Defence: भारतीय सेना की शीर्ष स्तरीय बैठक आर्मी कमांडर्स कांफ्रेंस में सेना के बीच बेहतर समन्वय और रणनीति बनाने पर चर्चा की गयी. ‘भविष्य के लिए तैयार बल’ के तौर पर विकसित होने के लक्ष्य को हासिल करने के लिए सेना ने वर्ष 2026 को नेटवर्किंग और डेटा केंद्रित वर्ष घोषित किया है. सेना प्रमुख की अध्यक्षता में आयोजित सम्मेलन में कैबिनेट सचिव, रक्षा सचिव, राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार बोर्ड (एनएसबीए) के अध्यक्ष, वायु सेना और नौसेना के प्रमुख के अलावा वरिष्ठ अधिकारी शामिल हुए. इस दौरान युद्ध के तेजी से बदलते स्वरूप को देखते हुए रणनीति बनाने पर मंथन किया गया. पारंपरिक हथियारों के साथ तकनीक आधारित युद्ध के लिए तैयार रहने की रणनीति पर चर्चा की गयी.
इस दौरान तय किया गया कि सुरक्षा चुनौतियों से निपटने के लिए सेना, सरकार, नागरिक संस्थाओं और अन्य एजेंसियों को मिलकर काम करना होगा. इस साल सेना का पूरा फोकस तकनीक और डेटा के प्रयोग को बढ़ाने पर रहेगा ताकि सेना नयी तकनीक को अपना सके. इस दौरान ट्रेनिंग और युद्ध की नयी और बदलती रणनीति पर गहन विचार-विमर्श हुआ. इस दौरान ऑपरेशन सिंदूर से मिले सबक और वैश्विक स्तर पर मौजूदा परिचालन स्थितियों को ध्यान में रखते हुए मानवरहित हवाई प्रणालियों (यूएएस) और हवाई प्रणालियों (सी-यूएएस) को काउंटर करने के उपयोग सहित परिचालन क्षमता संबंधी आवश्यकताओं के विकास और उपयोग पर जोर दिया गया.
आधुनिकीकरण और नयी तकनीक पर रहेगा फोकस
सम्मेलन में में सेना के आधुनिकीकरण, नयी तकनीक और युद्ध के तरीकों में आ रहे बदलाव पर चर्चा की गयी. साथ ही रक्षा क्षेत्र में स्वदेशी उत्पादन को बढ़ाने पर जोर दिया गया. विशेषज्ञों ने कहा कि हार्मुज स्ट्रेट बंद होने के कारण सप्लाई रूट बाधित होने का असर दुनिया पर पड़ रहा है. भविष्य में ऐसे संकट के निपटने के लिए रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता पर जोर दिया गया. कमांडर कांफ्रेस में भारतीय सेना को युद्ध के बदलते तरीके के अनुसार तैयार करने, तकनीकी, डेटा के मामले में सशक्त बनाना है.
ईरान-अमेरिका और रूस-यूक्रेन युद्ध के दौरान ड्रोन के प्रभाव का आकलन कर इससे प्रभावी तरीके से लागू करने पर विचार किया गया. ताकि भारत भविष्य की सुरक्षा चुनौती के लिए खुद को तैयार कर सके. गौरतलब है कि भारतीय सेना हाल के युद्धों का अध्ययन कर रही है और इस अध्ययन के आधार पर रोडमैप तैयार कर सेना को सशक्त बनाने का कदम उठाया जाएगा. बदलते भू-राजनीतिक परिदृश्य और उभरते वैश्विक, क्षेत्रीय और आंतरिक सुरक्षा संबंधी पहलुओं और वैश्विक संघर्षों से मिले सबक से देश की रणनीतिक और सुरक्षा हित बेहतर बनाने का काम होगा.
