Article 370 Verdict: सुप्रीम कोर्ट के फैसले का जम्मू-कश्मीर के लिए क्या है मतलब? क्या आएगा बदलाव

सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद राजनीति तेज हो गई है. जहां बीजेपी इसे ऐतिहासिक दिन बता रही है, तो कांग्रेस सहित विपक्षी पार्टियों ने इसे निराशाजनक बताया है. पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी (पीडीपी) की प्रमख महबूबा मुफ्ती ने फैसले पर कहा, यह मौत की सजा से कहीं से कम नहीं है.

सुप्रीम कोर्ट ने ऐतिहासिक फैसला सुनाते हुए पूर्ववर्ती जम्मू-कश्मीर राज्य को विशेष दर्जा देने वाले संविधान के अनुच्छेद 370 के प्रावधानों को निरस्त करने के केंद्र सरकार के फैसले को बरकरार रखा. चीफ जस्टिस डी वाई चंद्रचूड़ की अगुवाई वाली पांच न्यायाधीशों की संविधान पीठ ने दशकों पुरानी बहस पर विराम लगाते हुए तीन अलग-अलग लेकिन सर्वसम्मति वाले फैसले सुनाए, जिनमें 1947 में भारत संघ में शामिल होने पर जम्मू- कश्मीर को विशेष दर्जा प्रदान करने वाली संवैधानिक व्यवस्था को निरस्त करने के फैसले को बरकरार रखा गया.

सुप्रीम कोर्ट ने लद्दाख को अलग करने के फैसले की वैधता को भी बरकरार रखा

सुप्रीम कोर्ट ने 5 अगस्त, 2019 को जम्मू और कश्मीर से केंद्र शासित प्रदेश लद्दाख को अलग करने के फैसले की वैधता को भी बरकरार रखा. केंद्र सरकार ने इसी दिन अनुच्छेद 370 को निरस्त कर दिया था और पूर्ववर्ती जम्मू-कश्मीर राज्य को दो केंद्रशासित प्रदेशों- जम्मू-कश्मीर एवं लद्दाख में विभाजित कर दिया था.

सुप्रीम कोर्ट के फैसले राजनीति तेज

सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद राजनीति तेज हो गई है. जहां बीजेपी इसे ऐतिहासिक दिन बता रही है, तो कांग्रेस सहित विपक्षी पार्टियों ने इसे निराशाजनक बताया है. पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी (पीडीपी) की प्रमख महबूबा मुफ्ती ने फैसले पर कहा, यह मौत की सजा से कहीं से कम नहीं है. कांग्रेस ने सरकार से मांग की है कि फैसला आने के बाद जल्द से जल्द जम्मू-कश्मीर में चुनाव कराया जाना चाहिए और पूर्ण राज्य का दर्जा देना चाहिए.

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सुप्रीम कोर्ट के फैसले का जम्मू-कश्मीर पर क्या पड़ेगा प्रभाव

5 अगस्त, 2019 के बाद से जम्मू और कश्मीर में कोई विधानसभा चुनाव नहीं हुआ है. लेकिन अब सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद यहां विधानसभा चुनाव कराया जाएगा. कोर्ट ने भी फैसला सुनान के साथ ही केंद्र शासित प्रदेश (जम्मू कश्मीर) का राज्य का दर्जा जल्द से जल्द बहाल किए जाने और अगले साल 30 सितंबर तक विधानसभा चुनाव कराने का निर्देश दिया है.

जम्मू-कश्मीर का परिसीमन

जम्मू-कश्मीर से धारा 370 हटने के बाद परिसीमन आयोग ने अपनी रिपोर्ट सरकार को सौंपी थी. जिसमें समिति ने सात सीटों का इजाफा किया. इसके बाद जम्मू-कश्मीर को 90 विधानसभा सीटों वाला राज्य बना दिया. समिति ने कश्मीर क्षेत्र के लिए 47 और जम्मू क्षेत्र के लिए 43 सीटें निर्धारित की है. जो सात नयी सीटें आवंटित की गई हैं, उसमें 6 जम्मू के लिए और एक कश्मीर के लिए. फिलहाल जम्मू-कश्मीर में कुल 83 विधानसभा सीटें हैं.

पश्चिमी पाकिस्तान शरणार्थियों को भी वोटिंग राइट्स

जम्मू-कश्मीर में चुनाव के लिए बाहरी लोगों के लिए खोल दिया गए हैं. जो 5 अगस्त 2019 से पहले जम्मू और कश्मीर के स्थायी निवासी नहीं थे. पश्चिमी पाकिस्तान के शरणार्थी, जो 70 वर्षों से जम्मू-कश्मीर में रह रहे हैं. गृह मंत्रालय के अनुसार पश्चिमी पाकिस्तानी शरणार्थियों के 5746 परिवार हैं, जिनमें से अधिकांश कठुआ, सांबा और जम्मू के तीन जिलों में रहते हैं.

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लेखक के बारे में

अरबिंद कुमार मिश्रा वर्तमान में प्रभात खबर डिजिटल में एक अनुभवी पत्रकार के रूप में कार्यरत हैं. अप्रैल 2011 से संस्थान का हिस्सा रहे अरबिंद के पास पत्रकारिता के क्षेत्र में बतौर रिपोर्टर और डेस्क एडिटर 15 वर्षों से अधिक का अनुभव है. वर्तमान में वह नेशनल और इंटरनेशनल डेस्क की जिम्मेदारी संभालने के साथ-साथ एक पूरी शिफ्ट का नेतृत्व (Shift Lead) भी कर रहे हैं. विशेषज्ञता और अनुभव अरबिंद की लेखनी में खबरों की गहराई और स्पष्टता है. उनकी मुख्य विशेषज्ञता इन क्षेत्रों में है. राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय मामले: वैश्विक राजनीति और देश की बड़ी घटनाओं पर पैनी नजर. खेल पत्रकारिता: झारखंड में आयोजित 34वें नेशनल गेम्स से लेकर JSCA स्टेडियम में हुए कई अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट मैचों की ग्राउंड रिपोर्टिंग का अनुभव. झारखंड की संस्कृति: राज्य की कला, संस्कृति और जनजातीय समुदायों की समस्याओं और उनकी जीवनशैली पर विशेष स्टोरीज. पंचायतनामा: ग्रामीण विकास और जमीनी मुद्दों पर 'पंचायतनामा' के लिए विशेष ग्राउंड रिपोर्टिंग. करियर का सफर प्रभात खबर डिजिटल से अपने करियर की शुरुआत करने वाले अरबिंद ने पत्रकारिता के हर आयाम को बखूबी जिया है. डिजिटल मीडिया की बारीकियों को समझने से पहले उन्होंने आकाशवाणी (All India Radio) और दूरदर्शन जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में एंकरिंग के जरिए अपनी आवाज और व्यक्तित्व की छाप छोड़ी है. शिक्षा और योग्यता UGC NET: अरबिंद मिश्रा ने यूजीसी नेट (UGC NET) उत्तीर्ण की है. मास्टर्स (MA): रांची यूनिवर्सिटी के जनजातीय एवं क्षेत्रीय भाषा विभाग से एमए की डिग्री. ग्रेजुएशन: रांची यूनिवर्सिटी से ही मास कम्युनिकेशन एंड जर्नलिज्म में स्नातक.

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