Lockdown In India: देश में फिर लगेगा लॉकडाउन, 20 दिन स्कूल रहेंगे बंद? जानें वायरल मैसेज का सच

PIB Fact Check: सोशल मीडिया में जो मैसेज वायरल हो रहा है, उसमें दावा किया जा रहा है कि Covid19 के कारण देश में लॉकडाउन लगेगा और स्कूल/कॉलेज अगले 20 दिन तक बंद रहेंगे. ऐसी जानकारी लोगों के मैसेज बॉक्स, वाट्सऐप मैसेज में तेजी से शेयर किया जा रहा है.

चीन में कोरोना विस्फोट से पूरी दुनिया पर एक बार फिर से महामारी का खतरा मंडराने लगा है. कोरोना रिटर्न के खतरे को देखते हुए भारत सहित दुनिया के कई देशों ने अलर्ट मोड़ पर काम करना शुरू कर दिया है. चीन से यात्रा पर सख्ती बढ़ा दी है. इधर भारत में भी ओमिक्रोन के सब वैरिएंट के कई मामले आने लगे हैं. इस बीच देश में लॉकडाउन लगने की अफवाहें भी तेजी से फैलने लगी हैं. सोशल मीडिया में कई मैसेज कोरोना को लेकर चल रहे हैं, जिसमें दावा किया जा रहा है कि जल्द की भारत में लॉकडाउन की घोषणा कर दी जाएगी. स्कूल बंद होने की खबरें भी वायरल हो रही हैं. तो आइये ऐसे वायरल मैसेज की सच्चाई के बारे में फैक्ट चेक करें.

लॉकडाउन और स्कूल बंद होने को लेकर क्या किया जा रहा दावा

सोशल मीडिया में जो मैसेज वायरल हो रहा है, उसमें दावा किया जा रहा है कि Covid19 के कारण देश में लॉकडाउन लगेगा और स्कूल/कॉलेज अगले 20 दिन तक बंद रहेंगे. ऐसे मैसेज लोगों के मैसेज बॉक्स, वाट्सऐप मैसेज में तेजी से शेयर किया जा रहा है.

क्या है वायरल मैसेज का सच

भारत में लॉकडाउन और स्कूल-कॉलेज बंद होने को लेकर मैसेज वायरल होने के बाद पीआईबी फैक्ट चेक की टीम ने इसकी पड़ताल की. जिसमें पाया गया कि लॉकडाउन को लेकर जो दावे किये जा रहे हैं, उसमें कोई भी सच्चाई नहीं है. पीआईबी फैक्ट चेक ने अपने आधिकारिक ट्विटर हैंडल से वायरल मैसेज को शेयर किया और बताया, सभी दावे फर्जी हैं.

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कोविड से जुड़ी जानकारी शेयर करने से पहले कर लें फैक्ट चेक

कोरोना महामारी के दौरान गलत जानकारी शेयर करना और लोगों को भ्रमित करना एक अपराध है. और इसके लिए संबंध व्यक्ति पर महामारी एक्ट के तहत बड़ी कार्रवाई भी हो सकती है. इसलिए हमेशा सलाह दी जाती है कि कोविड से जुड़ी ऐसी किसी भी जानकारी को शेयर करने से पहले Fact Check अवश्य कर लें. ताकी लोगों तक सभी जानकारी पहुंच सके.

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लेखक के बारे में

Published by: Arbindkumar mishra

अरबिंद कुमार मिश्रा मुख्यधारा की पत्रकारिता में 15 वर्षों से अधिक का अनुभव रखने वाले एक वरिष्ठ पत्रकार और लेखक हैं. वर्तमान में, वह प्रभात खबर डॉट कॉम (Prabhat Khabar) में सीनियर कंटेंट राइटर के रूप में अपनी सेवाएं दे रहे हैं. अरबिंद नेशनल, इंटरनेशनल और स्पोर्ट्स कैटेगरी में अपनी लेखनी के लिए जाने जाते हैं. गहरी रिसर्च पर आधारित स्पेशल स्टोरीज, रिपोर्टिंग और जटिल मुद्दों पर आसान भाषा में 'एक्सप्लेनर' लिखना उनकी मुख्य यूएसपी (USP) है.

झारखंड की समृद्ध संस्कृति और लोक परंपराओं में उनकी गहरी रुचि है. अपनी उत्कृष्ट और सरोकार से जुड़ी रिपोर्टिंग के लिए उन्हें संस्थान स्तर पर कई बार सम्मानित और पुरस्कृत भी किया जा चुका है.

करियर का सफरनामा

अरबिंद ने अपने पत्रकारिता करियर की शुरुआत देश की प्रतिष्ठित बहुभाषी न्यूज एजेंसी 'हिंदुस्थान समाचार' से बतौर रिपोर्टर की थी. इसके बाद उन्होंने प्रसार भारती के अंग दूरदर्शन और आकाशवाणी के साथ भी काम किया, जहां उन्होंने एंकरिंग, वॉइस-ओवर और रिपोर्टिंग के गुर सीखे. साल 2011 में वह 'प्रभात खबर डॉट कॉम' से जुड़े और तब से लगातार डिजिटल पत्रकारिता के क्षेत्र में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं.

प्रमुख उपलब्धियां और ग्राउंड रिपोर्टिंग

खेल पत्रकारिता और जमीनी रिपोर्टिंग में अरबिंद का योगदान उल्लेखनीय रहा है. उनकी कुछ सबसे बड़ी उपलब्धियों में शामिल हैं:

34वें राष्ट्रीय खेल: झारखंड में आयोजित ऐतिहासिक 34वें नेशनल गेम्स की बेहतरीन और व्यापक ग्राउंड रिपोर्टिंग.

अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट: रांची के जेएससीए (JSCA) स्टेडियम में आयोजित कई इंटरनेशनल क्रिकेट मैचों को करीब से कवर किया.

पुरुष हॉकी वर्ल्ड कप (2018): भुवनेश्वर में आयोजित वर्ल्ड कप के फाइनल मुकाबले की शानदार स्पोर्ट्स रिपोर्टिंग.

पंचायतनामा: प्रभात खबर के इस खास विंग के लिए ग्रामीण इलाकों का दौरा कर कई प्रेरक 'सक्सेस स्टोरीज' लिखीं.

शैक्षणिक योग्यता (Education & Credentials)

UGC NET: साल 2019 में यूजीसी नेट (UGC NET) की परीक्षा उत्तीर्ण की.

बैचलर ऑफ जर्नलिज्म (BJMC): रांची विश्वविद्यालय से साल 2011 में पत्रकारिता में स्नातक की डिग्री हासिल की.

एम.ए. (नागपुरी भाषा): रांची विश्वविद्यालय के 'जनजातीय एवं क्षेत्रीय भाषा विभाग' से साल 2009 में नागपुरी भाषा में स्नातकोत्तर (MA) की डिग्री हासिल की.

लेखन शैली और विशेषज्ञता: एक्सप्लेनर, रिसर्च बेस्ड स्टोरीज, स्पोर्ट्स जर्नलिज्म, इंटरनेशनल अफेयर्स और झारखंड की लोक-संस्कृति.

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