370 हटने के 7 साल : जम्मू-कश्मीर विकास की ओर, PoJK में आर्थिक संकट से जूझ रहे लोग

अनुच्छेद 370 के हटने के 7 साल पूरे हो गए हैं. इस दौरान जम्मू-कश्मीर में सुरक्षा, पर्यटन और आर्थिक हालात में अभूतपूर्व सुधार देखा गया है. वहीं, पाकिस्तान अधिकृत जम्मू-कश्मीर (PoJK) के लोग गंभीर असंतोष और आर्थिक संकट का सामना कर रहे हैं.

Jammu Kashmir Article 370 : आर्टिकल 370 के हटने के 7 साल बाद जम्मू-कश्मीर और पाकिस्तान अधिकृत जम्मू-कश्मीर के बीच एक बड़ा अंतर उभरकर सामने आया है. एक ओर जहां जम्मू-कश्मीर की सुरक्षा व्यवस्था सहित पर्यटन और आर्थिक हालात पहले से काफी बेहतर हुए हैं. वहीं दूसरी ओर पीओजेके के लोग काफी असंतोष का सामना कर रहे हैं.

पीओजेके स्थित मुजफ्फरबाद के लोगों ने बताया कि वहां इंटरनेट बंद कर दी गई है. जिसका बुरा असर व्यवसायों पर पड़ रहा है. बैंक के काम नहीं हो रहे और शिक्षा पर भी बुरा प्रभाव पड़ता नजर आ रहा है. कई क्षेत्रों में ट्रांसपोर्ट व्यवस्था बाधित है और व्यापारियों को बढ़ते वित्तीय नुकसान का डर सताने लगा है.

मुजफ्फरबाद के निवासी ख्वाजा अहमद ने बताया कि संचार ब्लैकआउट ने दैनिक जीवन को बुरी तरह प्रभावित किया है. साथ ही स्कूल बंद कर दिए गए हैं, जिससे बच्चों की पढ़ाई को भी नुकसान हो रहा है. उन्होंने बताया कि अधिकारियों से बल प्रयोग के बजाय बातचीत के माध्यम से समस्या का समाधान करने का आग्रह किया है.

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PoJK में इंटरनेट बंद होने से कारोबार प्रभावित

पाकिस्तान अधिकृत जम्मू-कश्मीर (PoJK) के निवासी मोहम्मद अजमल कुरैशी ने कहा कि इंटरनेट बंद होने से व्यापार बुरी तरह प्रभावित हुआ है. उनके मुताबिक, आज लगभग पूरा कारोबार इंटरनेट पर निर्भर है और कनेक्टिविटी न होने से व्यापार ठप पड़ जाता है. उन्होंने बताया कि बैंकिंग सेवाएं भी प्रभावित हैं. स्थानीय लोगों ने दवाओं की कमी, बंद पेट्रोल पंपों और सीमित सार्वजनिक परिवहन की शिकायत करते हुए कहा कि इन समस्याओं ने आम जनजीवन और अर्थव्यवस्था पर गंभीर असर डाला है.

जम्मू-कश्मीर में पर्यटन और विकास से बढ़ी आर्थिक गतिविधियां

रिपोर्ट के अनुसार, अगस्त 2019 में अनुच्छेद 370 हटने के बाद जम्मू-कश्मीर में सड़क, रेल, डिजिटल सेवाओं और सार्वजनिक निवेश में तेजी आई है. इसका सबसे बड़ा असर पर्यटन पर दिखाई दे रहा है. पहलगाम के बाग मालिक शोहैब ने कहा कि बड़ी संख्या में लोग पर्यटन से अपनी आजीविका चला रहे हैं और इससे स्थानीय अर्थव्यवस्था को काफी मजबूती मिली है.

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हस्तशिल्प और पर्यटन से स्थानीय लोगों को मिल रहा रोजगार

पहलगाम के बाजारों में हस्तशिल्प, पेपर-माशे उत्पाद, शॉल और अन्य पारंपरिक वस्तुएं पर्यटकों को आकर्षित कर रही हैं. स्थानीय दुकानदार उमर अली ने कहा कि युवा पीढ़ी कश्मीर की पारंपरिक कला और विरासत को आगे बढ़ा रही है. वहीं पुणे से आई पर्यटक श्वेता ने कश्मीर के हस्तनिर्मित उत्पादों और पेपर-माशे कला की सराहना करते हुए कहा कि यहां के हस्तशिल्प बेहद खूबसूरत हैं. रिपोर्ट में कहा गया है कि PoJK और जम्मू-कश्मीर की मौजूदा स्थिति दोनों क्षेत्रों के विकास और आर्थिक गतिविधियों के बीच स्पष्ट अंतर दिखाती है.


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By आलोक पाठक

आलोक पाठक वर्ष 2019 से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं। अपने पत्रकारिता सफर के दौरान वे खबर मंत्र, गांडीव और नक्षत्र न्यूज़ जैसे संस्थानों के साथ जुड़े रहे हैं। वर्तमान में वे प्रभात खबर के डिजिटल विभाग में कंटेंट राइटर के रूप में कार्यरत हैं। हिंदी भाषा और लेखन के प्रति उनका विशेष लगाव है। उन्हें भू-राजनीति (Geopolitics) और राष्ट्रीय राजनीति से जुड़े विषयों पर लिखना पसंद है। निजी जीवन में कहानियां और कविताएं लिखना तथा कालजयी साहित्य का अध्ययन उनकी प्रमुख रुचियों में शामिल है। उनका प्रयास तथ्यों पर आधारित, सरल और प्रभावी लेखन के माध्यम से पाठकों तक सार्थक जानकारी पहुंचाना है।

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