CJP का जंतर-मंतर पर प्लेट-चम्मच के साथ प्रदर्शन, जानिए अभिजीत दिपके की अपील का राज

Cockroach Janata Party : देश की शिक्षा व्यवस्था में व्याप्त खामियों को दूर करने के लिए शिक्षा मंत्री से लगातार इस्तीफे की मांग कर रहा कॉकरोच जनता पार्टी शनिवार को एक बार फिर दिल्ली के जंतर-मंतर पर जुट रहा है.

Cockroach Janata Party : कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) शनिवार को दिल्ली के जंतर-मंतर पर अपना दूसरा बड़ा प्रदर्शन कर रही है. यह प्रदर्शन दोपहर 1 बजे से जंतर-मंतर पर अभिजीत दिपके के नेृत्व में होगा. इस प्रदर्शन में शामिल होन के लिए समर्थकों को प्लेट और चम्मच लेकर आने के लिए कहा गया है.

कोविड के दौरान पीएम मोदी की अपील की तर्ज पर सीजेपी कर रहा प्रदर्शन

2020 में जब पूरा विश्व कोविड महामारी की चपेट में था उस वक्त पीएम नरेंद्र मोदी कोविड फ्रंटलाइन वर्कर्स के साथ एकजुटता में थाली पीटने की बात कही थी, उसी तर्ज पर अब सीजेपी शिक्षा मंत्री से इस्तीफे की मांग कर रहा है सीजेपी के कार्यकर्ता प्लेट को चम्मच से पीटेंगे.

शुक्रवार को अभिजीप दिपके ने जारी की अपील

CJP के फाउंडर अभिजीत दिपके ने शुक्रवार को एक वीडियो मैसेज जारी किया, जिसमें उन्होंने सिर्फ इतना कहा कि शनिवार को जंतर-मंतर पर होने वाले प्रोटेस्ट में शामिल होने वाले सभी कॉकरोच अपने साथ एक थाली और एक चम्मच लेकर चलें. बाकी की कहानी आप जानते हैं. जंतर-मंतर पर दोपहर 1 बजे शुरू होने वाले प्रोटेस्ट में दिल्ली और पड़ोसी राज्यों के स्टूडेंट्स के आने की उम्मीद है. इससे पहले सीजेपी ने जंतर-मंतर पर जो प्रदर्शन किया था, उसमें करीब 10 हजार लोगों के जुटने का दावा किया गया था.

प्रदर्शन को देखते हुए सुरक्षा व्यवस्था कड़ी

कॉकरोच जनता पार्टी के प्रदर्शन को देखते हुए जंतर-मंतर पर सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई है. अधिकारियों के मुताबिक, कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए पुलिस ने कड़ी निगरानी के साथ भीड़ नियंत्रण के व्यापक इंतजाम किए हैं. यह विरोध प्रदर्शन भारी पुलिस बंदोबस्त के बीच सीजेपी के संस्थापक अभिजीत दिपके के नेतृत्व में दोपहर एक बजे शुरू होगा. अधिकारियों के अनुसार, प्रशासन ने इस प्रदर्शन की अनुमति दे दी है. विरोध-प्रदर्शन स्थल और उसके आसपास के क्षेत्रों में भीड़ की गतिविधियों पर वास्तविक समय में नजर रखने के लिए सीसीटीवी कैमरे लगाए गए हैं. उन्होंने बताया कि पूरी प्रक्रिया में पारदर्शिता सुनिश्चित करने और घटनाक्रम का दस्तावेजीकरण करने के लिए मौके पर तैनात पुलिसकर्मी लगभग 270 बॉडी-वॉर्न (वर्दी पर लगे) कैमरों का इस्तेमाल करेंगे.

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Published by: Rajneesh Anand

रजनीश आनंद प्रभात खबर में सीनियर चीफ कंटेंट राइटर के पद पर कार्यरत है.पत्रकारिता के क्षेत्र में 25 वर्षों का अनुभव रखती हैं. झारखंड की राजधानी रांची में रहने वाली रजनीश ने इलाहाबाद विश्वविद्यालय से स्नातक की शिक्षा प्राप्त की और वर्ष 2000-01 में पत्रकारिता की शुरुआत की. इन्होंने पहली नौकरी झारखंड जागरण दैनिक अखबार में की. उसके बाद इन्होंने प्रभात खबर, हिंदुस्तान, रांची एक्सप्रेस तथा दैनिक जागरण सहित कई प्रमुख समाचार संस्थानों के लिए रिपोर्टिंग और लेखन किया. प्रिंट मीडिया के दैनिक, साप्ताहिक, पाक्षिक और सांध्य संस्करणों में काम करने के बाद वे वर्ष 2012 से डिजिटल पत्रकारिता में सक्रिय हैं. रजनीश आनंद की पहचान तथ्यपरक रिपोर्टिंग, गहन शोध और विश्लेषणात्मक लेखन के लिए है. उनकी रुचि राजनीति, सामाजिक सरोकारों, ग्रामीण विकास, महिला मुद्दों, इतिहास, खेल, जनजातीय समाज और सार्वजनिक नीतियों से जुड़े विषयों में रही है। उन्होंने हमेशा उन मुद्दों को प्राथमिकता दी है जो समाज के हाशिये पर खड़े लोगों के जीवन को प्रभावित करते हैं, लेकिन मुख्यधारा की चर्चा में अपेक्षाकृत कम स्थान पाते हैं. वे कई प्रतिष्ठित पत्रकारिता फेलोशिप से जुड़ी रही हैं. इन्क्लूसिव मीडिया–यूएनडीपी फेलोशिप के तहत उन्होंने झारखंड के पश्चिमी सिंहभूम (चाईबासा) जिले में माहवारी स्वच्छता और किशोरियों एवं महिलाओं के स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियों पर विस्तृत अध्ययन और रिपोर्टिंग की. झारखंड सरकार मीडिया फेलोशिप के दौरान उन्होंने महिला सशक्तिकरण, सरकारी योजनाओं के प्रभाव और सामाजिक बदलाव के विभिन्न आयामों पर कार्य किया. इसके अतिरिक्त सेव द चिल्ड्रन फेलोशिप के तहत उन्होंने बच्चों के अधिकार, शिक्षा, सुरक्षा और बाल कल्याण से जुड़े मुद्दों पर गहन रिपोर्टिंग की. आदिवासी समाज, विशेषकर मुंडा जनजाति के इतिहास, संस्कृति और समकालीन चुनौतियों पर उनका काम उल्लेखनीय माना जाता है. उन्होंने भूमि, पहचान, परंपरा, सामाजिक बदलाव और आदिवासी समुदायों के अधिकारों से जुड़े विषयों पर व्यापक फील्ड रिपोर्टिंग की है. हाल के वर्षों में उन्होंने झारखंड में ऊर्जा संक्रमण (Energy Transition) और जस्ट ट्रांजिशन की अवधारणा पर भी काम किया है. विशेष रूप से कोयला आधारित अर्थव्यवस्था वाले क्षेत्रों में भविष्य की चुनौतियों, रोजगार, आजीविका और सामाजिक प्रभावों पर उनकी रिपोर्टिंग ने महत्वपूर्ण प्रश्न उठाए हैं. उनका मानना है कि ऊर्जा परिवर्तन की प्रक्रिया तभी सफल होगी जब उसमें प्रभावित समुदायों की भागीदारी और हितों को केंद्र में रखा जाए.पत्रकारिता उनके लिए केवल एक पेशा नहीं, बल्कि समाज के प्रति जिम्मेदारी निभाने का माध्यम है. जमीनी रिपोर्टिंग, तथ्यों की पड़ताल और जनसरोकारों को केंद्र में रखकर लिखना उनकी कार्यशैली की विशेषता रही है. इसके अतिरिक्त रजनीश आनंद कहानियां और कविताएं लिखने का शौक भी रखती है.

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