मध्य प्रदेश के धार जिले में भोजशाला-कमाल मौला परिसर विवाद को लेकर आज इंदौर हाई कोर्ट की डिवीजन बेंच अपना फैसला सुना सकती है. 12 मई को इस मामले में अंतिम सुनवाई हुई थी, जिसके बाद कोर्ट ने फैसला सुरक्षित रख लिया था. फैसले से पहले जिले में सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए गए हैं.
कलेक्टर राजीव रंजन मीना ने लोगों से शांति बनाए रखने की अपील की है. उन्होंने कहा कि यह ऐतिहासिक संरचना एएसआई द्वारा संरक्षित है, इसलिए किसी भी अफवाह या भ्रामक खबर पर ध्यान न दें. प्रशासन सोशल मीडिया और अन्य माध्यमों पर नजर बनाए हुए है और अगर कोई गलत जानकारी फैलाता है तो उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी.
कोर्ट के फैसले का स्वागत करेंगे : डिप्टी सीएम जगदीश देवड़ा
मध्य प्रदेश के डिप्टी सीएम जगदीश देवड़ा ने भोजशाला-कमाल मौला विवाद पर कहा कि वे कोर्ट के फैसले का स्वागत करेंगे. उन्होंने बताया कि धार में कड़ी सुरक्षा व्यवस्था की गई है और लोगों से अपील की कि जो भी फैसला आए, उसे शांति से स्वीकार करें.
हिंदू समुदाय वाग्देवी का मानता है मंदिर
धार की भोजशाला को हिंदू समुदाय वाग्देवी (देवी सरस्वती) का मंदिर मानता है, जबकि मुस्लिम पक्ष इस स्मारक को कमाल मौला मस्जिद बताता है. जैन समुदाय के एक याचिकाकर्ता ने विवादित परिसर में मध्यकालीन जैन मंदिर और गुरुकुल होने का दावा किया है.
एएसआई ने स्मारक के वैज्ञानिक सर्वेक्षण के बाद क्या कहा
एएसआई ने स्मारक के वैज्ञानिक सर्वेक्षण के बाद 2,000 से ज्यादा पन्नों की रिपोर्ट में संकेत दिया है कि इस परिसर में धार के परमार राजाओं के शासनकाल की एक विशाल संरचना मस्जिद के मुकाबले पहले से विद्यमान थी. वहां वर्तमान में मौजूद एक विवादित ढांचा मंदिरों के हिस्सों का फिर से इस्तेमाल करते हुए बनाया गया था. हिंदू पक्ष का दावा है कि एएसआई को वैज्ञानिक सर्वेक्षण में मिले सिक्के, मूर्तियां और शिलालेख गवाही देते हैं कि यह परिसर मूलत: एक मंदिर था.
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हाई कोर्ट ने 11 मार्च 2024 को एएसआई को भोजशाला मंदिर-कमाल मौला मस्जिद परिसर का वैज्ञानिक सर्वेक्षण करने का आदेश दिया था. एएसआई ने 22 मार्च 2024 से इस परिसर का सर्वेक्षण शुरू किया था. एएसआई ने 98 दिनों के विस्तृत सर्वेक्षण के बाद 15 जुलाई 2024 को कोर्ट में अपनी रिपोर्ट पेश की थी.
