पुलिस थाने में प्यार,फिर छुप-छुप कर मिलना और फिर सर्विस रिवॉल्वर से किया शूट

Crime News : चितौड़गढ़ के बेगूं थाने में एक महिला कांस्टेबल पूनम दौसा कार्यरत थी. उसी थाने में पुलिस उपाधीक्षक अंजलि सिह का अंगरक्षक बनकर एक कांस्टेबल आया, जिसका नाम था सियाराम. पूनम और सियाराम के बीच पहले तो दोस्ती हुई और बाद में यह दोस्ती प्यार में बदल गई.

Crime News : प्यार कभी भी, कहीं भी किसी से भी हो सकता है. यह बात पूरे सौ फीसदी सच तो है,लेकिन कभी-कभार प्यार का अंजाम इतना बुरा होता है कि रुह कांप जाती है. कुछ ऐसा ही वाकया राजस्थान के चितौड़गढ़ में नजर आया है. जहां प्यार की शुरुआत तो बहुत अच्छी रही,लेकिन अंजाम डराने वाला है.

दोस्ती प्यार में बदली

चितौड़गढ़ के बेगूं थाने में एक महिला कांस्टेबल पूनम दौसा कार्यरत थी. उसी थाने में पुलिस उपाधीक्षक अंजलि सिह का अंगरक्षक बनकर एक कांस्टेबल आया, जिसका नाम था सियाराम. पूनम और सियाराम के बीच पहले तो दोस्ती हुई और बाद में यह दोस्ती प्यार में बदल गई. प्यार का जुनून इतना हावी था कि दोनों छुप-छुप कर मिलने भी लगे. थाने के अन्य स्टाॅफ को भी उनकी दोस्ती की खबर थी, लेकिन उनके बीच प्यार कितना गहरा है इसका पता किसी को नहीं था.

सियाराम ने पहले प्रेमिका को गोली मारी, फिर खुद को भी शूट किया

सियाराम थाने के बगल में ही एक कमरे में रहता था, जिस दिन यह खौफनाक हादसा हुआ, उस दिन पूनम उससे मिलने उसके कमरे पर गई थी. अचानक गोली चलने की आवाज सुनकर आसपास के लोग वहां पहुंचे. तो पता चला कि सियाराम ने पहले पूनम को गोली मारी और फिर खुद को भी गोली मार ली. दोनों को घायल अवस्था में अस्पताल में भर्ती कराया गया है.

गोली मारने की वजह को किसी को पता नहीं

सियाराम और पूनम के बीच अफेयर की जानकारी तो लोगों को थी, लेकिन सियाराम ने पूनम को गोली क्यों मारी इसके बारे में किसी को कोई सूचना नहीं है. कयास लगाए जा रहे हैं कि उन दोनों के बीच किसी बात को लेकर विवाद हुआ होगा, इसलिए सियाराम ने गोली चला दी होगी और बाद में खुद को भी गोली मार ली.

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By Rajneesh anand

रजनीश आनंद प्रभात खबर में सीनियर चीफ कंटेंट राइटर के पद पर कार्यरत हैं और पत्रकारिता के क्षेत्र में 25 वर्षों से अधिक का अनुभव रखती हैं.फिलहाल वे प्रभात खबर के ओरिजिनल, नेशनल, इंटरनेशनल और खेल कैटेगरी के लिए राइटिंग का काम करती हैं. उनकी पहचान फैक्ट बेस्ट रिपोर्टिंग, रिसर्च बेस्ड स्टोरी और एक्सप्लेनर लेखन के लिए है.

राजनीति, सामाजिक सरोकार, ग्रामीण विकास, महिला मुद्दों, इतिहास, खेल, जनजातीय समाज और सार्वजनिक नीतियों से जुड़े विषयों पर उनकी विशेष रुचि रही है. वैसे मुद्दे जो समाज के हाशिये पर मौजूद समुदायों और आम लोगों के जीवन को प्रभावित करते हैं, लेकिन मुख्यधारा की बहस में अपेक्षाकृत कम जगह पाते हैं, ऐसे विषयों पर भी लेखन में रुचि रखती हैं.

रजनीश आनंद कई प्रतिष्ठित पत्रकारिता फेलोशिप से जुड़ी रही हैं. इन्क्लूसिव मीडिया–यूएनडीपी फेलोशिप के तहत उन्होंने झारखंड के पश्चिमी सिंहभूम (चाईबासा) जिले में माहवारी स्वच्छता और किशोरियों एवं महिलाओं के स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियों पर अध्ययन एवं रिपोर्टिंग की. झारखंड सरकार मीडिया फेलोशिप के दौरान महिला सशक्तिकरण, सरकारी योजनाओं के प्रभाव और सामाजिक बदलाव के विभिन्न आयामों पर काम किया. इसके अलावा सेव द चिल्ड्रन फेलोशिप के तहत बच्चों के अधिकार, शिक्षा, सुरक्षा और बाल कल्याण से जुड़े मुद्दों पर गहन रिपोर्टिंग की है.

आदिवासी समाज, विशेषकर मुंडा जनजाति के इतिहास, संस्कृति और समकालीन चुनौतियों पर उनका काम उल्लेखनीय माना जाता है. उन्होंने भूमि, पहचान, परंपरा, सामाजिक बदलाव और आदिवासी समुदायों के अधिकारों से जुड़े विषयों पर व्यापक फील्ड रिपोर्टिंग की है.हाल के वर्षों में उन्होंने झारखंड में ऊर्जा संक्रमण (Energy Transition) और जस्ट ट्रांजिशन की अवधारणा पर भी काम किया है. विशेष रूप से कोयला आधारित अर्थव्यवस्था वाले क्षेत्रों में रोजगार, आजीविका और सामाजिक प्रभावों से जुड़ी चुनौतियों पर उनकी रिपोर्टिंग ने महत्वपूर्ण सवाल उठाए हैं.

रजनीश आनंद झारखंड की राजधानी रांची में रहती हैं और इलाहाबाद विश्वविद्यालय से स्नातक हैं. उन्होंने वर्ष 2000 में पत्रकारिता की शुरुआत झारखंड जागरण दैनिक से की. इसके बाद प्रभात खबर, हिंदुस्तान, रांची एक्सप्रेस और दैनिक जागरण सहित कई प्रमुख समाचार संस्थानों के लिए रिपोर्टिंग और स्वतंत्र लेखन किया. प्रिंट मीडिया के दैनिक, साप्ताहिक, पाक्षिक और सांध्य प्रकाशनों में काम करने के साथ-साथ वे वर्ष 2012 से डिजिटल पत्रकारिता में सक्रिय हैं.

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