Consumer Affairs: शिकायतों के निपटारे में दक्षिणी राज्य आगे

साल 2025 में राष्ट्रीय उपभोक्ता हेल्पलाइन पर 5.41 लाख शिकायतें प्राप्त हुईं. इनमें से 23 फीसदी दक्षिणी राज्यों से थीं, जो मजबूत क्षेत्रीय भागीदारी को दर्शाता है. राष्ट्रीय स्तर पर दर्ज 28.54 लाख मामलों में से केवल 5.62 लाख मामले लंबित हैं जिनमें दक्षिणी राज्यों का हिस्सा केवल 13.34 फीसदी है.

Consumer Affairs: केंद्रीय उपभोक्ता मामले विभाग ने उपभोक्ता शिकायत निवारण तंत्र को मजबूत करने और संस्थागत दक्षता को बढ़ावा देने के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहराते हुए  “दक्षिणी राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों में उपभोक्ता संरक्षण” पर एक क्षेत्रीय कार्यशाला का आयोजन किया, जिसमें मुख्य रूप से उपभोक्ता शिकायत निवारण को मजबूत करने पर ध्यान केंद्रित करने, न्यायिक प्रमुखों, राज्य के अधिकारियों और कानूनी विशेषज्ञों की सक्रिय भागीदारी के साथ ई-जागृति, रियल एस्टेट, बीमा शिकायत निवारण तंत्र और चिकित्सा संबंधी लापरवाही के मामलों के निवारण में डिजिटल इनोवेशन के बारे में चर्चा की गई. साथ ही जन विश्वास अधिनियम, 2023 के अनुरूप विधिक माप विज्ञान को लागू करने के महत्व और स्वतंत्र परीक्षण के माध्यम से उत्पाद की गुणवत्ता और सुरक्षा सुनिश्चित करने, उपभोक्ताओं के संरक्षण और उद्योग की जवाबदेही में राष्ट्रीय परीक्षण शाला की महत्वपूर्ण भूमिका पर प्रकाश डाला गया.  

लंबित मामलों में दक्षिणी राज्यों का हिस्सा केवल 13 फीसदी

साल  2025 में राष्ट्रीय उपभोक्ता हेल्पलाइन पर 5.41 लाख शिकायतें प्राप्त हुईं. इनमें से 23 फीसदी दक्षिणी राज्यों से थीं, जो मजबूत क्षेत्रीय भागीदारी को दर्शाता है. राष्ट्रीय स्तर पर दर्ज 28.54 लाख मामलों में से केवल 5.62 लाख मामले लंबित हैं जिनमें दक्षिणी राज्यों का हिस्सा केवल 13.34 फीसदी है.  कर्नाटक और केरल आयोगों ने दर्ज मामलों की तुलना में अधिक मामलों का निपटारा किया और कई जिला आयोगों ने लगातार तीन वर्षों तक 100 फीसदी मामले निपटाए. वहीं वर्चुअल कोर्ट के माध्यम से 11,900 से अधिक मामलों की सुनवाई की गई. एआई-संचालित एकीकृत प्लेटफॉर्म ई-जागृति में ई-दाखिल और कॉन्फोनेट जैसी प्रमुख प्रणालियों को एक किया गया है. यह चैटबॉट-आधारित पंजीकरण, बहुभाषी पहुंच और कानूनी पेशेवरों और दिव्यांग उपयोगकर्ताओं के लिए सहायता जैसी सुविधाएं प्रदान करता है.

राष्ट्रीय उपभोक्ता हेल्पलाइन को मजबूत बनाने की पहल

केंद्रीय उपभोक्ता मामले विभाग की सचिव निधि खरे ने इस बात पर जोर दिया कि डिजिटल युग में अनुकूल कानूनी और डिजिटल तंत्र की आवश्यकता है. राइट टू रिपेयर पोर्टल, ई-जागृति और राष्ट्रीय उपभोक्ता हेल्पलाइन को मजबूत बनाने जैसी पहल मुकदमेबाजी से पहले उपभोक्ता शिकायतों के निवारण का त्वरित, परेशानी मुक्त और सस्ता तरीका है. उन्होंने डार्क पैटर्न, फर्जी समीक्षा और भ्रामक विज्ञापनों पर अंकुश लगाने के लिए केंद्रीय उपभोक्ता संरक्षण प्राधिकरण ( सीसीपीए) के नियामक उपायों का भी उल्लेख किया और दक्षिणी राज्यों के अनुकरणीय प्रदर्शन की प्रशंसा की. उन्होंने कहा कि विभाग देश भर में उपभोक्ता मामलों की नियमित निगरानी के लिए केंद्रित प्रयास कर रहा है. इस अभियान में भारत के विभिन्न भागों में एक दिवसीय क्षेत्रीय कार्यशालाओं और राज्य-विशिष्ट बैठकों का आयोजन शामिल है. ये विचार-विमर्श लंबित उपभोक्ता मामलों के मुद्दे पर चर्चा करने और तेज और अधिक प्रभावी निवारण सुनिश्चित करने के लिए व्यावहारिक समाधानों की पहचान करने के लिए महत्वपूर्ण मंच के रूप में काम करती है. 

प्रौद्योगिकी का लाभ उठाने पर जोर 

राष्ट्रीय उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग (एनसीडीआरसी) के अध्यक्ष न्यायमूर्ति अमरेश्वर प्रताप शाही ने तेजी से बदलते परिवेश की मांगों को पूरा करने के लिए डिजिटल बुनियादी ढांचे के निर्माण और प्रौद्योगिकी का लाभ उठाने पर जोर दिया. उन्होंने आयोग के आदेशों को प्रभावी रूप से लागू करना सुनिश्चित करने के लिए प्रशासनिक निकायों के साथ सक्रिय रूप से जुड़ने का भी आह्नान किया और विशेषज्ञ की राय की आवश्यकता वाले मामलों जैसे कि चिकित्सा संबंधी लापरवाही या ऑटोमोबाइल विवाद में समय पर समन्वय की सलाह दी ताकि जांच के कारण से न्याय में देरी न हो और उपभोक्ताओं के मामलों का समय पर निवारण सुनिश्चित हो सके.

प्रभात खबर डिजिटल प्रीमियम स्टोरी

लेखक के बारे में

Digital Media Journalist having more than 2 years of experience in life & Style beat with a good eye for writing across various domains, such as tech and auto beat.

Read More

संबंधित खबरें >

यह भी पढ़ें >