प्रेरक 'सक्सेस स्टोरीज' लिखीं.

शैक्षणिक योग्यता (Education & Credentials)

UGC NET: साल 2019 में यूजीसी नेट (UGC NET) की परीक्षा उत्तीर्ण की.

बैचलर ऑफ जर्नलिज्म (BJMC): रांची विश्वविद्यालय से साल 2011 में पत्रकारिता में स्नातक की डिग्री हासिल की.

एम.ए. (नागपुरी भाषा): रांची विश्वविद्यालय के 'जनजातीय एवं क्षेत्रीय भाषा विभाग' से साल 2009 में नागपुरी भाषा में स्नातकोत्तर (MA) की डिग्री हासिल की.

लेखन शैली और विशेषज्ञता: एक्सप्लेनर, रिसर्च बेस्ड स्टोरीज, स्पोर्ट्स जर्नलिज्म, इंटरनेशनल अफेयर्स और झारखंड की लोक-संस्कृति.

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