BCI चेयरमैन मनन मिश्रा के खिलाफ विरोध प्रदर्शन को CJP का समर्थन, इस्तीफे की कर रहे हैं मांग

ऑल इंडिया यंग एडवोकेट्स एसोसिएशन ने BCI चेयरमैन मनन मिश्रा के खिलाफ विरोध प्रदर्शन किया और मनन कुमार मिश्रा के इस्तीफे की मांग की. एसोसिएशन का कहना है कि मनन मिश्रा पिछले 14 साल से पद पर बने हुए हैं, लेकिन उनके वकीलों के हित में कोई काम नहीं किया.

चीफ जस्टिस का विरोध करने पर उन्होंने NALSAR से 2026 में कानून की पढ़ाई पूरी करने वाले छात्रों का वकील के रूप में नामांकन रोकने का आदेश दिया था, जिसकी वजह से उनका विरोध किया जा रहा है. इस विरोध प्रदर्शन को कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) ने भी अपना समर्थन दिया है. इस विरोध प्रदर्शन के पीछे वजह BCI चेयरमैन और हैदराबाद में NALSAR यूनिवर्सिटी ऑफ लॉ के स्टूडेंट्स के खिलाफ उनके एक्शन से जुड़ा विवाद है.



CJP हमारे प्रदर्शन का समर्थन कर रही है तो यह अच्छी बात है

एडवोकेट रमन शर्मा ने एएनआई से बात करते हुए कहा कि अगर कॉकरोच जनता पार्टी ने हमारा सपोर्ट किया है तो ठीक है-यह अच्छी बात है. हमारी अपनी बिरादरी को जरूर इस बारे में सोचना चाहिए था. लेकिन यह पूरी तरह से वकीलों का हमारी अपनी सबसे बड़ी संस्था के खिलाफ एक आंदोलन है ताकि संगठन के अंदर की कमियों को दूर किया जा सके और हमारी जायज मांगों पर दबाव डाला जा सके. चेयरमैन 14 साल से अपने पद पर हैं; उन्होंने कानूनी बिरादरी के लिए असल में क्या किया है.

हम जानते हैं कि पूरे भारत में पुलिस स्टेशनों में वकीलों के साथ कैसा बर्ताव किया जाता है. सुप्रीम कोर्ट के एक फैसले ने इन्वेस्टिगेटिंग ऑफिसर्स (IOs) को सात साल से कम जेल की सजा वाले अपराधों के मामलों में आरोपी लोगों को सीधे पुलिस स्टेशन से रिहा करने का अधिकार दिया.पूरे भारत में क्रिमिनल लॉ प्रैक्टिस असल में खत्म हो रही है, फिर भी कोई इसके खिलाफ खड़ा नहीं हो रहा है. यह हमारी सबसे बड़ी संस्था थी; उन्हें बोलना चाहिए था. तीन बड़े कानूनों में बदलाव किया गया. ऑल इंडिया यंग लॉयर्स एसोसिएशन BCI चेयरमैन के इस्तीफे की मांग कर रहा है. हम भी यही मांग कर रहे हैं.

BCI चेयरमैन ने लॉ स्टूडेंट्स की भलाई के लिए कोई काम नहीं किया

विरोध प्रदर्शन में शामिल एडवोकेट उमेश कुमार कहते हैं कि BCI चेयरमैन ने लॉ स्टूडेंट्स या वकीलों की भलाई के लिए कोई एक काम नहीं किया है. वकीलों पर रोज हमले होते हैं और पुलिस थानों के अंदर उनकी हत्या की जाती है. हाल ही में हैदराबाद में एक सीनियर वकील की मौत हो गई, क्या उन्होंने इस बारे में कोई ऑफिशियल बयान जारी किया? जब हमारी भलाई की बात आती है तो वह चुप रहते हैं, फिर भी वह हमेशा पॉलिटिकल एजेंडा को आगे बढ़ाने में सबसे आगे रहते हैं.अक्सर ऐसा करने के लिए BCI के ऑफिशियल लेटर का गलत इस्तेमाल करते हैं. यहां मुद्दे वकीलों की भलाई, एडवोकेट्स एक्ट, स्टाइपेंड, चैंबर, हमारी भलाई और लॉ कॉलेजों पर कंट्रोल की जरूरत से जुड़े हैं.खासकर नकली लॉ कॉलेजों और डिग्रियों के बारे में. ऐसे दावे हैं कि इस प्रोफेशन में 35% से 40% लोग नकली वकील हैं.

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By रजनीश आनंद

रजनीश आनंद प्रभात खबर में सीनियर चीफ कंटेंट राइटर के पद पर कार्यरत हैं और पत्रकारिता के क्षेत्र में 25 वर्षों से अधिक का अनुभव रखती हैं.फिलहाल वे प्रभात खबर के ओरिजिनल, नेशनल, इंटरनेशनल और खेल कैटेगरी के लिए राइटिंग का काम करती हैं. उनकी पहचान फैक्ट बेस्ट रिपोर्टिंग, रिसर्च बेस्ड स्टोरी और एक्सप्लेनर लेखन के लिए है.

राजनीति, सामाजिक सरोकार, ग्रामीण विकास, महिला मुद्दों, इतिहास, खेल, जनजातीय समाज और सार्वजनिक नीतियों से जुड़े विषयों पर उनकी विशेष रुचि रही है. वैसे मुद्दे जो समाज के हाशिये पर मौजूद समुदायों और आम लोगों के जीवन को प्रभावित करते हैं, लेकिन मुख्यधारा की बहस में अपेक्षाकृत कम जगह पाते हैं, ऐसे विषयों पर भी लेखन में रुचि रखती हैं.

रजनीश आनंद कई प्रतिष्ठित पत्रकारिता फेलोशिप से जुड़ी रही हैं. इन्क्लूसिव मीडिया–यूएनडीपी फेलोशिप के तहत उन्होंने झारखंड के पश्चिमी सिंहभूम (चाईबासा) जिले में माहवारी स्वच्छता और किशोरियों एवं महिलाओं के स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियों पर अध्ययन एवं रिपोर्टिंग की. झारखंड सरकार मीडिया फेलोशिप के दौरान महिला सशक्तिकरण, सरकारी योजनाओं के प्रभाव और सामाजिक बदलाव के विभिन्न आयामों पर काम किया. इसके अलावा सेव द चिल्ड्रन फेलोशिप के तहत बच्चों के अधिकार, शिक्षा, सुरक्षा और बाल कल्याण से जुड़े मुद्दों पर गहन रिपोर्टिंग की है.

आदिवासी समाज, विशेषकर मुंडा जनजाति के इतिहास, संस्कृति और समकालीन चुनौतियों पर उनका काम उल्लेखनीय माना जाता है. उन्होंने भूमि, पहचान, परंपरा, सामाजिक बदलाव और आदिवासी समुदायों के अधिकारों से जुड़े विषयों पर व्यापक फील्ड रिपोर्टिंग की है.हाल के वर्षों में उन्होंने झारखंड में ऊर्जा संक्रमण (Energy Transition) और जस्ट ट्रांजिशन की अवधारणा पर भी काम किया है. विशेष रूप से कोयला आधारित अर्थव्यवस्था वाले क्षेत्रों में रोजगार, आजीविका और सामाजिक प्रभावों से जुड़ी चुनौतियों पर उनकी रिपोर्टिंग ने महत्वपूर्ण सवाल उठाए हैं.

रजनीश आनंद झारखंड की राजधानी रांची में रहती हैं और इलाहाबाद विश्वविद्यालय से स्नातक हैं. उन्होंने वर्ष 2000 में पत्रकारिता की शुरुआत झारखंड जागरण दैनिक से की. इसके बाद प्रभात खबर, हिंदुस्तान, रांची एक्सप्रेस और दैनिक जागरण सहित कई प्रमुख समाचार संस्थानों के लिए रिपोर्टिंग और स्वतंत्र लेखन किया. प्रिंट मीडिया के दैनिक, साप्ताहिक, पाक्षिक और सांध्य प्रकाशनों में काम करने के साथ-साथ वे वर्ष 2012 से डिजिटल पत्रकारिता में सक्रिय हैं.

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