BJP: भाजपा के जमीनी स्तर पर काम करने की रणनीति से हारे केजरीवाल

भाजपा ने जमीनी स्तर पर काम करते हुए लोकसभा चुनाव के बाद से ही आम आदमी पार्टी के कोर वोटर को साधने के लिए अभियान चलाया. खासकर झुग्गी और गरीब बस्तियों में पार्टी ने एक विशेष अभियान चलाया और उन्हें यह भरोसा दिलाया कि उनकी समस्याओं को दूर किया जायेगा.

BJP: आखिरकार 27 साल बाद भाजपा को दिल्ली की सत्ता मिल गयी. वर्ष 2008 से वर्ष 2013 तक कांग्रेस लगातार 15 साल दिल्ली की सत्ता पर काबिज रही. फिर भ्रष्टाचार के खिलाफ आंदोलन से बनी आम आदमी पार्टी ने दिल्ली में जगह बनाने में कामयाब रही. वर्ष 2013 के चुनाव में भाजपा 32 सीट जीतकर भले सबसे बड़ी पार्टी बनने में कामयाब रही, लेकिन सत्ता पर काबिज नहीं हो सकी. कांग्रेस और आम आदमी पार्टी ने मिलकर सरकार बनायी. हालांकि यह सरकार अधिक दिनों तक नहीं चल सकी और दिल्ली में राष्ट्रपति शासन लग गया. लेकिन नयी उम्मीदों का वादा कर वर्ष 2015 के चुनाव में आम आदमी पार्टी ने एकतरफा जीत हासिल की. मुफ्त बिजली, पानी और महिलाओं के लिए मुफ्त बस यात्रा, शिक्षा और स्वास्थ्य सुविधाओं को बेहतर करने का लाभ वर्ष 2020 के विधानसभा में भी मिला.


केजरीवाल के ईमानदार वाली छवि पर लगा धक्का

आम आदमी पार्टी पिछला दो विधानसभा चुनाव बड़े मार्जिन से जीतने में कामयाब रही. हालांकि इस दौरान हुए तीन लोकसभा चुनाव में भाजपा सभी सात सीटें जीतने में कामयाब रही. लेकिन विधानसभा चुनाव में भाजपा को आम आदमी पार्टी से मात खानी पड़ रही. ऐसे में मौजूदा विधानसभा को जीतने के लिए भाजपा ने जमीनी स्तर पर काम करने का निर्णय लिया. भाजपा की ओर से लोकसभा चुनाव के बाद से आम आदमी के कोर वोटर को साधने के लिए अभियान चलाया गया. खासकर झुग्गी और गरीब बस्तियों में पार्टी ने विशेष अभियान चलाया और उन्हें यह भरोसा दिलाया कि उनकी समस्याओं को दूर किया जायेगा. भाजपा ने अरविंद केजरीवाल की ईमानदारी वाली छवि को नुकसान पहुंचाने के लिए शराब घोटाले को जोरशोर से उठाया. इसके अलावा शीश महल का मुद्दा भी भाजपा के लिए चुनाव में केजरीवाल की छवि को नुकसान पहुंचाने का सबसे कारगर हथियार साबित हुआ. इस मुद्दे पर आम आदमी पार्टी रक्षात्मक मुद्रा में रही. 


भाजपा ने जमीनी स्तर पर किया जनाधार बढ़ाने का काम


पिछले दो चुनावों में भाजपा सिर्फ आम आदमी पार्टी के खिलाफ बड़ी रैलियों के जरिये चुनावी माहौल बनाने की कोशिश कर रही थी. पार्टी की यह रणनीति कामयाब नहीं रही और केजरीवाल बड़े अंतर से चुनाव जीतने में कामयाब रहे. केजरीवाल ने खुद को आम लोगों के हितैषी के तौर पर स्थापित किया. ऐसे में पिछले हार से सबक लेते हुए भाजपा ने स्थानीय मुद्दों को प्राथमिकता देने के साथ ही जमीनी स्तर पर लोगों से जुड़ने की रणनीति पर काम किया. हरियाणा और महाराष्ट्र में भाजपा को इस रणनीति के कारण बड़ी जीत मिल चुकी थी. पार्टी ने दिल्ली में इसी रणनीति पर आगे बढ़ने का फैसला किया. पार्टी की ओर से हर वर्ग को साधने के साथ आप सरकार की नाकामियों को सामने लाने का काम किया. प्रदूषण, पानी की कमी, सड़कों की बदहाल स्थिति, 

भाजपा के वादे पर लोगों ने किया भरोसा

भ्रष्टाचार और केजरीवाल की आम आदमी की छवि के बारे में लोगों को जागरूक करने का काम किया. साथ ही लोगों को यह भरोसा दिलाया कि पूर्व की जनकल्याणकारी योजनाओं को बंद नहीं किया जायेगा. पार्टी की ओर से आप की मुफ्त की घोषणाओं की काट के लिए हर वर्ग के लिए कई तरह के वादे किए. केजरीवाल काे उम्मीद थी कि महिला सम्मान राशि से एक बार फिर आम आदमी पार्टी को बड़ी जीत मिल जायेगी. लेकिन भाजपा की ओर से 2500 रुपये का वादा कर यह बताया गया कि पंजाब में भी केजरीवाल ऐसा वादा कर चुके हैं और अभी तक वहां की महिलाओं को इसका लाभ नहीं मिला है. ऐसे में दिल्ली में भी महिलाओं को सम्मान राशि नहीं मिलेगी. केजरीवाल ने लोकसभा चुनाव के दौरान ही महिलाओं को एक हजार रुपये महीने देने का वादा किया था. भाजपा ने इस मुद्दे को दिल्ली की गली-गली तक पहुंचाकर आप की बढ़त को कम करने का काम किया. 

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