फूड कंपनियों को FSSAI के 150 से ज्यादा नोटिस, समझिए आपकी सेहत के लिए क्यों है चिंता की बात

FSSAI ने पिछले कुछ महीनों में फूड कंपनियों समेत ई-कॉमर्स और फूड सर्विस प्रतिष्ठानों के खिलाफ 150 से ज्यादा नोटिस जारी किए हैं. जानिए इन नोटिस की वजह क्या है और आम लोगों की सेहत के लिए यह कार्रवाई क्यों महत्वपूर्ण है.

कितनी ही बार ऐसा होता है कि आप किसी पैकेट पर हेल्दी, नेचुरल या नो एडेड शुगर लिखा देखकर उसे खरीद लेते हैं. आप ऐसा इसलिए करते हैं क्योंकि उस पैकेट पर लिखा हुआ है. लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि ये गलत भी तो हो सकता है?

दरअसल, पहले विज्ञापन और फिर पैकेट पर लिखकर कंपनी आपको भरोसा दिलाती है कि यह आपके और आपके परिवार के लिए बेहतर विकल्प है. लेकिन कई बार वो दावा भ्रामक होता है. ऐसे में नुकसान सिर्फ आपके पैसे का नहीं होता, बल्कि आप गलत जानकारी के चलते अपनी सेहत से जुड़ा एक गलत फैसला ले लेते हैं.

यही वजह है कि खाद्य नियामक FSSAI की हालिया कार्रवाई को समझना जरूरी है. पिछले कुछ महीनों में भ्रामक विज्ञापनों, गलत दावों और लेबलिंग नियमों के उल्लंघन को लेकर 150 से ज्यादा नोटिस जारी किए गए हैं. अब सवाल यह है कि इन नोटिस का आपके रोजमर्रा के खाने-पीने और सेहत से आखिर कितना संबंध है?

किस बात के लिए मिले 150 से ज्यादा नोटिस?

  • FSSAI के मुताबिक, इन नोटिस के पीछे मुख्य तौर पर तीन वजहें हैं, भ्रामक विज्ञापन, गलत या ऐसे दावे जो ग्राहक को भ्रमित कर सकते हैं और लेबलिंग के नियमों का पालन नहीं करना.
  • आसान भाषा में समझें तो अगर किसी खाने या पेय के विज्ञापन में उसके फायदे को लेकर ऐसा दावा किया गया है, जिससे ग्राहक को उत्पाद के बारे में गलत धारणा बन सकती है, तो एफएसएसएआई उस पर सवाल उठा सकता है.
  • इसी तरह पैकेट पर लिखी जानकारी और उत्पाद में मौजूद चीजों के बीच अंतर मिलने पर भी कार्रवाई हो सकती है.
  • हालांकि यहां एक बात समझना बहुत जरूरी है. 150 से ज्यादा नोटिस का मतलब यह नहीं है कि कंपनियां दोषी साबित हो चुकी हैं.
  • नोटिस मिलने का मतलब है कि नियामक ने किसी मामले में नियमों के उल्लंघन की आशंका को लेकर कंपनी से जवाब मांगा है. इसके बाद कंपनी अपना पक्ष रख सकती है और जरूरत पड़ने पर अपने उत्पाद, लेबल या विज्ञापन में बदलाव कर सकती है.

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आम लोगों की सेहत से इसका क्या संबंध है?

  • अब सवाल है कि कंपनियों को मिले नोटिस से आपका क्या लेना-देना?
  • दरअसल, जब आप किसी पैकेज्ड फूड या ड्रिंक को खरीदते हैं तो उसके बारे में दी गई जानकारी आपके फैसले को प्रभावित करती है.
  • अगर किसी उत्पाद को इस तरह पेश किया जाता है कि आपको वह ज्यादा हेल्दी या फायदेमंद लगता है, लेकिन दावा पूरी तरह सही नहीं है, तो आप गलत जानकारी के आधार पर अपनी सेहत से जुड़ा फैसला ले सकते हैं.
  • यही वजह है कि पैकेट पर लिखी जानकारी महज औपचारिकता नहीं है. उसमें मौजूद सामग्री, पोषण संबंधी जानकारी और दूसरे जरूरी विवरण आपको यह समझने में मदद करते हैं कि आप वास्तव में क्या खरीद रहे हैं.

किन बड़े ब्रांडों पर हुई कार्रवाई?

FSSAI के हालिया अपडेट में कई बड़े ब्रांडों के नाम सामने आए हैं. इनमें नेस्ले इंडिया, पेप्सिको, कोका-कोला इंडिया, एबॉट इंडिया, रेड बुल इंडिया, डैनोन इंडिया, मॉन्स्टर एनर्जी इंडिया, हेल एनर्जी, मॉन्डेलेज इंडिया, डियाजियो, पर्नोड रिकार्ड, फेरेरो इंडिया और केनव्यू शामिल हैं.

इन कंपनियों के नाम कार्रवाई की सूची में होने का मतलब यह नहीं है कि सभी कंपनियों पर एक जैसे आरोप हैं या सभी को दोषी ठहराया गया है. अलग-अलग मामलों में विज्ञापन, उत्पाद के दावे और लेबल से जुड़े मुद्दे सामने आए हैं.

सिर्फ फूड कंपनियां ही नहीं, अमेजन और रेस्टोरेंट भी दायरे में

  • FSSAI की कार्रवाई केवल पैकेज्ड फूड बनाने वाली कंपनियों तक सीमित नहीं है. नियामक के अनुसार अमेजन और फ्लिपकार्ट को मिलाकर 12 नोटिस जारी किए गए हैं. इसके अलावा अमेजन के एक वेयरहाउस का लाइसेंस भी रद्द किया गया है.
  • फूड सर्विस कंपनियों पर भी कार्रवाई हुई है. केएफसी, मैकडॉनल्ड्स, पिज्जा हट, डोमिनोज और कोस्टा कॉफी जैसे नाम इस कार्रवाई में शामिल हैं.
  • FSSAI के मुताबिक, फूड सर्विस प्रतिष्ठानों को 30 से ज्यादा नोटिस दिए गए हैं. वहीं डोमिनोज के पांच लाइसेंस निलंबित किए गए हैं.

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नोटिस मिलने के बाद कंपनी के साथ क्या होता है?

  • नोटिस मिलने के बाद कंपनी को एफएसएसएआई के सामने अपना जवाब देना पड़ सकता है. अगर कोई गलती पाई जाती है तो कंपनी को अपने लेबल, विज्ञापन या उत्पाद से जुड़ी जानकारी में सुधार करना पड़ सकता है.
  • FSSAI के मुताबिक, डाबर इंडिया और फर्न्स एन पेटल्स समेत छह खाद्य कारोबारियों ने नोटिस मिलने के बाद सुधारात्मक कदम उठाए हैं. इनमें लेबल और उत्पाद से जुड़े दावों में बदलाव शामिल हैं.
  • यानी हर नोटिस का मतलब तुरंत जुर्माना या लाइसेंस रद्द होना नहीं है. आगे की कार्रवाई मामले की जांच और कंपनी के जवाब पर निर्भर करती है.

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By गौतम कुमार

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