FDI: इससे पहले चीन सहित पड़ोसी देशों के शेयरधारकों वाली विदेशी कंपनियों को भारत में किसी भी क्षेत्र में निवेश करने के लिए अनिवार्य अनुमति लेनी पड़ती थी. हालांकि क्षेत्र विशेष से जुड़ी सीमाएं और प्रवेश मार्ग समेत एफडीआई नियमों की अन्य शर्तें लागू रहेंगी.
एफडीआई में ढील के बावजूद देना होगा निवेश से संबंधित जानकारी
सरकार ने एफडीआई नियमों में भले ही ढील दे दी है, लेकिन निवेश से संबंधित जानकारी/विवरण डीपीआईआईटी को पहले से देना अनिवार्य होगा. सरकार ने इसक लिए 2020 के प्रेस नोट-3 में संशोधन किया है.
निवेश प्रस्तावों की शीघ्र मंजूरी का निर्णय
सरकार ने विशिष्ट क्षेत्रों में निवेश प्रस्तावों की शीघ्र मंजूरी का भी निर्णय लिया है. इसके तहत, पूंजीगत वस्तुओं, इलेक्ट्रॉनिक पूंजीगत वस्तुओं, इलेक्ट्रॉनिक कलपुर्जे, पॉलीसिलिकॉन और इनगॉट-वेफर या कैबिनेट सचिव की अध्यक्षता वाली सचिवों की समिति निवेश के प्रस्तावों पर 60 दिन के भीतर कदम उठाएगी और निर्णय लिए जाएंगे.
अधिकांश शेयर और नियंत्रण भारतीय नागरिकों के पास रहेगा
निवेशित इकाई की अधिकांश शेयर और नियंत्रण हमेशा भारतीय निवासी नागरिक के पास रहेगा. सरकार ने कोविड-19 महामारी के कारण भारतीय कंपनियों के जबरिया अधिग्रहणों को रोकने के लिए 17 अप्रैल, 2020 को प्रेस नोट-3 (2020) के माध्यम से प्रत्यक्ष विदेशी निवेश नीति में संशोधन किया था.
भारत के साथ भूमि सीमा साझा करने वाले देश
भारत के साथ भूमि सीमा साझा करने वाले देश चीन, बांग्लादेश, पाकिस्तान, भूटान, नेपाल, म्यांमा और अफगानिस्तान हैं. भारत में अप्रैल, 2000 से दिसंबर, 2025 तक आये कुल एफडीआई इक्विटी प्रवाह में चीन की हिस्सेदारी केवल 0.32 प्रतिशत (2.51 अरब अमेरिकी डॉलर) है और वह 23वें स्थान पर है. जून, 2020 में गलवान घाटी में हुई भीषण झड़प के बाद दोनों देशों के बीच संबंधों में खटास आ गयी थी. इसके बाद भारत ने टिक टॉक, वीचैट और अलीबाबा के यूसी ब्राउजर जैसे 200 से अधिक चीनी मोबाइल ऐप पर प्रतिबंध लगा दिया था.
