FDI: चीन सहित पड़ोसी देशों के लिए FDI में बड़ी राहत, भारत ने नियम आसान किए

FDI: चीन सहित पड़ोसी देश अब आसानी से भारत में निवेश कर सकते हैं. ऐसा इसलिए क्योंकि केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार ने प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) नियमों में ढील दे दी है. अब पड़ोसी देशों की 10 प्रतिशत तक हिस्सेदारी वाली विदेशी कंपनियां बिना अनिवार्य अनुमति के भारत में निवेश कर सकती हैं.

FDI: इससे पहले चीन सहित पड़ोसी देशों के शेयरधारकों वाली विदेशी कंपनियों को भारत में किसी भी क्षेत्र में निवेश करने के लिए अनिवार्य अनुमति लेनी पड़ती थी. हालांकि क्षेत्र विशेष से जुड़ी सीमाएं और प्रवेश मार्ग समेत एफडीआई नियमों की अन्य शर्तें लागू रहेंगी.

एफडीआई में ढील के बावजूद देना होगा निवेश से संबंधित जानकारी

सरकार ने एफडीआई नियमों में भले ही ढील दे दी है, लेकिन निवेश से संबंधित जानकारी/विवरण डीपीआईआईटी को पहले से देना अनिवार्य होगा. सरकार ने इसक लिए 2020 के प्रेस नोट-3 में संशोधन किया है.

निवेश प्रस्तावों की शीघ्र मंजूरी का निर्णय

सरकार ने विशिष्ट क्षेत्रों में निवेश प्रस्तावों की शीघ्र मंजूरी का भी निर्णय लिया है. इसके तहत, पूंजीगत वस्तुओं, इलेक्ट्रॉनिक पूंजीगत वस्तुओं, इलेक्ट्रॉनिक कलपुर्जे, पॉलीसिलिकॉन और इनगॉट-वेफर या कैबिनेट सचिव की अध्यक्षता वाली सचिवों की समिति निवेश के प्रस्तावों पर 60 दिन के भीतर कदम उठाएगी और निर्णय लिए जाएंगे.

अधिकांश शेयर और नियंत्रण भारतीय नागरिकों के पास रहेगा

निवेशित इकाई की अधिकांश शेयर और नियंत्रण हमेशा भारतीय निवासी नागरिक के पास रहेगा. सरकार ने कोविड-19 महामारी के कारण भारतीय कंपनियों के जबरिया अधिग्रहणों को रोकने के लिए 17 अप्रैल, 2020 को प्रेस नोट-3 (2020) के माध्यम से प्रत्यक्ष विदेशी निवेश नीति में संशोधन किया था.

भारत के साथ भूमि सीमा साझा करने वाले देश

भारत के साथ भूमि सीमा साझा करने वाले देश चीन, बांग्लादेश, पाकिस्तान, भूटान, नेपाल, म्यांमा और अफगानिस्तान हैं. भारत में अप्रैल, 2000 से दिसंबर, 2025 तक आये कुल एफडीआई इक्विटी प्रवाह में चीन की हिस्सेदारी केवल 0.32 प्रतिशत (2.51 अरब अमेरिकी डॉलर) है और वह 23वें स्थान पर है. जून, 2020 में गलवान घाटी में हुई भीषण झड़प के बाद दोनों देशों के बीच संबंधों में खटास आ गयी थी. इसके बाद भारत ने टिक टॉक, वीचैट और अलीबाबा के यूसी ब्राउजर जैसे 200 से अधिक चीनी मोबाइल ऐप पर प्रतिबंध लगा दिया था.

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Published by: ArbindKumar Mishra

अरबिंद कुमार मिश्रा वर्तमान में प्रभात खबर डिजिटल में एक अनुभवी पत्रकार के रूप में कार्यरत हैं. अप्रैल 2011 से संस्थान का हिस्सा रहे अरबिंद के पास पत्रकारिता के क्षेत्र में बतौर रिपोर्टर और डेस्क एडिटर 15 वर्षों से अधिक का अनुभव है. वर्तमान में वह नेशनल और इंटरनेशनल डेस्क की जिम्मेदारी संभालने के साथ-साथ एक पूरी शिफ्ट का नेतृत्व (Shift Lead) भी कर रहे हैं. विशेषज्ञता और अनुभव अरबिंद की लेखनी में खबरों की गहराई और स्पष्टता है. उनकी मुख्य विशेषज्ञता इन क्षेत्रों में है. राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय मामले: वैश्विक राजनीति और देश की बड़ी घटनाओं पर पैनी नजर. खेल पत्रकारिता: झारखंड में आयोजित 34वें नेशनल गेम्स से लेकर JSCA स्टेडियम में हुए कई अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट मैचों की ग्राउंड रिपोर्टिंग का अनुभव. झारखंड की संस्कृति: राज्य की कला, संस्कृति और जनजातीय समुदायों की समस्याओं और उनकी जीवनशैली पर विशेष स्टोरीज. पंचायतनामा: ग्रामीण विकास और जमीनी मुद्दों पर 'पंचायतनामा' के लिए विशेष ग्राउंड रिपोर्टिंग. करियर का सफर प्रभात खबर डिजिटल से अपने करियर की शुरुआत करने वाले अरबिंद ने पत्रकारिता के हर आयाम को बखूबी जिया है. डिजिटल मीडिया की बारीकियों को समझने से पहले उन्होंने आकाशवाणी (All India Radio) और दूरदर्शन जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में एंकरिंग के जरिए अपनी आवाज और व्यक्तित्व की छाप छोड़ी है. शिक्षा और योग्यता UGC NET: अरबिंद मिश्रा ने यूजीसी नेट (UGC NET) उत्तीर्ण की है. मास्टर्स (MA): रांची यूनिवर्सिटी के जनजातीय एवं क्षेत्रीय भाषा विभाग से एमए की डिग्री. ग्रेजुएशन: रांची यूनिवर्सिटी से ही मास कम्युनिकेशन एंड जर्नलिज्म में स्नातक.

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