गुजरात चुनाव 2022: सोलंकी, जडेजा की पत्नी, मोरबी के ‘हीरो' सहित इन 10 उम्मीदवारों पर रहेगी सबकी नजर

पूर्व मंत्री पुरुषोत्तम सोलंकी, सात बार विधायक रहे कुंवरजी बावलिया, मोरबी के ‘हीरो' कांतिलाल अमृतिया, रवींद्र जडेजा की पत्नी रिवाबा और आप की गुजरात इकाई के अध्यक्ष गोपाल इटालिया एक दिसंबर को होने वाले विधानसभा चुनाव के पहले चरण में किस्मत आजमाने वाले 10 प्रमुख उम्मीदवारों में शामिल हैं.

1) कांतिलाल अमृतिया: कांतिलाल अमृतिया (भाजपा): दो हफ्ते पहले जब मोरबी शहर में एक नदी पर बना सस्पेंशन पुल टूटकर गिर गया था, तब पीड़ितों को बचाने के लिए पानी में कूदते हुए वीडियो वायरल होने के बाद अमृतिया अचानक सुर्खियों में आ गए थे. इससे पहले तक राजनीतिक हलकों में उन्हें लगभग भुला दिया गया था. जनता के बीच लोकप्रियता और इस बहादुरी भरे कार्य ने उन्हें मोरबी विधानसभा सीट से भाजपा का टिकट दिलाने में मदद की. कानाभाई के नाम से मशहूर अमृतिया ने 1995, 1998, 2002, 2007 और 2012 में मोरबी सीट से जीत हासिल की थी, लेकिन 2017 में वह हार गए थे. साल 2017 में वह कांग्रेस उम्मीदवार बृजेश मेरजा से हार गए थे. बाद में मेरजा भाजपा में शामिल हो गए थे. मेरजा ने भाजपा के टिकट पर मोरबी में उपचुनाव लड़ा और फिर से विधानसभा पहुंचे. फिलहाल वह भाजपा सरकार में मंत्री हैं.

2) कुवंरजी बावलिया (भाजपा)– राजकोट जिले की जसदण सीट से सात बार विधायक रहे बावलिया भाजपा में शामिल होने से पहले कांग्रेस के वरिष्ठ नेता थे. कोली समुदाय के प्रमुख नेता बावलिया कांग्रेस के टिकट पर जसदण से छह बार चुनाव जीते हैं. वह 2009 में कांग्रेस उम्मीदवार के रूप में राजकोट से लोकसभा चुनाव जीते थे. साल 2017 में जसदण से कांग्रेस के टिकट पर चुनाव जीतने के बाद बावलिया ने 2018 में इस्तीफा दे दिया और बाद में भाजपा में शामिल हो गए. उन्हें जल्द तत्कालीन विजय रूपाणी नीत सरकार में मंत्री बनाया गया. बाद में उन्होंने उसी सीट से भाजपा के टिकट पर उपचुनाव जीता. बावलिया के खिलाफ कांग्रेस ने कोली नेता भोलाभाई गोहेल को मैदान में उतारा है. गोहेल ने 2012 में कांग्रेस के टिकट पर यह सीट जीती थी. 2017 में जब गोहेल की जगह बावलिया को टिकट दिया गया, तो गोहेल भाजपा में शामिल हो गए. वहीं, बावलिया के भाजपा में जाने के बाद 2018 में गोहेल कांग्रेस में लौट गए.

3) बाबू बोखिरिया (भाजपा): मेर समुदाय से ताल्लुक रखने वाले 69 वर्षीय बोखिरिया को भाजपा ने पोरबंदर सीट से फिर से उम्मीदवार बनाया है. उन्होंने 1995, 1998, 2012 और 2017 में यह सीट जीती थी. 2002 और 2007 में बोखिरिया को उनके कट्टर प्रतिद्वंद्वी और गुजरात कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष अर्जुन मोढवाडिया ने हराया था. दोनों इस बार भी आमने-सामने हैं.

4) भगवान बराड़ (भाजपा): तलाला (गिर सोमनाथ जिले) से कांग्रेस विधायक के रूप में इस्तीफा देने और भाजपा में शामिल होने के एक दिन बाद बराड़ (63) को उसी सीट से भाजपा ने टिकट दिया है. भगवान बराड़ अहीर समुदाय के प्रभावशाली नेता हैं. उन्होंने तलाला निर्वाचन क्षेत्र से 2007 और 2017 में भी जीत हासिल की. उनके भाई जशुभाई बराड़ ने 1998 और 2012 में इस सीट का प्रतिनिधित्व किया. तलाला गिर सोमनाथ जिले के चार विधानसभा क्षेत्रों में से एक है. 2017 के विधानसभा चुनाव में, भाजपा जिले में अपना खाता नहीं खोल सकी थी क्योंकि कांग्रेस ने चारों सीटों पर जीत हासिल की थी.

5) पुरुषोत्तम सोलंकी (भाजपा): उनकी बिगड़ती सेहत के बावजूद भाजपा ने भावनगर ग्रामीण के मौजूदा विधायक और पूर्व मंत्री पुरुषोत्तम सोलंकी पर एक बार फिर भरोसा जताया है. एक प्रमुख कोली नेता सोलंकी को गुजरात में एक ‘कद्दावर व्यक्ति’ माना जाता है.

6) रिवाबा जडेजा (भाजपा): भाजपा ने एक आश्चर्यजनक कदम उठाते हुए जामनगर उत्तर से भारतीय क्रिकेटर और जामनगर के मूल निवासी रवींद्र जडेजा की पत्नी रिवाबा को मैदान में उतारा है, जिन्हें राजनीति या चुनाव लड़ने का कोई पूर्व अनुभव नहीं है. सत्तारूढ़ दल ने इस सीट से मौजूदा विधायक धर्मेंद्र सिंह जडेजा को टिकट नहीं दिया है.

7) परेश धनानी (कांग्रेस): अमरेली से किस्मत आजमा रहे धनानी 2002 में कम उम्र में प्रदेश भाजपा के दिग्गज पुरुषोत्तम रूपाला को हराकर चर्चा में आए थे. हालांकि वह 2007 में चुनाव हार गए थे, लेकिन 2012 और 2017 के चुनाव में पाटीदार बहुल इस सीट से उन्हें जीत मिली. वह गुजरात विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष भी हैं.

8) वीरजी थुम्मर (कांग्रेस): वह लाथी सीट (अमरेली जिले) से मौजूदा विधायक हैं और विपक्षी दल के वरिष्ठ व मुखर नेताओं में से एक हैं. वह कांग्रेस के टिकट पर अमरेली से लोकसभा सदस्य भी रहे हैं.

9) गोपाल इटालिया (आप): इस युवा नेता को हाल में गुजरात आम आदमी पार्टी का अध्यक्ष बनाया गया था और अब उन्हें सूरत शहर की पाटीदार बहुल कटारगाम विधानसभा सीट से मैदान में उतारा गया है, जो फिलहाल भाजपा के कब्जे में है. पाटीदार कोटा आंदोलन के कारण 2017 में भाजपा के खिलाफ माहौल होने के बावजूद कांग्रेस इस सीट को सत्ताधारी दल से नहीं छीन सकी थी.

10) अल्पेश कथीरिया (आप): हार्दिक पटेल के पूर्व सहयोगी कथीरिया को सूरत शहर में पाटीदार बहुल वराछा रोड सीट से टिकट दिया गया है, जिसका प्रतिनिधित्व फिलहाल भाजपा के पूर्व मंत्री किशोर कनानी कर रहे हैं. कथीरिया पर हार्दिक पटेल के नेतृत्व वाले पाटीदार आंदोलन के दौरान कथित रूप से लोगों को भड़काने के आरोप में राजद्रोह का मामला चल रहा है.

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