BRO: लद्दाख के बर्फीले दर्रों से लेकर पूर्वोत्तर के घने जंगलों तक सबसे दुर्गम क्षेत्र में इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार करने का काम सीमा सड़क संगठन(बीआरओ) कर रहा है. सीमावर्ती क्षेत्रों में इंफ्रास्ट्रक्चर विकास से देश की रक्षा तैयारियों को मजबूत करने के साथ ही दूरस्थ सीमावर्ती क्षेत्र में रहने वाले लोगों के जीवन में भी बदलाव आ रहा है. पिछले एक दशक में सीमावर्ती क्षेत्रों में इंफ्रास्ट्रक्चर की विकास को गति मिली है.
वित्त वर्ष 2020-21 से 2024-25 के दौरान रक्षा मंत्रालय की ओर से बीआरओ को लगभग 23625 करोड़ आवंटित किए गए. इससे अग्रिम क्षेत्रों में लगभग 4595 किलोमीटर सड़कों के निर्माण हुआ और इससे उत्तरी सीमाओं पर कनेक्टिविटी बेहतर हुई है. पिछले दो साल वर्ष 2024 और 2025 में सीमा सड़क संगठन द्वारा 356 इंफ्रास्ट्रक्चर परियोजना पूरी की गयी.
राष्ट्रीय सुरक्षा और क्षेत्रीय विकास में बीआरओ के महत्वपूर्ण योगदान को देखते हुए केंद्रीय बजट 2024-25 में इसके आवंटन को 6500 करोड़ से बढ़ाकर बजट 2025-26 में 7146 करोड़ कर दिया गया. मौजूदा समय में बीआरओ 18 क्षेत्रीय परियोजनाओं का संचालन कर रहा है, जिनमें से 11 राज्यों और 3 केंद्र शासित प्रदेशों में स्ट्रेटेजिक इंफ्रास्ट्रक्चर के निर्माण किया जा रहा है. सीमावर्ती क्षेत्रों में बड़े पैमाने पर सड़कों, पुलों, सुरंगों और हवाई पट्टियों के साथ-साथ टेली-मेडिसिन केंद्रों के जरिये बीआरओ एक्ट ईस्ट और वाइब्रेंट विलेज प्रोग्राम जैसी पहलों के तहत राष्ट्रीय सुरक्षा और सामाजिक-आर्थिक विकास का सशक्त बनाने का काम कर रहा है.
भविष्य की योजना
बीआरओ के पर्सपेक्टिव प्लान के तहत सीमावर्ती क्षेत्रों में लगभग 27300 किलोमीटर लंबी 470 सड़कों के निर्माण की योजना है. इसी कड़ी में लगभग 717 किलोमीटर लंबी ट्रांस-कश्मीर कनेक्टिविटी परियोजना को एनएचडीएल (पेव्ड शोल्डर) मानकों के विकास के लिए मंजूरी दे दी गयी है. पुंछ से सोनमर्ग तक जाने वाला यह मार्ग रणनीतिक सड़क इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत करेगा. इस मार्ग पर साधना पास, पी-गली, जेड-गली और राजदान पास पर अत्याधुनिक सुरंग बनाने की योजना है. ताकि सड़क पूरे साल चालू रह सके. रक्षा मंत्रालय द्वारा वित्तपोषित यह परियोजना बीआरओ द्वारा चरणबद्ध तरीके से पूरी की जाएगी. हिमाचल प्रदेश, अरुणाचल प्रदेश, सिक्किम, लद्दाख जैसे बर्फीले क्षेत्र में बीआरओ ने कई अहम टनल, सड़क और पुल का निर्माण किया है.
हिमाचल प्रदेश के रोहतांग दर्रे के नीचे निर्मित 9.02 किमी लंबी अटल टनल 10000 फीट से अधिक की ऊंचाई पर स्थित दुनिया की सबसे लंबी राजमार्ग टनल है. यह टनल लेह-मनाली के बीच हर मौसम में निर्बाध संपर्क सुनिश्चित करने का काम करती है. अरुणाचल प्रदेश में 500 मीटर लंबी नेफू टनल बालीपारा-चार द्वार-तवांग मार्ग पर स्थित अत्यधिक कोहरे वाले नेफू दर्रे को बाईपास करती है. यह टनल न केवल सुरक्षित, तीव्र आवागमन सुनिश्चित करती है, बल्कि स्थानीय संपर्क और रणनीतिक सैन्य लॉजिस्टिक्स को भी बेहतर बनाती है. अरुणाचल प्रदेश (तवांग क्षेत्र) में 13000 फीट की ऊंचाई पर स्थित सेला टनल, अत्यधिक ऊंचाई वाले सेला दर्रे को बाईपास करती है. यह सुरंग न केवल नागरिकों के लिए बल्कि सैन्य आवाजाही के लिए भी तवांग तक निर्बाध पहुंच सुनिश्चित करती है.
