Farmers Protest : एक और प्रदर्शनकारी की मौत, पुलिस ने किसान नेताओं के खिलाफ NSA लगाने का फैसला लिया वापस

Farmers Protest : प्रदर्शनकारी शुभकरण सिंह के परिवार को मुआवजा देने का ऐलान पंजाब सरकार ने किया है. इस बीच खनौरी बॉर्डर से एक और प्रदर्शनकारी के मौत की खबर आ रही है.

Farmers Protest में शामिल एक प्रदर्शनकारी के मौत की खबर आ रही है. मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, खनौरी बॉर्डर पर हार्ट अटैक से एक प्रदर्शनकारी की मौत हो गई है. इस बीच खबर है कि हरियाणा पुलिस ने किसान नेताओं के खिलाफ रासुका लगाने का फैसला वापस ले लिया है. मामले की जानकारी देते हुए ASP पूजा डाबला ने मीडिया को जानकारी दी कि राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (NSA) के संबंध में वरिष्ठ अधिकारियों द्वारा निर्णय लिया गया है कि अभी हम इसका कोई भी प्रावधान लागू नहीं करेंगे. उन्होंने कहा कि NSA के तहत कोई कार्रवाई नहीं की जा रही है. मैं किसानों से अपील करती हूं कि वे लॉ एंड ऑर्डर हाथ में लेने से बचें. कानून-व्यवस्था बनाए रखने में हमारी मदद करें और शांति बनाए रखें.

आपको बता दें कि इससे एक दिन पहले अंबाला पुलिस की ओर से एक बयान जारी किया गया था. इसमें कहा गया था कि कानून व्यवस्था बनाए रखने और आपराधिक गतिविधियों को रोकने के लिए राष्ट्रीय सुरक्षा अधिनियम, 1980 की धारा 2(3) के तहत प्रदर्शनकारी किसान संगठनों के पदाधिकारियों पर कार्रवाई करेगी. पदाधिकारियों को हिरासत में लेने की प्रक्रिया शुरू करने की बात पुलिस की ओर से की गई थी.

प्रदर्शनकारी शुभकरण सिंह की हुई थी मौत

इस बीच पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान ने खनौरी सीमा पर मारे गए प्रदर्शनकारी शुभकरण सिंह के परिवार को मुआवजा देने का ऐलान किया है. उन्होंने मृतक के परिवार को मुआवजे के तौर पर एक करोड़ रुपये और उसकी बहन को सरकारी नौकरी देने की घोषणा की. उल्लेखनीय है कि पंजाब-हरियाणा सीमा पर खनौरी में बुधवार को झड़प में बठिंडा के प्रदर्शनकारी शुभकरण सिंह की मौत हो गई थी जो 21 वर्ष का था. इस झड़प में 12 पुलिसकर्मी भी घायल हुए थे.

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क्या है किसानों की मांग

किसान नेताओं ने शुभकरण सिंह की मौत हो जाने के बाद बुधवार को दिल्ली मार्च दो दिन के लिए रोक दिया था. किसानों की ओर से कहा गया था कि वे शुक्रवार शाम को अपना अगला कार्यक्रम तय करेंगे. पंजाब के किसान स्वामीनाथन आयोग की सिफारिशों को लागू करने के साथ-साथ किसानों और खेत मजदूरों के लिए पेंशन, बिजली दरों में कोई बढ़ोतरी नहीं करने, पुलिस में दर्ज मामलों को वापस लेने, 2021 की लखीमपुर खीरी हिंसा के पीड़ितों के लिए ‘न्याय’ देने की मांग कर रहे हैं. यहीं नहीं किसान भूमि अधिग्रहण अधिनियम 2013 को बहाल करने और 2020-21 के आंदोलन के दौरान मारे गए किसानों के परिवारों को मुआवजा देने की भी मांग कर रहे हैं.

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Author: Amitabh Kumar

अमिताभ कुमार झारखंड की राजधानी रांची के रहने वाले हैं और पिछले कई वर्षों से पत्रकारिता की दुनिया में सक्रिय हैं. डिजिटल न्यूज में अच्छी पकड़ है और तेजी के साथ सटीक व भरोसेमंद खबरें लिखने के लिए जाने जाते हैं. वर्तमान में अमिताभ प्रभात खबर डिजिटल में नेशनल और वर्ल्ड न्यूज पर फोकस करते हैं और तथ्यों पर आधारित खबरों को प्राथमिकता देते हैं. हरे-भरे झारखंड की मिट्टी से जुड़े अमिताभ ने अपनी शुरुआती पढ़ाई जिला स्कूल रांची से पूरी की और फिर Ranchi University से ग्रेजुएशन के साथ पत्रकारिता की पढ़ाई की. पढ़ाई के दौरान ही साल 2011 में रांची में आयोजित नेशनल गेम को कवर करने का मौका मिला, जिसने पत्रकारिता के प्रति जुनून को और मजबूत किया.1 अप्रैल 2011 से प्रभात खबर से जुड़े और शुरुआत से ही डिजिटल पत्रकारिता में सक्रिय रहे. खबरों को आसान, रोचक और आम लोगों की भाषा में पेश करना इनकी खासियत है. डिजिटल के साथ-साथ प्रिंट के लिए भी कई अहम रिपोर्ट कीं. खासकर ‘पंचायतनामा’ के लिए गांवों में जाकर की गई ग्रामीण रिपोर्टिंग करियर का यादगार अनुभव है. प्रभात खबर से जुड़ने के बाद कई बड़े चुनाव कवर करने का अनुभव मिला. 2014, 2019 और 2024 के लोकसभा चुनाव के साथ-साथ झारखंड विधानसभा चुनावों (2014, 2019 और 2024) की भी ग्राउंड रिपोर्टिंग की है. चुनावी माहौल, जनता के मुद्दे और राजनीतिक हलचल को करीब से समझना रिपोर्टिंग की खास पहचान रही है.

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