गुमराह कर रही सरकार… LPG गैस संकट पर कांग्रेस ने लगाया आरोप, प्रियंका गांधी बोलीं- जनता कब तक सहेगी?

Parliament Session LPG Shortage: देशभर में एलपीजी के दाम बढ़ने के बाद कांग्रेस ने सरकार को घेरना शुरू किया है. कांग्रेस ने बुधवार को संसद भवन परिसर में विरोध प्रदर्शन किया. इस दौरान सांसदों ने सरकार पर कई तरह के आरोप लगाए.

Parliament Session LPG Shortage: ईरान युद्ध की वजह से देश में एलपीजी गैस की कथित कमी को लेकर कांग्रेस ने केंद्र सरकार पर हमला बोला है. बुधवार को बजट सेशन के दूसरे सत्र के तीसरे दिन कांग्रेस सांसदों ने देशभर में व्यावसायिक एलपीजी सिलेंडर की कमी को लेकर संसद परिसर में विरोध प्रदर्शन किया. इस प्रदर्शन में कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी वाड्रा भी शामिल हुईं. विपक्षी सांसदों ने प्रदर्शन के दौरान ‘पीएम समझौता कर चुके हैं’ लिखे बैनर भी उठाए.

प्रदर्शन के दौरान सांसद के. सुरेश ने आरोप लगाया कि सरकार देश में वास्तविक स्थिति को उजागर नहीं कर रही है. कांग्रेस सांसद के.सी. वेणुगोपाल ने कहा कि एलपीजी गैस की कमी पर सरकार देश की जनता से झूठ बोल रही है. वहीं, कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी ने भी गैस की आपूर्ति में आ रही बाधाओं को लेकर संसद में चर्चा की मांग की. उन्होंने कहा कि महंगाई, बेरोजगारी और हाल ही में सिलेंडर की कीमतों में हुई बढ़ोतरी का बोझ जनता ज्यादा समय तक सहन नहीं कर सकती.

सुरेश ने कहा कि सरकार लगातार इस संकट को कम करके दिखा रही है. उन्होंने कहा कि सरकार कह रही है कि ‘चिंता की कोई बात नहीं है’, जबकि गैस की कमी के कारण कई होटल और व्यवसाय बंद हो चुके हैं. इस विरोधाभास को उजागर करते हुए कांग्रेस सांसद ने सरकार पर स्थिति की गंभीरता को लेकर जनता को गुमराह करने का आरोप लगाया. केसी वेणुगोपाल ने कहा कि गैस एजेंसियों को निर्देश दिया गया है कि वे व्यावसायिक उपयोग के लिए एलपीजी सिलेंडर की आपूर्ति न करें. स्थिति दिन-ब-दिन खराब होती जा रही है. सरकार भारत की जनता से पूरी तरह झूठ बोल रही है.’

प्रियंका बोलीं- कीमत बढ़ रही, बेरोजगारी बढ़ रही, चर्चा होनी चाहिए

प्रियंका गांधी ने कहा कि संसद में इस मुद्दे पर बहस होने से जनता से जुड़े महत्वपूर्ण सवाल उठाए जा सकते थे. उन्होंने केंद्र सरकार की नीतियों और योजनाओं को इस संकट के लिए जिम्मेदार ठहराया. उन्होंने कहा, ‘जनता आखिर कब तक सहन करेगी? कीमतें लगातार बढ़ रही हैं, बेरोजगारी बढ़ रही है, और एलपीजी की स्थिति भी देखिए. यह सब उनकी नीतियों और योजनाओं की वजह से हो रहा है. अगर संसद में इस पर चर्चा होती तो अच्छा होता, कम से कम जनता से जुड़े महत्वपूर्ण मुद्दे उठाए जा सकते थे.’

जिम्मेदारियों से भाग रही सरकार- कांग्रेस सांसद

प्रदर्शन से पहले कांग्रेस सांसद सुखदेव भगत ने केंद्र सरकार पर अपनी जिम्मेदारियों से भागने का आरोप लगाया. उन्होंने कहा, ‘प्रधानमंत्री मोदी ने 2022 में कहा था कि हम आयात कम करेंगे, लेकिन इसके बजाय हम दूसरे देशों पर निर्भर हो रहे हैं. संसद में इस पर विस्तृत चर्चा होनी चाहिए कि आगे तुरंत क्या कदम उठाए जाएंगे. युद्ध का असर दिखना शुरू हो गया है. यह सरकार अपनी जिम्मेदारियों से भाग रही है.’

सरकार की तैयारी नहीं थी- जेबी मैथर

वहीं कांग्रेस सांसद जेबी मैथर ने एलपीजी संकट से निपटने को लेकर सरकार की तैयारी पर सवाल उठाए. उन्होंने कहा, ‘हम लगातार मांग करते रहे हैं कि हवाई किराए पर कुछ नियंत्रण होना चाहिए. लेकिन अधिकांश सेक्टरों में, खासकर खाड़ी देशों के रूट पर, बिल्कुल भी नियंत्रण नहीं है और यह पूरी तरह एयरलाइंस के विवेक पर छोड़ दिया जाता है. सरकार अक्सर यह कहकर जिम्मेदारी से बच जाती है कि यह मांग और आपूर्ति के सिद्धांत पर निर्भर है.’

उन्होंने आगे कहा, ‘क्या सरकार ने यह नहीं सोचा कि देश में एलपीजी संकट हो सकता है? क्या उनके मन में यह बात नहीं आई कि होटल उद्योग प्रभावित होगा? लेकिन भाजपा और सत्तारूढ़ व्यवस्था की प्राथमिकता केवल चुनावी राजनीति है.’

सरकार ने कितना बढ़ाया दाम?

पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष के बीच केंद्र सरकार ने हाल ही में रसोई गैस सिलेंडर की कीमत में 60 रुपये की बढ़ोतरी की घोषणा की थी. इस बढ़ोतरी के बाद बिना सब्सिडी वाले एलपीजी सिलेंडर की कीमत दिल्ली में 913 रुपये, कोलकाता में 939 रुपये, मुंबई में 912 रुपये और चेन्नई में 928 रुपये हो गई है. राज्यों में कीमतों का अंतर राज्य सरकारों द्वारा लगाए जाने वाले करों के कारण होता है.

इंडिया गठबंधन नेताओं ने संसद में चर्चा की मांग की

इंडिया गठबंधन के नेताओं ने भी पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष के बीच एलपीजी की कथित कमी के मुद्दे पर संसद में चर्चा की मांग की है. इसी कड़ी में भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (सीपीआई) के सांसद पी. सांडोश कुमार ने बुधवार को राज्यसभा में कार्यस्थगन प्रस्ताव का नोटिस दिया, ताकि देशभर में एलपीजी सिलेंडरों की कथित कमी पर चर्चा की जा सके. नोटिस देते हुए उन्होंने कहा कि एलपीजी सिलेंडर के लिए प्रतीक्षा अवधि बढ़ गई है और कीमतों में भी बढ़ोतरी हुई है, जिससे नागरिकों को ‘भारी कठिनाइयों’ का सामना करना पड़ रहा है.

उन्होंने कहा कि संसद के उच्च सदन को यह बताया जाना चाहिए कि एलपीजी भंडार की वास्तविक स्थिति क्या है, निर्बाध आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए क्या कदम उठाए गए हैं और उपभोक्ताओं को कमी तथा कीमतों में अचानक बढ़ोतरी से बचाने के लिए क्या आपात उपाय किए जा रहे हैं.

वहीं, माकपा के राज्यसभा सांसद वी. शिवदासन ने कहा कि उनकी पार्टी इस मुद्दे को संसद में उठाएगी. उन्होंने कहा, ‘एलपीजी की कमी के कारण कई होटल बंद हो गए हैं और कई परिवारों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है. केंद्र सरकार इस मुद्दे को सही तरीके से संभालने के लिए तैयार नहीं है. हम इस मुद्दे को संसद में उठाएंगे और हमारी पार्टी संसद के बाहर भी इस कीमत वृद्धि के खिलाफ देशव्यापी अभियान चलाएगी.’

ऊर्जा संकट पर सरकार ने आवश्यक वस्तु अधिनियम लागू किया

पश्चिम एशिया में ईरान युद्ध के कारण वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति बाधित होने से एलपीजी की कमी की स्थिति पैदा हुई है. इसके जवाब में केंद्र सरकार ने आवश्यक वस्तु अधिनियम लागू करते हुए घरेलू एलपीजी आपूर्ति को प्राथमिकता दी है. इसके तहत घरों, अस्पतालों और जरूरी सेवाओं के लिए अधिक आवंटन किया गया है, जबकि कई क्षेत्रों में व्यावसायिक वितरण को सीमित कर दिया गया है.

सरकार ने रिफाइनरियों को निर्देश दिया है कि वे घरेलू उपयोग के लिए एलपीजी उत्पादन को अधिकतम करें. अब घरेलू पाइप्ड नेचुरल गैस, परिवहन के लिए सीएनजी और जरूरी पाइपलाइन संचालन के लिए 100 प्रतिशत तक प्राथमिकता आपूर्ति तय की गई है.

इसके अलावा उर्वरक संयंत्रों को उनकी जरूरत का 70 प्रतिशत आवंटन दिया जा रहा है, जबकि अन्य औद्योगिक उपभोक्ताओं और चाय उद्योग को पिछले छह महीने के औसत का 80 प्रतिशत आपूर्ति दी जा रही है. सरकार ने घरेलू एलपीजी सिलेंडर की बुकिंग के बीच 25 दिनों की नई अंतराल अवधि भी अनिवार्य कर दी है.

पेट्रोलियम मंत्रालय ने कहा कि इस अधिनियम को लागू करने के बाद प्राकृतिक गैस के वितरण के लिए प्राथमिकता सूची तय कर दी गई है, ताकि मौजूदा आपूर्ति बाधाओं को संभाला जा सके. नई व्यवस्था के तहत घरों के लिए पाइप्ड प्राकृतिक गैस और वाहनों के लिए सीएनजी की 100 प्रतिशत सुनिश्चित आपूर्ति की गई है. अन्य क्षेत्रों के लिए पिछले छह महीने की औसत खपत के आधार पर सीमित आपूर्ति तय की गई है.

भारत आमतौर पर अपनी लगभग 30 प्रतिशत प्राकृतिक गैस होर्मुज जलडमरूमध्य के जरिए आयात करता है. लेकिन पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष के कारण इस मार्ग से आपूर्ति में आ रही दिक्कतों ने लॉजिस्टिक चुनौतियां पैदा कर दी हैं.

मनीष तिवारी बोले- तेल का दाम घटा फिर सरचार्ज क्यों?

कांग्रेस सांसद मनीष तिवारी ने कहा कि आवश्यक वस्तु अधिनियम लागू करना जरूरत से ज्यादा कदम है और इस संकट पर संसद में विस्तृत चर्चा होनी चाहिए. उन्होंने कहा, ‘दिलचस्प बात यह है कि कच्चे तेल की कीमत 120 डॉलर प्रति बैरल तक जाने के बाद कल घटकर 90 डॉलर प्रति बैरल पर आ गई. इसलिए कच्चे तेल की कीमतों में कोई बड़ी बढ़ोतरी नहीं हुई है. आज जो कच्चा तेल या पेट्रोलियम उत्पाद आ रहे हैं, उनका अनुबंध कम से कम 45 से 60 दिन पहले हुआ होगा, जब कीमतें काफी कम थीं. ऐसे में एयरलाइंस द्वारा सरचार्ज लगाना और सरकार द्वारा ईएसएमए लागू कर राशनिंग करना कुछ ज्यादा ही कदम है, यह घबराहट में लिया गया फैसला लगता है. इसलिए हम कह रहे हैं कि इस पर संसद में विस्तृत चर्चा होनी चाहिए.’

तमिलनाडु के सांसद ने कहा बंद हो रहीं दुकानें

कांग्रेस सांसद ज्योतिमणि ने विशेष रूप से तमिलनाडु के लोगों की समस्याओं का मुद्दा उठाते हुए कहा कि जिन लोगों ने घरेलू गैस बुक की है, उन्हें आपूर्ति नहीं मिल रही है. लोग शिकायत कर रहे हैं. तमिलनाडु में लगभग सभी होटल, छोटे दुकान और चाय की दुकानें बंद हो रही हैं. प्रधानमंत्री आज तमिलनाडु आ रहे हैं, लेकिन केंद्र सरकार के लिए चुनाव ही प्राथमिकता है. जबकि हमें पहले से पता था कि पश्चिम एशिया में युद्ध चल रहा है, फिर भी कोई योजना नहीं बनाई गई. खामेनेई की मौत पर भी कई दिनों तक संवेदना नहीं जताई गई. अब ईरान केवल चीनी जहाजों को ही अनुमति दे रहा है. प्रधानमंत्री मोदी के पास इस स्थिति से निपटने की कोई योजना नहीं है.’

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जयशंकर बोले- भारतीय उपभोक्ताओं के हित हमेशा सर्वोपरि

इस मुद्दे पर, विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने मंगलवार को संसद के दोनों सदनों को संबोधित करते हुए कहा कि दुनिया में शांति और सुरक्षा को प्रभावित करने वाली कोई भी घटना चिंताजनक होती है, लेकिन यह चल रहा संघर्ष भारत के लिए विशेष चिंता का विषय है.

उन्होंने कहा, ‘पश्चिम एशिया हमारा पड़ोसी क्षेत्र है और स्वाभाविक रूप से हमारी यह स्पष्ट रुचि है कि यह क्षेत्र स्थिर और शांतिपूर्ण बना रहे. खाड़ी देशों में लगभग एक करोड़ भारतीय नागरिक रहते और काम करते हैं. ईरान में भी पढ़ाई और रोजगार के लिए कुछ हजार भारतीय मौजूद हैं. यह क्षेत्र हमारी ऊर्जा सुरक्षा के लिए बेहद महत्वपूर्ण है और यहां तेल और गैस के कई प्रमुख आपूर्तिकर्ता देश हैं.’

ऊर्जा सुरक्षा का जिक्र करते हुए जयशंकर ने कहा कि भारतीय उपभोक्ताओं के हित हमेशा सर्वोपरि रहे हैं और आगे भी रहेंगे. उन्होंने कहा, ‘जहां जरूरत पड़ी है, वहां भारतीय कूटनीति ने इस अस्थिर स्थिति में हमारी ऊर्जा कंपनियों के प्रयासों का समर्थन किया है.’

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उन्होंने यह भी कहा कि भारत शांति का समर्थक है और संवाद व कूटनीति के जरिए समाधान की वापसी का आग्रह करता है. भारत तनाव कम करने, संयम बरतने और नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की वकालत करता है. जयशंकर ने कहा कि क्षेत्र में रह रहे भारतीय समुदाय की सुरक्षा और भलाई सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है.

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By Anant narayan shukla

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उत्तर प्रदेश के भदोही जिले के रहने वाले अनन्त ने इलाहाबाद विश्वविद्यालय से मास कम्युनिकेशन में पोस्ट ग्रेजुएशन की पढ़ाई पूरी की है. उन्होंने 2024 में अपने पत्रकारिता करियर की शुरुआत प्रभात खबर में खेल पत्रकार के रूप में की थी, जहां उन्होंने करीब एक वर्ष तक क्रिकेट और अन्य खेलों से जुड़ी खबरों को कवर किया. बाद में अपनी रुचि और विशेषज्ञता के चलते उन्होंने अंतरराष्ट्रीय डेस्क का रुख किया और आज वैश्विक राजनीति व भू-राजनीति के प्रमुख विषयों पर लेखन कर रहे हैं.

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