'खत्‍म होने वाला नहीं है कोरोना वायरस, सीख लो इसके साथ जीना'

अरविंद केजरीवाल (Arvind Kejriwal) ने कहा कि कोरोना संक्रमण (Coronavirus Lockdown) खत्‍म नहीं होने वाला है. उन्‍होंने कहा, कोई यह न सोचे कि पूरी तरह से कोरोना संक्रमण मुक्‍त हो जाएगा, जब तक इसकी दवा नहीं आएगी.

नयी दिल्‍ली : देश इस समय कोरोना संकट से जूझ रहा है. अब तक जो आंकड़े सामने आये हैं उसके अनुसार देश में 37776 लोग संक्रमित हो चुके हैं और 1223 लोगों की मौत भी हो चुकी है. कोरोना संक्रमण का इलाज अब तक खोजा नहीं जा सका है. अब तक केवल शोध कार्य जारी हैं, लेकिन कोई पुष्‍ट दावे नहीं किये जा सके हैं कि कोरोना की दवा खोज ली गयी है. कोरोना से बचाव का एक मात्र उपाय सोशल डिस्‍टेंसिंग ही रह गया है. इस बीच दिल्‍ली के मुख्‍यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने एक टीवी कार्यक्रम में कोरोना को लेकर बड़ा बयान दे दिया है.

अरविंद केजरीवाल ने न्‍यूज चैनल आजतक के कार्यक्रम ई एजेंडा में कोरोना चर्चा में कहा कि कोरोना संक्रमण खत्‍म नहीं होने वाला है. उन्‍होंने कहा, कोई यह न सोचे कि पूरी तरह से कोरोना संक्रमण मुक्‍त हो जाएगा, जब तक इसकी दवा नहीं आएगी.

Also Read: Coronavirus Outbreak: देश में कोरोना के 4 बड़े धमाके, जानिए किन मामलों ने उड़ाई सरकार की नींद

चर्चा में केजरीवाल ने कहा कि कोरोना खत्‍म नहीं होने वाला है, बल्कि इसके साथ जीना सीख लेना चाहिए. हालांकि उन्‍होंने कोरोना संक्रमण से बचने के लिए दो सुझाव भी दिये. उन्‍होंने कहा, कोरोना संक्रमण को फैलने के लिए अगर रोकना है तो फिर हमें खूब टेस्ट करना होगा और मरीज को पूरी तरह से ठीक करके घर भेजो.

केजरीवाल ने आगे कहा, दूसरा उपाय है कि कोरोना से हो रही मौतों को भी रोकना होगा. किसी भी व्‍यक्ति की मौत नहीं होनी चाहिए. केजरीवाल ने कहा, अब समय आ गया है अर्थव्‍यवस्‍था को खोलने का, दिल्‍ली इसके लिए तैयार है. कोरोना के पॉजिटिव केस बढ़ते हैं तो इसके लिए हमें तैयार रहना होगा. उन्‍होंने कहा, अब समय आ गया है कि धीरे-धीरे लॉकडाउन से बाहर निकला जाए. उन्‍होंने कहा, केवल रेड जोन को ही बंद रखना चाहिए और बाकी सभी इलाकों को खोल देना चाहिए.

Also Read: बाबा नगरी देवघर से दो नये कोरोना पॉजिटिव मरीज मिले, झारखंड में संक्रमितों की संख्या 115 हुई

केजरीवाल ने कहा, 70 साल से देश की स्‍वास्‍थ्‍य व्‍यवस्‍था पर काम नहीं किया गया. उन्‍होंने अपनी सरकार की तारीफ करते हुए कहा कि दिल्‍ली में स्‍वास्‍थ्य को लेकर काफी काम किये गये हैं. उन्‍होंने मोहल्‍ला क्लिनिक का उदाहरण दिया और कहा, कोरोना ने हमें सीखा दिया है कि हमें अपने हेल्‍थ इंफ्रास्‍ट्रक्‍चर पर काफी काम करना बाकी है. रिसर्च पर काम करना है.

उन्‍होंने कहा, आज भी हमें अमेरिका का मुंह देखना पड़ता है कि वो दवा बनाएगा और हमारे देश का भी कल्‍याण होगा. उन्‍होंने कहा, हमें भी इस ओर आगे बढ़ना चाहिए, रिसर्च पर काम करना होगा. उन्‍होंने डॉक्‍टरों के संक्रमित होने पर काफी चिंता जतायी. उन्‍होंने कहा, जिस दिन लोगों में मौत का डर निकल जाएगा, उस दिन मन से कोरोना का भय खत्म हो जाएगा.

Also Read:
पांच देशों की जांच में कोरोना को लेकर फंस रहा है चीन, रिपोर्ट में चौकाने वाले खुलासे

प्रभात खबर डिजिटल प्रीमियम स्टोरी

लेखक के बारे में

Author: ArbindKumar Mishra

Published by: Prabhat Khabar

अरबिंद कुमार मिश्रा वर्तमान में प्रभात खबर डिजिटल में एक अनुभवी पत्रकार के रूप में कार्यरत हैं. अप्रैल 2011 से संस्थान का हिस्सा रहे अरबिंद के पास पत्रकारिता के क्षेत्र में बतौर रिपोर्टर और डेस्क एडिटर 15 वर्षों से अधिक का अनुभव है. वर्तमान में वह नेशनल और इंटरनेशनल डेस्क की जिम्मेदारी संभालने के साथ-साथ एक पूरी शिफ्ट का नेतृत्व (Shift Lead) भी कर रहे हैं. विशेषज्ञता और अनुभव अरबिंद की लेखनी में खबरों की गहराई और स्पष्टता है. उनकी मुख्य विशेषज्ञता इन क्षेत्रों में है. राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय मामले: वैश्विक राजनीति और देश की बड़ी घटनाओं पर पैनी नजर. खेल पत्रकारिता: झारखंड में आयोजित 34वें नेशनल गेम्स से लेकर JSCA स्टेडियम में हुए कई अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट मैचों की ग्राउंड रिपोर्टिंग का अनुभव. झारखंड की संस्कृति: राज्य की कला, संस्कृति और जनजातीय समुदायों की समस्याओं और उनकी जीवनशैली पर विशेष स्टोरीज. पंचायतनामा: ग्रामीण विकास और जमीनी मुद्दों पर 'पंचायतनामा' के लिए विशेष ग्राउंड रिपोर्टिंग. करियर का सफर प्रभात खबर डिजिटल से अपने करियर की शुरुआत करने वाले अरबिंद ने पत्रकारिता के हर आयाम को बखूबी जिया है. डिजिटल मीडिया की बारीकियों को समझने से पहले उन्होंने आकाशवाणी (All India Radio) और दूरदर्शन जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में एंकरिंग के जरिए अपनी आवाज और व्यक्तित्व की छाप छोड़ी है. शिक्षा और योग्यता UGC NET: अरबिंद मिश्रा ने यूजीसी नेट (UGC NET) उत्तीर्ण की है. मास्टर्स (MA): रांची यूनिवर्सिटी के जनजातीय एवं क्षेत्रीय भाषा विभाग से एमए की डिग्री. ग्रेजुएशन: रांची यूनिवर्सिटी से ही मास कम्युनिकेशन एंड जर्नलिज्म में स्नातक.

संबंधित खबरें >

यह भी पढ़ें >