आशुतोष रांका का दावा- जयपुर के हमले में CJP सदस्यों की हत्या हो सकती थी, पर हम डरने वाले नहीं हैं ; सच सामने लाएंगे

राजस्थान के सरकारी स्कूलों की स्थिति का सच सामने लाने के अभियान में कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) की टीम पर जयपुर में हमला हुआ. हमले के दौरान CJP प्रवक्ता आशुतोष रांका को ग्रामीणों ने गांव में प्रवेश करने नहीं दिया. इस हमले के बारे में रांका ने एएनआई न्यूज एजेंसी से बात की.

कॉकरोच जनता पार्टी (CJP)की टीम पर शुक्रवार को जयपुर में हुए हमले पर सीजेपी के प्रवक्ता आशुतोष रांका ने कहा कि कल जो घटना हुई, वह सुनियोजित थी. हमने आज ही इन सभी लोगों की तस्वीरें सोशल मीडिया पर शेयर की है. वे सभी लोग स्थानीय विधायक कैलाश वर्मा के साथ एक रात पहले बैठे हुए दिखे हैं.


आशुतोष रांका ने कहा कि हमारी टीम पर सुनियोजित तरीके से हमला हुआ है. हमले में जिस तरह के पत्थरों का प्रयोग हुआ है, उससे यह साफ है कि वे गुंडे सीजेपी की टीम के लोगों की हत्या तक कर सकते थे. हमने पुलिस से मदद मांगी, लेकिन उन्होंने हाथ खड़े कर दिए.


मदन दिलावर ने अपने पैर पर कुल्हाड़ी मार ली है

आशुतोष रांका ने कहा कि पूरा देश और दुनिया देखेगी कि राजस्थान पुलिस इस मामले की निष्पक्ष जांच करती है या नहीं. हमने अपने सभी वीडियो पहले ही पब्लिक डोमेन में डाल दिए हैं. अगर दूसरी तरफ के पास कोई वीडियो है, तो उन्हें भी जारी करना चाहिए, ताकि दुनिया देखे कि शुक्रवार को क्या हुआ. रांका ने कहा कि शुक्रवार को जो कुछ भी हुआ,उसकी एफआईआर हमने दर्ज कराई है. हम डरने वाले नहीं हैं.

हम सरकारी स्कूलों को ठीक करने के लिए लड़ाई लड़ रहे हैं. हमारी लड़ाई जारी रहेगी. राजस्थान के शिक्षा मंत्री मदन दिलावर ने असल में अपने पैर पर कुल्हाड़ी मार ली है. स्कूलों की दुर्दशा जब सामने आएगी तो उनकी बेइज्जती होगी और हम उनके इस्तीफे की मांग करेंगे.

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By रजनीश आनंद

रजनीश आनंद प्रभात खबर में सीनियर चीफ कंटेंट राइटर के पद पर कार्यरत हैं और पत्रकारिता के क्षेत्र में 25 वर्षों से अधिक का अनुभव रखती हैं.फिलहाल वे प्रभात खबर के ओरिजिनल, नेशनल, इंटरनेशनल और खेल कैटेगरी के लिए राइटिंग का काम करती हैं. उनकी पहचान फैक्ट बेस्ट रिपोर्टिंग, रिसर्च बेस्ड स्टोरी और एक्सप्लेनर लेखन के लिए है.

राजनीति, सामाजिक सरोकार, ग्रामीण विकास, महिला मुद्दों, इतिहास, खेल, जनजातीय समाज और सार्वजनिक नीतियों से जुड़े विषयों पर उनकी विशेष रुचि रही है. वैसे मुद्दे जो समाज के हाशिये पर मौजूद समुदायों और आम लोगों के जीवन को प्रभावित करते हैं, लेकिन मुख्यधारा की बहस में अपेक्षाकृत कम जगह पाते हैं, ऐसे विषयों पर भी लेखन में रुचि रखती हैं.

रजनीश आनंद कई प्रतिष्ठित पत्रकारिता फेलोशिप से जुड़ी रही हैं. इन्क्लूसिव मीडिया–यूएनडीपी फेलोशिप के तहत उन्होंने झारखंड के पश्चिमी सिंहभूम (चाईबासा) जिले में माहवारी स्वच्छता और किशोरियों एवं महिलाओं के स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियों पर अध्ययन एवं रिपोर्टिंग की. झारखंड सरकार मीडिया फेलोशिप के दौरान महिला सशक्तिकरण, सरकारी योजनाओं के प्रभाव और सामाजिक बदलाव के विभिन्न आयामों पर काम किया. इसके अलावा सेव द चिल्ड्रन फेलोशिप के तहत बच्चों के अधिकार, शिक्षा, सुरक्षा और बाल कल्याण से जुड़े मुद्दों पर गहन रिपोर्टिंग की है.

आदिवासी समाज, विशेषकर मुंडा जनजाति के इतिहास, संस्कृति और समकालीन चुनौतियों पर उनका काम उल्लेखनीय माना जाता है. उन्होंने भूमि, पहचान, परंपरा, सामाजिक बदलाव और आदिवासी समुदायों के अधिकारों से जुड़े विषयों पर व्यापक फील्ड रिपोर्टिंग की है.हाल के वर्षों में उन्होंने झारखंड में ऊर्जा संक्रमण (Energy Transition) और जस्ट ट्रांजिशन की अवधारणा पर भी काम किया है. विशेष रूप से कोयला आधारित अर्थव्यवस्था वाले क्षेत्रों में रोजगार, आजीविका और सामाजिक प्रभावों से जुड़ी चुनौतियों पर उनकी रिपोर्टिंग ने महत्वपूर्ण सवाल उठाए हैं.

रजनीश आनंद झारखंड की राजधानी रांची में रहती हैं और इलाहाबाद विश्वविद्यालय से स्नातक हैं. उन्होंने वर्ष 2000 में पत्रकारिता की शुरुआत झारखंड जागरण दैनिक से की. इसके बाद प्रभात खबर, हिंदुस्तान, रांची एक्सप्रेस और दैनिक जागरण सहित कई प्रमुख समाचार संस्थानों के लिए रिपोर्टिंग और स्वतंत्र लेखन किया. प्रिंट मीडिया के दैनिक, साप्ताहिक, पाक्षिक और सांध्य प्रकाशनों में काम करने के साथ-साथ वे वर्ष 2012 से डिजिटल पत्रकारिता में सक्रिय हैं.

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