बंसीलाल की बहू किरण चौधरी ने कांग्रेस छोड़कर बीजेपी क्यों ज्वाइन किया? भूपेंद्र सिंह हुड्डा से रही है प्रतिद्वंदिता

बंसीलाल के दिवंगत बेटे सुरेंद्र सिंह की पत्नी हैं किरण चौधरी. ये भूपेंद्र सिंह हुड्डा के कार्यकाल में मंत्री भी रही हैं.

Kiran Choudhry : कांग्रेस नेता किरण चौधरी ने बुधवार को बीजेपी ज्वाइन कर लिया है. उन्होंने अपनी बेटी श्रुति चौधरी के साथ बीजेपी ज्वाइन किया है. किरण चौधरी हरियाणा के पूर्व सीएम बंसीलाल की बहू हैं. पार्टी में उनकी पहुंच बहुत अच्छी है और उन्हें भूपेंद्र हुड्डा का प्रतिद्वंदी माना जाता है. किरण चौधरी और उनकी बेटी श्रुति ने कांग्रेस पार्टी के अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे को अपना इस्तीफा सौंप दिया है. किरण ने बुधवार सुबह बीजेपी के हेडक्वार्टर में हरियाणा के सीएम नायाब सिंह सैनी और पूर्व सीएम मनोहर लाल खट्टर की उपस्थिति में बीजेपी ज्वाइन किया.

पार्टी पर एक व्यक्ति का राज

पार्टी ज्वाइन करने के बाद मीडिया से बात करते हुए किरण चौधरी ने कहा कि पार्टी में एकाधिकार जैसी स्थिति बन गई है. वे लोग पार्टी को अपनी निजी संपत्ति समझते हैं. मैंने बीजेपी इसलिए ज्वाइन किया है क्योंकि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के पास 2047 तक की योजना है, जिसमें वे विकसित भारत की योजना पर काम करेंगे. मेरा यह मानना है कि उनकी योजना सफल होगी और भारत पूरे विश्व में अपना दबदबा कायम करेगा. केंद्र में तीसरी बार नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में सरकार बनी है और उम्मीद है कि इसका असर सरकार के कामकाज पर दिखेगा. मैंने खट्टर जी के साथ बहुत काम किया है, हमारे बीच कड़वाहट भी रही है, लेकिन जिस तरह से उन्होंने काम किया है वे हमारे प्रेरणास्रोत भी रहे हैं. किरण चौधरी ने कहा कि मैंने अपना पूरा जीवन कांग्रेस की सेवा में बिताया है.

बंसीलाल के बेटे सुरेंद्र सिंह की पत्नी है किरण चौधरी

किरण चौधरी बंसीलाल के दिवंगत बेटे सुरेंद्र सिंह की पत्नी हैं. किरण चौधरी हरियाणा के तोशाम विधानसभा क्षेत्र से विधायक हैं. 69 वर्षीय किरण चौधरी का जन्म दिल्ली में हुआ है. किरण चौधरी भूपेंद्र सिंह हुड्डा के कार्यकाल में मंत्री रह चुकी हैं. इनके और भूपेंद्र सिंह हुड्डा के बीच राजनीतिक प्रतिद्वंदिता रही है. भूपेंद्र सिंह हुड्डा पर पार्टी छोड़ते वक्त इन्होंने इशारों में हमला भी किया है.

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Author: Rajneesh Anand

रजनीश आनंद प्रभात खबर में सीनियर चीफ कंटेंट राइटर के पद पर कार्यरत है.पत्रकारिता के क्षेत्र में 25 वर्षों का अनुभव रखती हैं. झारखंड की राजधानी रांची में रहने वाली रजनीश ने इलाहाबाद विश्वविद्यालय से स्नातक की शिक्षा प्राप्त की और वर्ष 2000-01 में पत्रकारिता की शुरुआत की. इन्होंने पहली नौकरी झारखंड जागरण दैनिक अखबार में की. उसके बाद इन्होंने प्रभात खबर, हिंदुस्तान, रांची एक्सप्रेस तथा दैनिक जागरण सहित कई प्रमुख समाचार संस्थानों के लिए रिपोर्टिंग और लेखन किया. प्रिंट मीडिया के दैनिक, साप्ताहिक, पाक्षिक और सांध्य संस्करणों में काम करने के बाद वे वर्ष 2012 से डिजिटल पत्रकारिता में सक्रिय हैं. रजनीश आनंद की पहचान तथ्यपरक रिपोर्टिंग, गहन शोध और विश्लेषणात्मक लेखन के लिए है. उनकी रुचि राजनीति, सामाजिक सरोकारों, ग्रामीण विकास, महिला मुद्दों, इतिहास, खेल, जनजातीय समाज और सार्वजनिक नीतियों से जुड़े विषयों में रही है। उन्होंने हमेशा उन मुद्दों को प्राथमिकता दी है जो समाज के हाशिये पर खड़े लोगों के जीवन को प्रभावित करते हैं, लेकिन मुख्यधारा की चर्चा में अपेक्षाकृत कम स्थान पाते हैं. वे कई प्रतिष्ठित पत्रकारिता फेलोशिप से जुड़ी रही हैं. इन्क्लूसिव मीडिया–यूएनडीपी फेलोशिप के तहत उन्होंने झारखंड के पश्चिमी सिंहभूम (चाईबासा) जिले में माहवारी स्वच्छता और किशोरियों एवं महिलाओं के स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियों पर विस्तृत अध्ययन और रिपोर्टिंग की. झारखंड सरकार मीडिया फेलोशिप के दौरान उन्होंने महिला सशक्तिकरण, सरकारी योजनाओं के प्रभाव और सामाजिक बदलाव के विभिन्न आयामों पर कार्य किया. इसके अतिरिक्त सेव द चिल्ड्रन फेलोशिप के तहत उन्होंने बच्चों के अधिकार, शिक्षा, सुरक्षा और बाल कल्याण से जुड़े मुद्दों पर गहन रिपोर्टिंग की. आदिवासी समाज, विशेषकर मुंडा जनजाति के इतिहास, संस्कृति और समकालीन चुनौतियों पर उनका काम उल्लेखनीय माना जाता है. उन्होंने भूमि, पहचान, परंपरा, सामाजिक बदलाव और आदिवासी समुदायों के अधिकारों से जुड़े विषयों पर व्यापक फील्ड रिपोर्टिंग की है. हाल के वर्षों में उन्होंने झारखंड में ऊर्जा संक्रमण (Energy Transition) और जस्ट ट्रांजिशन की अवधारणा पर भी काम किया है. विशेष रूप से कोयला आधारित अर्थव्यवस्था वाले क्षेत्रों में भविष्य की चुनौतियों, रोजगार, आजीविका और सामाजिक प्रभावों पर उनकी रिपोर्टिंग ने महत्वपूर्ण प्रश्न उठाए हैं. उनका मानना है कि ऊर्जा परिवर्तन की प्रक्रिया तभी सफल होगी जब उसमें प्रभावित समुदायों की भागीदारी और हितों को केंद्र में रखा जाए.पत्रकारिता उनके लिए केवल एक पेशा नहीं, बल्कि समाज के प्रति जिम्मेदारी निभाने का माध्यम है. जमीनी रिपोर्टिंग, तथ्यों की पड़ताल और जनसरोकारों को केंद्र में रखकर लिखना उनकी कार्यशैली की विशेषता रही है. इसके अतिरिक्त रजनीश आनंद कहानियां और कविताएं लिखने का शौक भी रखती है.

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