कौन हैं सुप्रीम कोर्ट में नियुक्त पांच नए जज? 4 हाईकोर्ट से पहुंचे, एक एडवोकेट को मिली जिम्मेदारी; जानें वी. मोहना के बारे में

Five New Judges Supreme Court: सुप्रीम कोर्ट में पांच नए न्यायाधीशों की नियुक्ति हो गई है. केंद्र सरकार ने कॉलेजियम की सिफारिशों को मंजूरी दे दी है. इन 5 नए जजों में से 4 हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश से पदोन्नत होकर सुप्रीम कोर्ट पहुंचे हैं, जबकि 1 सीनियर एडवोकेट- वी. मोहना को देश के मामलों का निपटारा करने की जिम्मेदारी दी गई है.

Five New Judges Supreme Court: सुप्रीम कोर्ट की न्यायिक क्षमता बढ़ाने की दिशा में केंद्र सरकार ने पांच नए न्यायाधीशों की नियुक्ति को मंजूरी दे दी है. राष्ट्रपति की स्वीकृति के बाद पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति शील नागू, बॉम्बे हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति श्री चंद्रशेखर, मध्य प्रदेश हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति संजीव सचदेवा, जम्मू-कश्मीर एवं लद्दाख हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति अरुण पल्ली और वरिष्ठ अधिवक्ता वी. मोहना सुप्रीम कोर्ट के जज बनेंगे. इन नियुक्तियों से शीर्ष अदालत में जजों की संख्या बढ़कर 37 हो जाएगी.

इन पांच नामों की सिफारिश 27 मई को सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम ने की थी. कॉलेजियम में भारत के मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत के साथ न्यायमूर्ति विक्रम नाथ, न्यायमूर्ति जे.के. महेश्वरी, न्यायमूर्ति बी.वी. नागरत्ना और न्यायमूर्ति एम.एम. सुंदरेश शामिल थे. कॉलेजियम ने वरिष्ठता, योग्यता, क्षेत्रीय प्रतिनिधित्व और न्यायपालिका में विविधता जैसे पहलुओं को ध्यान में रखते हुए इन नामों को चुना था. नियुक्तियों का उद्देश्य सुप्रीम कोर्ट में लंबित मामलों के बोझ को कम करना और अदालत की कार्यक्षमता को मजबूत करना है.

आइए इन सभी पांचों न्यायाधीशों के बारे में विस्तार से जानते हैं. 

न्यायमूर्ति शील नागू: तीन दशक से अधिक का कानूनी अनुभव

न्यायमूर्ति शील नागू ने वर्ष 1987 में वकालत की दुनिया में कदम रखा. उन्होंने जबलपुर स्थित मध्य प्रदेश हाईकोर्ट में मुख्य रूप से दीवानी और संवैधानिक मामलों की पैरवी की. लंबे समय तक सफल वकालत के बाद मई 2011 में उन्हें मध्य प्रदेश हाईकोर्ट का अतिरिक्त न्यायाधीश नियुक्त किया गया.

करीब दो साल बाद, मई 2013 में उन्हें स्थायी न्यायाधीश का दर्जा मिला. न्यायिक सेवा के दौरान उन्होंने बड़ी संख्या में मामलों की सुनवाई की और मई 2024 में उन्हें मध्य प्रदेश हाईकोर्ट का कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश बनाया गया. न्यायाधीश के रूप में अपने 12 वर्ष से अधिक के कार्यकाल में उन्होंने 499 फैसले सुनाए हैं. वह पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश से सुप्रीम कोर्ट में पदोन्नत हुए हैं.

न्यायमूर्ति श्री चंद्रशेखर: वकालत से लेकर मुख्य न्यायाधीश तक का सफर

रांची में जन्मे न्यायमूर्ति श्री चंद्रशेखर ने दिल्ली विश्वविद्यालय के कैंपस लॉ सेंटर से कानून की पढ़ाई पूरी की और 1993 में अधिवक्ता के रूप में पंजीकरण कराया. इसके बाद उन्होंने लगभग 19 वर्षों तक दीवानी और आपराधिक मामलों में सक्रिय वकालत की.

अपने वकालती करियर में उन्होंने करीब 3,500 मामलों में पक्ष रखा, जिनमें बड़ी संख्या सुप्रीम कोर्ट के मामलों की थी. उनके वकील रहते हुए लगभग 140 ऐसे फैसले आए जो सुप्रीम कोर्ट की रिपोर्टेड जजमेंट्स का हिस्सा बने.

जनवरी 2013 में उन्हें झारखंड हाईकोर्ट का अतिरिक्त न्यायाधीश नियुक्त किया गया. जून 2014 में उनकी स्थायी न्यायाधीश के रूप में पुष्टि हुई. दिसंबर 2023 में उन्होंने कुछ समय के लिए झारखंड हाईकोर्ट के कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश की जिम्मेदारी भी निभाई. बाद में उनका तबादला बॉम्बे हाईकोर्ट कर दिया गया, जहां सितंबर 2025 में उन्होंने 49वें मुख्य न्यायाधीश के रूप में शपथ ली.

न्यायमूर्ति संजीव सचदेवा: अदालतों में दशकों का व्यापक अनुभव

न्यायमूर्ति संजीव सचदेवा ने 1988 में दिल्ली बार काउंसिल में अपना पंजीकरण कराया और जिला अदालतों से लेकर दिल्ली हाईकोर्ट तथा सुप्रीम कोर्ट तक विभिन्न स्तरों पर वकालत की.

उन्होंने बार काउंसिल ऑफ इंडिया के स्थायी वकील और केंद्र सरकार के वरिष्ठ पैनल अधिवक्ता के रूप में भी लंबे समय तक सेवाएं दीं. उनके अनुभव और विशेषज्ञता को देखते हुए जुलाई 2011 में दिल्ली हाईकोर्ट ने उन्हें वरिष्ठ अधिवक्ता का दर्जा प्रदान किया.

इसके बाद 2013 में उन्हें दिल्ली हाईकोर्ट का अतिरिक्त न्यायाधीश नियुक्त किया गया. एक दशक से अधिक समय तक न्यायाधीश के रूप में उन्होंने टैक्स, आपराधिक, सिविल और कमर्शियल मामलों से जुड़े अनेक महत्वपूर्ण मामलों की सुनवाई की. वह मध्य प्रदेश हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश से सुप्रीम कोर्ट में जज बने हैं.

न्यायमूर्ति अरुण पल्ली: कानूनी परंपरा वाले परिवार से आते हैं

न्यायमूर्ति अरुण पल्ली ऐसे परिवार से आते हैं, जिसकी चार पीढ़ियां कानूनी पेशे से जुड़ी रही हैं. कानून की पढ़ाई पूरी करने के बाद उन्होंने 1988 में पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट में वकालत शुरू की.

अपने करियर में उन्होंने दीवानी, आपराधिक, संवैधानिक, राजस्व, औद्योगिक और श्रम कानून से जुड़े मामलों में काम किया. सितंबर 2004 से मार्च 2007 तक उन्होंने पंजाब सरकार के अतिरिक्त महाधिवक्ता के रूप में भी जिम्मेदारी निभाई.

अप्रैल 2007 में उन्हें वरिष्ठ अधिवक्ता का दर्जा मिला. इसके बाद दिसंबर 2013 में वह पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट के न्यायाधीश बने. अप्रैल 2025 में उन्होंने जम्मू-कश्मीर और लद्दाख हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश का पद संभाला.

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वी. मोहना: सुप्रीम कोर्ट में पहुंचने वाली दूसरी महिला वरिष्ठ अधिवक्ता

वरिष्ठ अधिवक्ता वी. मोहना का नाम इस सूची में विशेष महत्व रखता है. न्यायमूर्ति इंदु मल्होत्रा के बाद वह बार से सीधे सुप्रीम कोर्ट में नियुक्ति के लिए कॉलेजियम द्वारा अनुशंसित होने वाली दूसरी महिला हैं. वह अपने परिवार की पहली वकील भी हैं. वह सुप्रीम कोर्ट के 76 वर्षों के इतिहास में न्यायाधीश बनने वाली 12वीं महिला हैं.

वी. मोहना ने 1983 से 1988 के बीच कोयंबटूर लॉ कॉलेज के पांच वर्षीय विधि पाठ्यक्रम के पहले बैच से कानून की डिग्री हासिल की. दिल्ली आने के बाद उन्होंने वरिष्ठ अधिवक्ता सी. एस. वैद्यनाथन के साथ काम किया और बाद में देश के पूर्व अटॉर्नी जनरल के. के. वेणुगोपाल की टीम का हिस्सा रहीं.

सुप्रीम कोर्ट ने अप्रैल 2015 में उन्हें वरिष्ठ अधिवक्ता का दर्जा प्रदान किया. उनका कानूनी अनुभव नागरिक, आपराधिक, संवैधानिक, सेवा, बैंकिंग, सारफेसी, बौद्धिक संपदा, साइबर अपराध और कॉरपोरेट कानून जैसे कई क्षेत्रों में फैला हुआ है. हालांकि संवैधानिक और दीवानी मामलों में उन्होंने विशेष पहचान बनाई है.

इन पांचों नामों का चयन अनुभव, न्यायिक क्षमता और कानूनी विशेषज्ञता के संतुलित मिश्रण के रूप में देखा जा रहा है. सुप्रीम कोर्ट में उनकी नियुक्ति से शीर्ष अदालत को न केवल अतिरिक्त ताकत मिलेगी, बल्कि न्यायिक व्यवस्था में विविध अनुभवों का लाभ भी मिलेगा.

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उत्तर प्रदेश के भदोही जिले के रहने वाले अनन्त ने इलाहाबाद विश्वविद्यालय से मास कम्युनिकेशन में पोस्ट ग्रेजुएशन की पढ़ाई पूरी की है. उन्होंने 2024 में अपने पत्रकारिता करियर की शुरुआत प्रभात खबर में खेल पत्रकार के रूप में की थी, जहां उन्होंने करीब एक वर्ष तक क्रिकेट और अन्य खेलों से जुड़ी खबरों को कवर किया. बाद में अपनी रुचि और विशेषज्ञता के चलते उन्होंने अंतरराष्ट्रीय डेस्क का रुख किया और आज वैश्विक राजनीति व भू-राजनीति के प्रमुख विषयों पर लेखन कर रहे हैं.

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