Dibrugarh Train Accident: लोको पायलट ने हादसे से पहले सुनी धमाके की आवाज, प्रत्यक्षदर्शियों ने भी किया दावा

Dibrugarh Train Accident: पूर्वोत्तर रे���वे के गोंडा-गोरखपुर रेल खंड पर मोतीगंज और झिलाही रेलवे स्टेशनों के बीच गुरुवार की दोपहर चंडीगढ़-डिब्रूगढ़ साप्ताहिक एक्सप्रेस ट्रेन के 8 से 10 डिब्बे पटरी से उतर गए. जिसमें 2 लोगों की मौत हो गई. जबकि 31 घायल हो गए.

Dibrugarh Train Accident: चंडीगढ़ से डिब्रूगढ़ जा रही डिब्रूगढ़ एक्सप्रेस ट्रेन की 8 से 1 बोगियां पलट गईं. जिसमें सवार 2 यात्रियों की मौत हो गई. हादसे में 31 लोग घायल भी हुए हैं. हादसे कैसे हुई, इसकी हाई लेवल जांच कराई जाएगी. रेलवे मंत्रालय की ओर से मुआवजे की घोषणा भी कर दी गई है.

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लोको पायलट ने धमाके की सुनी थी आवाज

लोको पायलट ने हादसे को लेकर बड़ा दावा किया है. लोको पायलट त्रिभुवन ने बताया कि हादसे से पहले उसने धमाके की आवाज सुनी थी. रेल में सफर कर रहे कुछ यात्रियों ने भी यही दावा किया है. डिब्रूगढ़-चंडीगढ़ एक्सप्रेस में यात्रा कर रहे एक यात्री का दावा है, मुझे हाजीपुर जाना था. घटना से पहले हल्का विस्फोट हुआ और उसके बाद एक जोरदार झटका महसूस हुआ. फिर कोच पटरी से उतर गए.

हर तरफ बदहवासी, अपनों को ढूंढ़ते नजर आए लोग

पटरियों से कुछ दूरी पर लोगों की अटैचियां और सामान बिखरे पड़े थे. बोगियों से बचकर बाहर निकले कुछ लोग बदहवास पटरियों के पास बैठे दिखे, तो कई लोग अपनों को ढूंढ़ते नजर आए. बच गए लोगों को बस एक ही फिक्र थी कि उसके अपने सुरक्षित हैं या नहीं. ट्रेन के कुछ यात्री दोपहर के भोजन के बाद आराम कर रहे थे, वहीं अन्य लोग आने वाले स्टेशन पर उतरने की तैयारी में थे. इसी दौरान मोतीगंज इलाके में यात्रियों को जोरदार झटका लगा और डिब्बे पटरी से उतर गए.

यात्रियों ने क्या बताया?

चंडीगढ़ से सीवान जा रहे मणि तिवारी ने बताया, ‘हम लोग चंडीगढ़ से सीवान जा रहे थे. बोगी नंबर बी-1 में मेरी 10 और 16 नंबर सीट थी. यहां पर ट्रेन एकदम से पटरी से उतर गई, जिसकी वजह से ट्रेन पलट गई और अनेक लोगों को चोटें लगी हैं. ट्रेन के बी2 कोच में यात्रा कर रहे 35 वर्षीय मनीष तिवारी ने बताया, ‘मैं खिड़की के पास अपनी सीट पर बैठा था, तभी मैंने तेज आवाज सुनी और झटका महसूस किया, जिससे मैं गिर पड़ा.

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लेखक के बारे में

By Arbindkumar mishra

अरबिंद कुमार मिश्रा मुख्यधारा की पत्रकारिता में 15 वर्षों से अधिक का अनुभव रखने वाले एक वरिष्ठ पत्रकार और लेखक हैं. वर्तमान में, वह प्रभात खबर डॉट कॉम (Prabhat Khabar) में सीनियर कंटेंट राइटर के रूप में अपनी सेवाएं दे रहे हैं. अरबिंद नेशनल, इंटरनेशनल और स्पोर्ट्स कैटेगरी में अपनी लेखनी के लिए जाने जाते हैं. गहरी रिसर्च पर आधारित स्पेशल स्टोरीज, रिपोर्टिंग और जटिल मुद्दों पर आसान भाषा में 'एक्सप्लेनर' लिखना उनकी मुख्य यूएसपी (USP) है.

झारखंड की समृद्ध संस्कृति और लोक परंपराओं में उनकी गहरी रुचि है. अपनी उत्कृष्ट और सरोकार से जुड़ी रिपोर्टिंग के लिए उन्हें संस्थान स्तर पर कई बार सम्मानित और पुरस्कृत भी किया जा चुका है.

करियर का सफरनामा

अरबिंद ने अपने पत्रकारिता करियर की शुरुआत देश की प्रतिष्ठित बहुभाषी न्यूज एजेंसी 'हिंदुस्थान समाचार' से बतौर रिपोर्टर की थी. इसके बाद उन्होंने प्रसार भारती के अंग दूरदर्शन और आकाशवाणी के साथ भी काम किया, जहां उन्होंने एंकरिंग, वॉइस-ओवर और रिपोर्टिंग के गुर सीखे. साल 2011 में वह 'प्रभात खबर डॉट कॉम' से जुड़े और तब से लगातार डिजिटल पत्रकारिता के क्षेत्र में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं.

प्रमुख उपलब्धियां और ग्राउंड रिपोर्टिंग

खेल पत्रकारिता और जमीनी रिपोर्टिंग में अरबिंद का योगदान उल्लेखनीय रहा है. उनकी कुछ सबसे बड़ी उपलब्धियों में शामिल हैं:

34वें राष्ट्रीय खेल: झारखंड में आयोजित ऐतिहासिक 34वें नेशनल गेम्स की बेहतरीन और व्यापक ग्राउंड रिपोर्टिंग.

अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट: रांची के जेएससीए (JSCA) स्टेडियम में आयोजित कई इंटरनेशनल क्रिकेट मैचों को करीब से कवर किया.

पुरुष हॉकी वर्ल्ड कप (2018): भुवनेश्वर में आयोजित वर्ल्ड कप के फाइनल मुकाबले की शानदार स्पोर्ट्स रिपोर्टिंग.

पंचायतनामा: प्रभात खबर के इस खास विंग के लिए ग्रामीण इलाकों का दौरा कर कई प्रेरक 'सक्सेस स्टोरीज' लिखीं.

शैक्षणिक योग्यता (Education & Credentials)

UGC NET: साल 2019 में यूजीसी नेट (UGC NET) की परीक्षा उत्तीर्ण की.

बैचलर ऑफ जर्नलिज्म (BJMC): रांची विश्वविद्यालय से साल 2011 में पत्रकारिता में स्नातक की डिग्री हासिल की.

एम.ए. (नागपुरी भाषा): रांची विश्वविद्यालय के 'जनजातीय एवं क्षेत्रीय भाषा विभाग' से साल 2009 में नागपुरी भाषा में स्नातकोत्तर (MA) की डिग्री हासिल की.

लेखन शैली और विशेषज्ञता: एक्सप्लेनर, रिसर्च बेस्ड स्टोरीज, स्पोर्ट्स जर्नलिज्म, इंटरनेशनल अफेयर्स और झारखंड की लोक-संस्कृति.

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