देश में कोरोना से मरने वालों की संख्या अबतक 38, स्वस्थ होकर घर लौटे 133, पिछले 12 घंटे में 240 नये मरीज

COVID19 positive cases rise to 1637 in India : देश में कोरोना वायरस के कारण अब तक 38 लोगों की मौत हुई और कुल 1,637 लोग संक्रमित पाये गये हैं. इस बात की पुष्टि स्वास्थ्य मंत्रालय ने की है. पिछले 12 घंटे में COVID19 के मरीजों की संख्या 240 बढ़ गयी है. अबतक 1637 जो मामले आये हैं उनमें से 38 की मौत हुई है, 133 स्वस्थ हो चुके हैं और 1466 का इलाज हो रहा है.

नयी दिल्ली : देश में कोरोना वायरस के कारण अब तक 38 लोगों की मौत हुई और कुल 1,637 लोग संक्रमित पाये हैं. इस बात की पुष्टि स्वास्थ्य मंत्रालय ने की है. पिछले 12 घंटे में COVID19 के मरीजों की संख्या 240 बढ़ गयी है. अबतक 1637 जो मामले आये हैं उनमें से 38 की मौत हुई है, 133 स्वस्थ हो चुके हैं और 1466 का इलाज हो रहा है.

आंध्रप्रदेश से जो आंकड़े सामने आ रहे हैं, उसके अनुसार दिल्ली के मरकज में शामिल होकर लौटे 43 लोग कोरोना पॉजिटिव हैं. इस बात की पुष्टि आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री आवास से हुई है. इस मरीजों के साथ ही आंध्र प्रदेश में कुल 87 कोरोना के मरीज सामने आ गये हैं.

वहीं महाराष्ट्र में कोरोना वायरस से दो और लोगों की मौत हुई है. महाराष्ट्र में कोरोना वायरस के संक्रमण से दो और लोगों की मौत होने से राज्य में इस महामारी से मृतकों की संख्या बढ़कर 12 हो गई है. स्वास्थ्य अधिकारी ने बताया कि मुम्बई के 75 वर्षीय एक व्यक्ति और पालघर निवासी 50 वर्षीय एक व्यक्ति की इस वायरस से मौत हो गयी है.

अधिकारी ने बताया, ‘‘75 वर्षीय एक व्यक्ति की मौत यहां मंगलवार को हुई. हम यह पता लगाने की कोशिश कर रहे है कि इस व्यक्ति ने किन स्थानों की यात्रा की और वह किन लोगों के संपर्क में आया.” उन्होंने बताया कि पालघर का रहने वाला व्यक्ति कहीं यात्रा पर नहीं गया था. आदिवासी बहुल जिले में कोरोना वायरस से यह पहली मौत है. महाराष्ट्र में कोरोना वायरस के कुल 320 मामले सामने आये हैं और 12 लोगों की जान जा चुकी है.

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Author: Rajneesh Anand

Published by: Prabhat Khabar

रजनीश आनंद प्रभात खबर में सीनियर चीफ कंटेंट राइटर के पद पर कार्यरत है.पत्रकारिता के क्षेत्र में 25 वर्षों का अनुभव रखती हैं. झारखंड की राजधानी रांची में रहने वाली रजनीश ने इलाहाबाद विश्वविद्यालय से स्नातक की शिक्षा प्राप्त की और वर्ष 2000-01 में पत्रकारिता की शुरुआत की. इन्होंने पहली नौकरी झारखंड जागरण दैनिक अखबार में की. उसके बाद इन्होंने प्रभात खबर, हिंदुस्तान, रांची एक्सप्रेस तथा दैनिक जागरण सहित कई प्रमुख समाचार संस्थानों के लिए रिपोर्टिंग और लेखन किया. प्रिंट मीडिया के दैनिक, साप्ताहिक, पाक्षिक और सांध्य संस्करणों में काम करने के बाद वे वर्ष 2012 से डिजिटल पत्रकारिता में सक्रिय हैं. रजनीश आनंद की पहचान तथ्यपरक रिपोर्टिंग, गहन शोध और विश्लेषणात्मक लेखन के लिए है. उनकी रुचि राजनीति, सामाजिक सरोकारों, ग्रामीण विकास, महिला मुद्दों, इतिहास, खेल, जनजातीय समाज और सार्वजनिक नीतियों से जुड़े विषयों में रही है। उन्होंने हमेशा उन मुद्दों को प्राथमिकता दी है जो समाज के हाशिये पर खड़े लोगों के जीवन को प्रभावित करते हैं, लेकिन मुख्यधारा की चर्चा में अपेक्षाकृत कम स्थान पाते हैं. वे कई प्रतिष्ठित पत्रकारिता फेलोशिप से जुड़ी रही हैं. इन्क्लूसिव मीडिया–यूएनडीपी फेलोशिप के तहत उन्होंने झारखंड के पश्चिमी सिंहभूम (चाईबासा) जिले में माहवारी स्वच्छता और किशोरियों एवं महिलाओं के स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियों पर विस्तृत अध्ययन और रिपोर्टिंग की. झारखंड सरकार मीडिया फेलोशिप के दौरान उन्होंने महिला सशक्तिकरण, सरकारी योजनाओं के प्रभाव और सामाजिक बदलाव के विभिन्न आयामों पर कार्य किया. इसके अतिरिक्त सेव द चिल्ड्रन फेलोशिप के तहत उन्होंने बच्चों के अधिकार, शिक्षा, सुरक्षा और बाल कल्याण से जुड़े मुद्दों पर गहन रिपोर्टिंग की. आदिवासी समाज, विशेषकर मुंडा जनजाति के इतिहास, संस्कृति और समकालीन चुनौतियों पर उनका काम उल्लेखनीय माना जाता है. उन्होंने भूमि, पहचान, परंपरा, सामाजिक बदलाव और आदिवासी समुदायों के अधिकारों से जुड़े विषयों पर व्यापक फील्ड रिपोर्टिंग की है. हाल के वर्षों में उन्होंने झारखंड में ऊर्जा संक्रमण (Energy Transition) और जस्ट ट्रांजिशन की अवधारणा पर भी काम किया है. विशेष रूप से कोयला आधारित अर्थव्यवस्था वाले क्षेत्रों में भविष्य की चुनौतियों, रोजगार, आजीविका और सामाजिक प्रभावों पर उनकी रिपोर्टिंग ने महत्वपूर्ण प्रश्न उठाए हैं. उनका मानना है कि ऊर्जा परिवर्तन की प्रक्रिया तभी सफल होगी जब उसमें प्रभावित समुदायों की भागीदारी और हितों को केंद्र में रखा जाए.पत्रकारिता उनके लिए केवल एक पेशा नहीं, बल्कि समाज के प्रति जिम्मेदारी निभाने का माध्यम है. जमीनी रिपोर्टिंग, तथ्यों की पड़ताल और जनसरोकारों को केंद्र में रखकर लिखना उनकी कार्यशैली की विशेषता रही है. इसके अतिरिक्त रजनीश आनंद कहानियां और कविताएं लिखने का शौक भी रखती है.

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