पूर्व थल सेनाध्यक्ष जनरल वीएन शर्मा का निधन, श्रीलंका में IPKF अभियान का किया था नेतृत्व

भारतीय सेना के पूर्व थल सेनाध्यक्ष जनरल विश्वनाथ शर्मा का शुक्रवार को 96 साल की उम्र में निधन हो गया. वह भारतीय सेना के 14वें प्रमुख रहे और देश के पहले परमवीर चक्र विजेता मेजर सोमनाथ शर्मा के भाई थे.

भारतीय सेना के पूर्व थल सेनाध्यक्ष जनरल विश्वनाथ शर्मा (VN Sharma) का शुक्रवार को 96 वर्ष की आयु में निधन हो गया. वह भारतीय सेना के 14वें थल सेनाध्यक्ष रहे और देश की सैन्य सेवा में उनका योगदान लंबे समय तक याद किया जाएगा.

हिमाचल के पालमपुर से था संबंध

जनरल वीएन शर्मा मूल रूप से हिमाचल प्रदेश के कांगड़ा जिले के पालमपुर के रहने वाले थे. कुछ दिन पहले अपने घर में ही चलते समय गिरने से वह चोटिल हो गए थे. उनका दिल्ली में इलाज भी चल रहा था, लेकिन शुक्रवार को उनका निधन हो गया. जनरल वीएन शर्मा, भारत के पहले परमवीर चक्र विजेता मेजर सोमनाथ शर्मा के छोटे भाई थे.

निधन की खबर पर कई लोगों ने जताया शोक

जनरल वीएन शर्मा के निधन पर कई नेताओं और गणमान्य लोगों शोक जाहिर किया है. उत्तर प्रदेश के उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने अपने शोक संदेश में लिखा-

देश के पूर्व थल सेनाध्यक्ष जनरल विश्वनाथ शर्मा जी के निधन का समाचार अत्यंत दुःखद है. मेरी गहन संवेदनाएं शोकाकुल परिजनों के साथ हैं. उन्होंने अटूट समर्पण और निष्ठा के साथ मातृभूमि की सेवा करते हुए भारतीय सेना को मजबूत और गौरवशाली नेतृत्व प्रदान किया. राष्ट्र सेवा में उनका अतुलनीय योगदान सदैव स्मरणीय रहेगा. प्रभु श्रीराम दिवंगत पुण्यात्मा को अपने श्रीचरणों में स्थान दें तथा शोक संतप्त परिजनों को इस कठिन समय में संबल प्रदान करें. केशव प्रसाद मौर्य, उप-मुख्यमंत्री उत्तर प्रदेश

भारतीय सेना के लिए अपूरणीय क्षति

जनरल वीएन शर्मा का निधन भारतीय सेना और देश के लिए एक बड़ी क्षति माना जा रहा है. उनके नेतृत्व, अनुशासन और राष्ट्रसेवा को हमेशा सम्मान के साथ याद किया जाएगा.

कार्यकाल में संभाली कई बड़ी सुरक्षा चुनौतियां

जनरल विश्वनाथ (वीएन) शर्मा ने 1988 से 1990 तक भारतीय सेना के थल सेनाध्यक्ष के रूप में जिम्मेदारी संभाली. उनके कार्यकाल के दौरान देश और क्षेत्रीय सुरक्षा के मोर्चे पर कई बड़ी चुनौतियां सामने थीं. इसी दौरान श्रीलंका में भारतीय शांति सेना (IPKF) का अभियान चल रहा था, जबकि पूर्वोत्तर भारत में भी सुरक्षा स्थिति काफी संवेदनशील बनी हुई थी.

श्रीलंका में IPKF अभियान का किया नेतृत्व

थल सेनाध्यक्ष के रूप में जनरल वीएन शर्मा ने श्रीलंका में भारतीय शांति सेना (IPKF) के अभियानों का नेतृत्व किया. इस दौरान भारतीय सेना ने पारंपरिक सैन्य अभियान के साथ-साथ लिट्टे (LTTE) के खिलाफ गुरिल्ला युद्ध और खुफिया जानकारी के आधार पर चलाए जाने वाले आतंकवाद-रोधी अभियानों में भी अहम भूमिका निभाई.

जनरल वीएन शर्मा का सैन्य करियर

जनरल विश्वनाथ शर्मा भारतीय सेना के सबसे सम्मानित सैन्य अधिकारियों में से एक थे. अपने लंबे सैन्य करियर के दौरान उन्होंने कई अहम अभियानों और युद्धों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई. उनके नेतृत्व और रणनीतिक कौशल ने भारतीय सेना को नई दिशा दी.

  • 1956 – नागालैंड विद्रोह
  • 1965 – भारत-पाकिस्तान युद्ध
  • 1971 – भारत-पाकिस्तान युद्ध
  • 1973 – मिजोरम विद्रोह
  • 1987 – भारतीय शांति सेना (IPKF) अभियान, श्रीलंका

सम्मान और पुरस्कार

देश के प्रति उनकी उत्कृष्ट सेवाओं के लिए जनरल वीएन शर्मा को कई प्रतिष्ठित सैन्य सम्मान मिले, जिनमें प्रमुख हैं:

  • परम विशिष्ट सेवा मेडल (PVSM)
  • अति विशिष्ट सेवा मेडल (AVSM)

भारतीय सेना ने दी भावभीनी श्रद्धांजलि

भारतीय सेना ने अपने श्रद्धांजलि संदेश में कहा कि जनरल शर्मा का उत्कृष्ट नेतृत्व, अटूट समर्पण और सम्मान, कर्तव्य तथा सैन्य उत्कृष्टता की उनकी विरासत आने वाली पीढ़ियों के सैनिकों को हमेशा प्रेरित करती रहेगी.

एक बेहतरीन सैनिक और दूरदर्शी सैन्य नेता के तौर पर, जनरल विश्व नाथ शर्मा ने अपना जीवन देश की सेवा में समर्पित कर दिया. आज़ाद भारत के पहले परमवीर चक्र विजेता मेजर सोम नाथ शर्मा (PVC) के छोटे भाई, जनरल शर्मा ने साहस और निस्वार्थ सेवा की अपनी पारिवारिक विरासत को शानदार ढंग से आगे बढ़ाया. उनका बेहतरीन नेतृत्व, अटूट समर्पण और सम्मान, कर्तव्य व सैन्य उत्कृष्टता की उनकी यादगार विरासत आने वाली पीढ़ियों को प्रेरित करती रहेगी- इंडियन आर्मी


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लेखक के बारे में

By प्रीतीश सहाय

12 वर्षों से टीवी पत्रकारिता और डिजिटल मीडिया में सेवाएं दे रहा हूं. रांची विश्वविद्यालय के पत्रकारिता विभाग से पढ़ाई की है. राजनीतिक, अंतरराष्ट्रीय विषयों के साथ-साथ विज्ञान और ब्रह्मांड विषयों पर रुचि है. बीते छह वर्षों से प्रभात खबर.कॉम के लिए काम कर रहा हूं. इलेक्ट्रॉनिक मीडिया में काम करने के बाद डिजिटल जर्नलिज्म का अनुभव काफी अच्छा रहा है.
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