ED को गिरफ्तारी के कारणों की लिखित जानकारी देने के निर्देश के खिलाफ केंद्र सरकार दायर करेगी पुनर्विचार याचिका

भारत के सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने दिल्ली हाईकोर्ट में न्यूजक्लिक के प्रधान संपादक प्रबीर पुरकायस्थ और एचआर हेड अमित चक्रवर्ती द्वारा दायर की गई याचिकाओं पर सुनवाई के दौरान यह बात कही है.

केंद्र सरकार सु्प्रीम कोर्ट के एक फैसले के खिलाफ जल्दी ही पुनर्विचार याचिका दायर करेगी. यह पुनर्विचार याचिका सुप्रीम कोर्ट के उस फैसले के खिलाफ दायर की जा रही है जिसमें शीर्ष कोर्ट ने पंकज बंसल बनाम भारत सरकार मामले में कहा था कि ईडी को गिरफ्तारी के आधार को लिखित रूप में सूचित करना होगा और केवल समन पर असहयोग करना गिरफ्तारी का आधार नहीं है. ज्ञात हो कि भारत के सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने दिल्ली हाईकोर्ट में न्यूजक्लिक के प्रधान संपादक प्रबीर पुरकायस्थ और एचआर हेड अमित चक्रवर्ती द्वारा दायर की गई याचिकाओं पर सुनवाई के दौरान यह बात कही है. लाइव लाॅ ने इससे संबंधित जानकारी सोशल मीडिया में शेयर की है.


ईडी को निष्पक्ष होना चाहिए

गौरतलब है कि तीन अक्टूबर को सुप्रीम कोर्ट ने हाईकोर्ट के फैसले को चुनौती देने वाली बंसल परिवार की याचिका पर अपना फैसला सुनाया था और यह स्पष्ट कहा था कि ईडी जो कि एक जांच एजेंसी है उससे किसी भी प्रकार के बदले की कार्रवाई की उम्मीद नहीं जा सकती है. कोर्ट ने यह भी कहा था कि एजेंसी से निष्पक्ष और ईमानदार व्यवहार की उम्मीद की जाती है. सुप्रीम कोर्ट ने मनी लॉन्ड्रिंग के मामले में बसंत बंसल और पंकज बंसल को अविलंब रिहा करने का आदेश भी दिया था.

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कोर्ट ने फैसला सुरक्षित रखा

दिल्ली हाई कोर्ट ने आज सोमवार को समाचार पोर्टल ‘न्यूजक्लिक’ के संस्थापक प्रबीर पुरकायस्थ और एचआर प्रमुख अमित चक्रवर्ती की उस याचिका पर फैसला सुरक्षित रख लिया, जिसमें दोनों ने अपनी गिरफ्तारी को चुनौती दी थी.

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By Rajneesh anand

रजनीश आनंद प्रभात खबर में सीनियर चीफ कंटेंट राइटर के पद पर कार्यरत हैं और पत्रकारिता के क्षेत्र में 25 वर्षों से अधिक का अनुभव रखती हैं.फिलहाल वे प्रभात खबर के ओरिजिनल, नेशनल, इंटरनेशनल और खेल कैटेगरी के लिए राइटिंग का काम करती हैं. उनकी पहचान फैक्ट बेस्ट रिपोर्टिंग, रिसर्च बेस्ड स्टोरी और एक्सप्लेनर लेखन के लिए है.

राजनीति, सामाजिक सरोकार, ग्रामीण विकास, महिला मुद्दों, इतिहास, खेल, जनजातीय समाज और सार्वजनिक नीतियों से जुड़े विषयों पर उनकी विशेष रुचि रही है. वैसे मुद्दे जो समाज के हाशिये पर मौजूद समुदायों और आम लोगों के जीवन को प्रभावित करते हैं, लेकिन मुख्यधारा की बहस में अपेक्षाकृत कम जगह पाते हैं, ऐसे विषयों पर भी लेखन में रुचि रखती हैं.

रजनीश आनंद कई प्रतिष्ठित पत्रकारिता फेलोशिप से जुड़ी रही हैं. इन्क्लूसिव मीडिया–यूएनडीपी फेलोशिप के तहत उन्होंने झारखंड के पश्चिमी सिंहभूम (चाईबासा) जिले में माहवारी स्वच्छता और किशोरियों एवं महिलाओं के स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियों पर अध्ययन एवं रिपोर्टिंग की. झारखंड सरकार मीडिया फेलोशिप के दौरान महिला सशक्तिकरण, सरकारी योजनाओं के प्रभाव और सामाजिक बदलाव के विभिन्न आयामों पर काम किया. इसके अलावा सेव द चिल्ड्रन फेलोशिप के तहत बच्चों के अधिकार, शिक्षा, सुरक्षा और बाल कल्याण से जुड़े मुद्दों पर गहन रिपोर्टिंग की है.

आदिवासी समाज, विशेषकर मुंडा जनजाति के इतिहास, संस्कृति और समकालीन चुनौतियों पर उनका काम उल्लेखनीय माना जाता है. उन्होंने भूमि, पहचान, परंपरा, सामाजिक बदलाव और आदिवासी समुदायों के अधिकारों से जुड़े विषयों पर व्यापक फील्ड रिपोर्टिंग की है.हाल के वर्षों में उन्होंने झारखंड में ऊर्जा संक्रमण (Energy Transition) और जस्ट ट्रांजिशन की अवधारणा पर भी काम किया है. विशेष रूप से कोयला आधारित अर्थव्यवस्था वाले क्षेत्रों में रोजगार, आजीविका और सामाजिक प्रभावों से जुड़ी चुनौतियों पर उनकी रिपोर्टिंग ने महत्वपूर्ण सवाल उठाए हैं.

रजनीश आनंद झारखंड की राजधानी रांची में रहती हैं और इलाहाबाद विश्वविद्यालय से स्नातक हैं. उन्होंने वर्ष 2000 में पत्रकारिता की शुरुआत झारखंड जागरण दैनिक से की. इसके बाद प्रभात खबर, हिंदुस्तान, रांची एक्सप्रेस और दैनिक जागरण सहित कई प्रमुख समाचार संस्थानों के लिए रिपोर्टिंग और स्वतंत्र लेखन किया. प्रिंट मीडिया के दैनिक, साप्ताहिक, पाक्षिक और सांध्य प्रकाशनों में काम करने के साथ-साथ वे वर्ष 2012 से डिजिटल पत्रकारिता में सक्रिय हैं.

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