सूचना एवं प्रसारण मंत्री अश्विनी वैष्णव ने बताया, इस योजना के तहत कृषि अपशिष्ट, पशुओं के गोबर, गन्ने की खोई और शहरी जैविक कचरे का उपयोग करके स्वच्छ ईंधन व जैविक खाद तैयार की जाएगी. इससे ग्रामीण आय बढ़ाने के साथ-साथ राष्ट्रीय आर्थिक मूल्य में भी इजाफा होगा. सरकार का अनुमान है कि इस पहल से अगले एक दशक में सीबीजी उत्पादन में 10 गुना बढ़ोतरी होगी, जिससे राष्ट्रीय जीडीपी में लगभग 75,000 करोड़ रुपये का योगदान मिलेगा और करीब 1.5 लाख नए रोजगार के अवसर पैदा होंगे.
योजना के छह पिलर
- पक्का ऑफटेक: उत्पादित सीबीजी की बिक्री की गारंटी दी जाएगी.
- मूल्य स्थिरता: वैश्विक स्तर पर तेल और गैस की कीमतों में होने वाले उतार-चढ़ाव से बायोगैस क्षेत्र को सुरक्षित रखने के लिए एक स्थिर मूल्य प्रणाली बनाई गई है.
- कैपेक्स सहायता: बायोगैस प्लांट लगाने के लिए आवश्यक पूंजीगत खर्च में वित्तीय मदद दी जाएगी.
- पाइपलाइन इंफ्रास्ट्रक्चर: उत्पादित बायोगैस को प्लांट से ग्राहकों तक पहुंचाने के लिए पाइपलाइन नेटवर्क का विकास किया जाएगा. इसे सिटी गैस डिस्ट्रीब्यूशन (CGD) और पाइप्ड नेचुरल गैस (PNG) नेटवर्क से जोड़ा जाएगा.
- क्रेडिट गारंटी: एमएसएमई (MSME) और विशेष रूप से महिलाओं के नेतृत्व वाले उद्यमों को आसान ऋण सहायता उपलब्ध कराई जाएगी.
- इनोवेशन: बायोगैस क्षेत्र में नई तकनीक और नवाचार को बढ़ावा दिया जाएगा.
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