Delhi Election 2025: जंगपुरा सीट पर मनीष सिसोदिया के समक्ष साख बचाने की चुनौती

सिसोदिया पिछला तीन चुनाव पूर्वी दिल्ली के पटपड़गंज से लड़े, लेकिन पिछले विधानसभा चुनाव में वे किसी तरह चुनाव जीतने में सफल रहे. ऐसे में आम आदमी पार्टी ने इस बार मनीष सिसोदिया को पटपड़गंज की बजाय सुरक्षित मानी जानी जानी जंगपुरा से मैदान में उतारने का फैसला किया. लेकिन सिसोदिया कठिन मुकाबले में फंसते दिख रहे हैं.

Delhi Election 2025: विधानसभा चुनाव में इस बार नयी दिल्ली के बाद दूसरी सबसे बड़ी हॉट सीट जंगपुरा बन चुकी है. क्योंकि जंगपुरा विधानसभा सीट से आम आदमी पार्टी की ओर से पूर्व उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया चुनाव लड़ रहे हैं. सिसोदिया पिछला तीन चुनाव पूर्वी दिल्ली के पटपड़गंज से लड़े, लेकिन पिछले विधानसभा चुनाव में वे किसी तरह चुनाव जीतने में सफल रहे. ऐसे में आम आदमी पार्टी ने इस बार मनीष सिसोदिया को पटपड़गंज की बजाय सुरक्षित मानी जानी जानी जंगपुरा से मैदान में उतारने का फैसला किया. लेकिन सिसोदिया कठिन मुकाबले में फंसते दिख रहे हैं. कांग्रेस ने नगर निगम के पूर्व मेयर फरहाद सूरी और भाजपा ने पूर्व विधायक तरविंदर सिंह मारवाह को चुनावी मैदान में उतार कर मुकाबले को काफी रोचक बना दिया है. 

जंगपुरा सीट लाजपत नगर से लेकर दरियागंज तक फैली हुई है. इस सीट पर मुस्लिम मतदाता हार-जीत में निर्णायक भूमिका अदा करते हैं. कांग्रेस उम्मीदवार फरहाद सूरी वर्ष 1996 से पार्षद हैं और इस इलाके में हर वर्ग के बीच उनकी अच्छी छवि रही है. वहीं भाजपा ने कांग्रेस के टिकट पर तीन बार विधायक रहे तरविंदर सिंह मारवाह को उतारकर मुकाबले को काफी रोचक बना दिया है. जंगपुरा सीट पर 1993 से 2008 के बीच कांग्रेस और BJP के बीच मुख्य मुकाबला होता रहा है और अधिकांश बार कांग्रेस उम्मीदवार की चुनाव जीतते रहे. लेकिन वर्ष 2013 के बाद आम आदमी पार्टी ने इस सीट पर दबदबा कायम कर लिया. सूरी और मारवाह की इलाके में अच्छी पैठ है और यह आम आदमी पार्टी के लिए परेशानी का सबब बन सकती है.


क्यों मुश्किल में हो सकते हैं मनीष सिसोदिया


जंगपुरा क्षेत्र में मुस्लिम मतदाता बहुसंख्यक हैं और यह चुनावी परिणामों में सबसे निर्णायक भूमिका निभाते हैं. पूर्व में इस वर्ग को कांग्रेस को समर्थन मिलता रहा है, लेकिन आम आदमी पार्टी के उभार के बाद यह वर्ग केजरीवाल के साथ जुड़ गया. इसके अलावा सिख और पंजाबी समुदाय के मतदाताओं की भी संख्या काफी अधिक है. पूर्व में इस वर्ग को भाजपा का परंपरागत वोटर माना जाता रहा. लेकिन पिछले दो चुनाव में इस वर्ग का समर्थन आम आदमी पार्टी को मिला. लेकिन इस बार हालात बदले दिख रहे हैं. आम आदमी पार्टी की सरकार के खिलाफ लोगों में नाराजगी देखी जा रही है. इस इलाके में पानी की समस्या हाल के वर्षों में गंभीर हुई हैं. साथ ही इलाके में सड़कों की स्थिति काफी खराब है.

साफ-सफाई एक बड़ा मुद्दा है. स्थानीय निवासी हरपाल सिंह का कहना है कि आम आदमी पार्टी की सरकार के दौरान बुनियादी सुविधाओं की स्थिति काफी खराब हुई है. कई इलाके में पानी की गंभीर समस्या है और कुछ इलाकों में गंदा पानी आता है. साफ-सफाई की स्थिति खराब हुई है. विधायक और पार्षद आम आदमी पार्टी का है, लेकिन शिकायतों पर कोई सुनवाई नहीं होती है. स्थानीय निवासी मोहम्मद असलम का कहना है कि आम आदमी पार्टी सरकार ने कोई अच्छा काम नहीं किया है. दिल्ली में ऐसी सरकार बने जो लोगों के हित में काम कर सके.

अधिकांश लोगों का कहना था कि मौजूदा विधायक के खिलाफ नाराजगी के कारण मनीष सिसोदिया को चुनाव में उतारा गया है. इलाके में झुग्गी-झोपड़ी वाले इलाकों में रहने वाले गरीब और मजदूर वर्ग की संख्या भी काफी अधिक है. मुस्लिम, सिख, और झुग्गी-झोपड़ी के मतदाता जिस पार्टी को समर्थन करते हैं, उसके जीत की अधिक संभावना होती है. लेकिन इस बार मतदाताओं में पहले की तरह जोश नहीं दिख रहा है. 

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लेखक के बारे में

Author: Vinay Tiwari

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