Supreme Court : सुप्रीम कोर्ट ने ऑस्ट्रेलियाई मिशनरी ग्राहम स्टेंस और उनके दो नाबालिग बेटों की 1999 में हुई हत्या के मामले में उम्रकैद की सजा काट रहे हैं. एएनआई न्यूज एजेंसी के मुताबिक, अदालत ने दारा सिंह की समयपूर्व रिहाई याचिका पर सुनवाई 19 अगस्त तक के लिए टाल दी गई है. जस्टिस मनोज मिश्रा और विजय बिश्नोई की बेंच ने मंगलवार को ओडिशा सरकार के थोड़ी देर की मोहलत मांगने के बाद मामले को टाल दिया. सरकार ने कोर्ट को बताया कि दारा सिंह की रिक्वेस्ट पर फैसला करने वाली कमेटी ने संबंधित रिकॉर्ड मांगे हैं, जो अभी तक उपलब्ध नहीं कराए गए हैं. इसलिए कोर्ट ने मामले की सुनवाई 19 अगस्त के लिए टाल दी.
1999 का चर्चित हत्याकांड
दारा सिंह उर्फ रवींद्र कुमार पाल को जनवरी 1999 में ऑस्ट्रेलियाई मिशनरी ग्राहम स्टेंस और उनके दो नाबालिग बेटों फिलिप और टिमोथी की हत्या का दोषी ठहराया गया था. तीनों को ओडिशा के क्योंझर जिले में चर्च के बाहर खड़ी गाड़ी में सोते समय जिंदा जला दिया गया था. इस घटना ने देश और दुनिया में भारी आक्रोश पैदा किया था.
रिहाई की मांग का आधार
एडवोकेट विष्णु शंकर जैन के माध्यम से दाखिल याचिका में दारा सिंह ने कहा है कि वह बिना किसी छूट के 24 साल से अधिक की वास्तविक सजा काट चुके हैं. उनका दावा है कि ओडिशा सरकार की समय पूर्व रिहाई नीति के तहत निर्धारित न्यूनतम अवधि पूरी होने के बावजूद उनकी रिहाई पर फैसला नहीं लिया गया है.
संविधान और सुधार की दलील
दारा सिंह द्वारा दाखिल याचिका में कहा गया है कि उन्हें कभी पैरोल नहीं मिली, यहां तक कि उनकी मां के निधन के समय भी नहीं. दारा सिंह कहना है कि लगातार जेल में रखना संविधान के अनुच्छेद 14 और 21 के तहत मिले अधिकारों का उल्लंघन है. उन्होंने अपने अपराध पर गहरा पछतावा जताते हुए कहा है कि वर्षों की सजा ने उन्हें बदल दिया है और अब उन्हें समाज में दोबारा शामिल होने का अवसर मिलना चाहिए.
अब कमेटी के फैसले पर नजर
दारा सिंह ने यह भी आरोप लगाया है कि समान परिस्थितियों वाले अन्य दोषियों को समय पूर्व रिहाई मिल चुकी है, जबकि उनका मामला अब भी लंबित है. फिलहाल सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि वह 19 अगस्त को अगली सुनवाई करेगा और तब तक ओडिशा सरकार की कमेटी से निर्णय की उम्मीद रखता है.
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