BCI के को-चेयरमैन सदाशिव रेड्डी ने मांगा चेयरमैन मनन मिश्रा का इस्तीफा, कहा-काउंसिल बेहतर का हकदार

बार काउंसिल ऑफ इंडिया (BCI) में इस्तीफे की मांग उठी है. को-चेयर वाईआर सदाशिव रेड्डी ने चेयरमैन मनन मिश्रा से पद छोड़ने को कहा है. इसके लिए उन्होंने मनन मिश्रा को छह पन्नों का पत्र लिखा है.

बार काउंसिल ऑफ इंडिया (BCI) के को-चेयरमैन वाईआर सदाशिव रेड्डी ने चेयरमैन मनन कुमार मिश्रा का इस्तीफा मांगा है. उन्होंने कहा है कि बार काउंसिल बेहतर का हकदार है. यह जानकारी लाइव लॉ की रिपोर्ट से सामने आई है. रिपोर्ट में कहा गया है कि सदाशिव रेड्डी ने चेयरमैन मनन मिश्रा के इस्तीफे की मांग के पीछे ₹150 करोड़ के फंड के कथित हेरफेर, परिवार में नियुक्तियां और NALSAR के छात्रों के खिलाफ गैरकानूनी कार्रवाई को कारण बताया है.

सदाशिव रेड्डी, चेयरमैन मनन मिश्रा के साथ पिछले एक दशक से काम कर रहे हैं और उन्होंने मनन मिश्रा पर कई गंभीर आरोप लगाएं हैं.


रेड्डी ने मनन मिश्रा को लिखा पत्र

बीसीआई के को चेयरमैन सदाशिव रेड्डी ने चेयरमैन मनन मिश्रा को छह पन्नों का एक पत्र लिखकर उनसे इस्तीफा मांगा है. उन्होंने मनन मिश्रा को लिखा है कि बार काउंसिल का स्तर बनाये रखने के लिए उन्हें इस्तीफा दे देना चाहिए. इस्तीफे के लिए उन्होंने मनन मिश्रा को 15 दिन का समय भी दिया है.

रिश्तेदारों की नियुक्ति का लगाया आरोप

को चेयर सदाशिव रेड्डी ने अपने पत्र में मनन मिश्रा पर यह आरोप लगाया है कि उन्होंने अपने 14 साल के कार्यकाल में बार काउंसिल को एक तरह से अपनी निजी संपत्ति बना लिया है . उन्होंने यह आरोप लगाया कि काउंसिल के कई महत्वपूर्ण पदों पर मनन मिश्रा के रिश्तेदारों और उनके पहचान वालों की नियुक्ति हुई है. इतना ही नहीं उन्होंने नये वकीलों के साथ बहुत ही बुरा व्यवहार किया है. NALSAR के छात्रों के खिलाफ उनकी कार्रवाई को भी रेड्डी ने गलत और गैरकानूनी बताया है.

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लेखक के बारे में

By रजनीश आनंद

रजनीश आनंद प्रभात खबर में सीनियर चीफ कंटेंट राइटर के पद पर कार्यरत हैं और पत्रकारिता के क्षेत्र में 25 वर्षों से अधिक का अनुभव रखती हैं.फिलहाल वे प्रभात खबर के ओरिजिनल, नेशनल, इंटरनेशनल और खेल कैटेगरी के लिए राइटिंग का काम करती हैं. उनकी पहचान फैक्ट बेस्ट रिपोर्टिंग, रिसर्च बेस्ड स्टोरी और एक्सप्लेनर लेखन के लिए है.

राजनीति, सामाजिक सरोकार, ग्रामीण विकास, महिला मुद्दों, इतिहास, खेल, जनजातीय समाज और सार्वजनिक नीतियों से जुड़े विषयों पर उनकी विशेष रुचि रही है. वैसे मुद्दे जो समाज के हाशिये पर मौजूद समुदायों और आम लोगों के जीवन को प्रभावित करते हैं, लेकिन मुख्यधारा की बहस में अपेक्षाकृत कम जगह पाते हैं, ऐसे विषयों पर भी लेखन में रुचि रखती हैं.

रजनीश आनंद कई प्रतिष्ठित पत्रकारिता फेलोशिप से जुड़ी रही हैं. इन्क्लूसिव मीडिया–यूएनडीपी फेलोशिप के तहत उन्होंने झारखंड के पश्चिमी सिंहभूम (चाईबासा) जिले में माहवारी स्वच्छता और किशोरियों एवं महिलाओं के स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियों पर अध्ययन एवं रिपोर्टिंग की. झारखंड सरकार मीडिया फेलोशिप के दौरान महिला सशक्तिकरण, सरकारी योजनाओं के प्रभाव और सामाजिक बदलाव के विभिन्न आयामों पर काम किया. इसके अलावा सेव द चिल्ड्रन फेलोशिप के तहत बच्चों के अधिकार, शिक्षा, सुरक्षा और बाल कल्याण से जुड़े मुद्दों पर गहन रिपोर्टिंग की है.

आदिवासी समाज, विशेषकर मुंडा जनजाति के इतिहास, संस्कृति और समकालीन चुनौतियों पर उनका काम उल्लेखनीय माना जाता है. उन्होंने भूमि, पहचान, परंपरा, सामाजिक बदलाव और आदिवासी समुदायों के अधिकारों से जुड़े विषयों पर व्यापक फील्ड रिपोर्टिंग की है.हाल के वर्षों में उन्होंने झारखंड में ऊर्जा संक्रमण (Energy Transition) और जस्ट ट्रांजिशन की अवधारणा पर भी काम किया है. विशेष रूप से कोयला आधारित अर्थव्यवस्था वाले क्षेत्रों में रोजगार, आजीविका और सामाजिक प्रभावों से जुड़ी चुनौतियों पर उनकी रिपोर्टिंग ने महत्वपूर्ण सवाल उठाए हैं.

रजनीश आनंद झारखंड की राजधानी रांची में रहती हैं और इलाहाबाद विश्वविद्यालय से स्नातक हैं. उन्होंने वर्ष 2000 में पत्रकारिता की शुरुआत झारखंड जागरण दैनिक से की. इसके बाद प्रभात खबर, हिंदुस्तान, रांची एक्सप्रेस और दैनिक जागरण सहित कई प्रमुख समाचार संस्थानों के लिए रिपोर्टिंग और स्वतंत्र लेखन किया. प्रिंट मीडिया के दैनिक, साप्ताहिक, पाक्षिक और सांध्य प्रकाशनों में काम करने के साथ-साथ वे वर्ष 2012 से डिजिटल पत्रकारिता में सक्रिय हैं.

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