संविधान की आत्मा से अदालत की मर्यादा तक... CJI सूर्यकांत और पूर्व CJI बीआर गवई ने न्याय व्यवस्था पर दिया संदेश

CJI Justice Surya Kant : CJI जस्टिस सूर्यकांत और पूर्व CJI बीआर गवई ने उपराष्ट्रपति भवन में 'द वॉयस ऑफ जस्टिस: जस्टिस गवई स्पीक्स' पुस्तक का लोकार्पण किया. उन्होंने न्याय व्यवस्था, संविधान के क्रियान्वयन और आम लोगों तक न्याय की पहुंच जैसे अहम मुद्दों पर चर्चा की.

CJI Justice Surya Kant : नई दिल्ली स्थित उपराष्ट्रपति भवन में पूर्व भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) बीआर गवई की पुस्तक "द वॉयस ऑफ जस्टिस: जस्टिस गवई स्पीक्स" का लोकार्पण किया गया. एएनआई न्यूज एजेंसी के मुताबिक, इस अवसर पर भारत के मुख्य न्यायाधीश जस्टिस सूर्यकांत और पूर्व CJI बीआर गवई ने न्यायपालिका, संविधान और न्याय तक आम लोगों की पहुंच जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर अपने विचार साझा किए. CJI जस्टिस सूर्यकांत ने कहा कि मैंने इस किताब के तीन भागों में बांटकर लोगों को न्याय व्यवस्था के बारे में समझाया.

CJI सूर्यकांत ने बताया पुस्तक का मूल संदेश

मुख्य न्यायाधीश जस्टिस सूर्यकांत ने कहा कि इस पुस्तक को तीन हिस्सों में समझा जा सकता है. पहले भाग में संविधान के भाग-3 यानी मौलिक अधिकारों और भाग-4 में शामिल अनुच्छेद 39A के तहत सभी नागरिकों को मुफ्त कानूनी सहायता उपलब्ध कराने के सिद्धांत को विस्तार से रखा गया है. उन्होंने कहा कि जस्टिस गवई ने अपने भाषणों में इन संवैधानिक मूल्यों को बेहद प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत किया है.

संविधान के क्रियान्वयन से तकनीक तक की चर्चा

जस्टिस सूर्यकांत ने बताया कि पुस्तक का दूसरा भाग संविधान के सिद्धांतों के प्रभावी क्रियान्वयन और उनके पालन पर केंद्रित है. वहीं तीसरे भाग में तकनीक, मध्यस्थता (आर्बिट्रेशन) और न्याय व्यवस्था से जुड़े कई समकालीन विषयों पर जस्टिस गवई के विचार शामिल हैं, जो कानून के छात्रों और पेशेवरों के लिए उपयोगी साबित होंगे.

अदालत की गरिमा बनाए रखना सभी की जिम्मेदारी

कोर्ट में होने वाली अप्रिय घटनाओं पर मुख्य न्यायाधीश ने स्पष्ट कहा कि अदालत में आने वाले हर व्यक्ति की बात सुनी जानी चाहिए, लेकिन न्यायालय की अपनी गरिमा और मर्यादा होती है. उन्होंने कहा कि संवैधानिक संस्थाओं का सम्मान करना हर नागरिक का कर्तव्य है और किसी को भी अदालत में अनुचित व्यवहार कर मिले अवसर का दुरुपयोग नहीं करना चाहिए.

पूर्व CJI गवई बोले- न्याय पर संवाद बढ़ाने का प्रयास

पूर्व मुख्य न्यायाधीश बीआर गवई ने बताया कि यह पुस्तक पिछले साढ़े सात वर्षों के दौरान भारत और विदेशों में दिए गए उनके भाषणों का संकलन है. उन्होंने कहा कि इसमें न्याय, संविधान, कानूनी सुधार और समाज से जुड़े विभिन्न मुद्दों पर उनके विचार शामिल हैं. उनका विश्वास है कि यह पुस्तक छात्रों, वकीलों और पूरे कानूनी समुदाय के बीच सार्थक संवाद को बढ़ावा देगी. उन्होंने यह भी कहा कि राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण (NALSA) के अध्यक्ष रहते हुए उन्होंने सस्ती, सुलभ और त्वरित न्याय व्यवस्था पर विशेष जोर दिया था और भविष्य में भी इस दिशा में लगातार काम करने की आवश्यकता है.

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By Satyendra Giri

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