Amit Shah On Naxalite: नक्सलियों के पास बचा है कम समय, गृह मंत्री शाह की हुंकार – गोलियों का जवाब, गोलियों से देना होगा

Amit Shah On Naxalite: केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने नक्सलवाद और नक्सलियों पर बड़ा बयान दे दिया है. उन्होंने नक्सलियों को चेतावनी भी दी है. शाह ने एक बार फिर से दोहराया कि नक्सलियों के पास अब बहुत कम समय बचा है.उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा- गोलियां का जवाब गोलियों से ही दिया जाएगा.

Amit Shah On Naxalite: दिल्ली में नक्सलवाद पर केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने कहा, “हाल ही में भ्रम फैलाने के लिए एक पत्र लिखा गया था जिसमें कहा गया था कि अब तक जो कुछ हुआ है वह एक गलती थी, युद्धविराम की घोषणा की जानी चाहिए और हम आत्मसमर्पण करना चाहते हैं. युद्धविराम नहीं होगा. नक्सलियों से अमित शाह ने कहा- अगर आप आत्मसमर्पण करना चाहते हैं, तो युद्धविराम की कोई जरूरत नहीं है. अपने हथियार डाल दीजिए. पुलिस एक भी गोली नहीं चलाएगी.”

अमित शाह ने ऐसा क्यों कहा, हम नक्सलियों को मारना नहीं चाहते?

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने कहा, “ये वामपंथी जो नक्सलियों के बचाव में खड़े हैं और कहते हैं कि वे हमारे लोग हैं और उन्हें क्यों मारा जाना चाहिए? हम उन्हें मारना नहीं चाहते. 290 लोग इसलिए मारे गए क्योंकि वे हथियारबंद थे. हमने 1,090 को गिरफ्तार किया. जहां गिरफ्तारी संभव थी, हमने उन्हें गिरफ्तार किया. 881 ने आत्मसमर्पण किया. यह सरकार के दृष्टिकोण को दर्शाता है.

गोलियों का जवाब गोलियों से दिया जाना चाहिए : अमित शाह

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने कहा- “सरकार का दृष्टिकोण यह है कि हम नक्सलियों को गिरफ्तार करने और उन्हें आत्मसमर्पण कराने के लिए हर संभव प्रयास करते हैं. हम उन्हें एक मौका भी देते हैं. हमने एक अच्छी आत्मसमर्पण नीति भी शुरू की है. लेकिन जब आप हथियार उठाते हैं और भारत के निर्दोष नागरिकों को मारने के लिए तैयार होते हैं, तो सुरक्षा बलों के पास कोई दूसरा विकल्प नहीं होता है. गोलियों का जवाब गोलियों से दिया जाना चाहिए.”

सीपीआई और सीपीआई(एम) ने ऑपरेशन ब्लैक फॉरेस्ट का किया विरोध : अमित शाह

वामपंथी दल वामपंथी हिंसा से सार्वजनिक रूप से दूर रहे थे. लेकिन जैसे ही ऑपरेशन ब्लैक फॉरेस्ट हुआ, उनकी तुच्छ सहानुभूति उजागर हो गई. उन्होंने पत्र और प्रेस नोट लिखकर मांग की कि ऑपरेशन ब्लैक फॉरेस्ट तुरंत बंद किया जाए. सीपीआई और सीपीआई(एम) ने ऐसा किया। उन्हें उनकी रक्षा करने की क्या ज़रूरत है… एनजीओ पीड़ित आदिवासियों के मानवाधिकारों की रक्षा के लिए आगे क्यों नहीं आते? क्या ये लंबे-चौड़े लेख लिखने वाले और हमें सलाह देने वाले सभी लोगों ने कभी आदिवासी पीड़ितों के लिए एक लेख लिखा है? उन्हें इसकी चिंता क्यों नहीं है? आपकी सहानुभूति और सहानुभूति इतनी चुनिंदा क्यों है?…”

प्रभात खबर डिजिटल टॉप स्टोरी

लेखक के बारे में

By Arbindkumar mishra

अरबिंद कुमार मिश्रा मुख्यधारा की पत्रकारिता में 15 वर्षों से अधिक का अनुभव रखने वाले एक वरिष्ठ पत्रकार और लेखक हैं. वर्तमान में, वह प्रभात खबर डॉट कॉम (Prabhat Khabar) में सीनियर कंटेंट राइटर के रूप में अपनी सेवाएं दे रहे हैं. अरबिंद नेशनल, इंटरनेशनल और स्पोर्ट्स कैटेगरी में अपनी लेखनी के लिए जाने जाते हैं. गहरी रिसर्च पर आधारित स्पेशल स्टोरीज, रिपोर्टिंग और जटिल मुद्दों पर आसान भाषा में 'एक्सप्लेनर' लिखना उनकी मुख्य यूएसपी (USP) है.

झारखंड की समृद्ध संस्कृति और लोक परंपराओं में उनकी गहरी रुचि है. अपनी उत्कृष्ट और सरोकार से जुड़ी रिपोर्टिंग के लिए उन्हें संस्थान स्तर पर कई बार सम्मानित और पुरस्कृत भी किया जा चुका है.

करियर का सफरनामा

अरबिंद ने अपने पत्रकारिता करियर की शुरुआत देश की प्रतिष्ठित बहुभाषी न्यूज एजेंसी 'हिंदुस्थान समाचार' से बतौर रिपोर्टर की थी. इसके बाद उन्होंने प्रसार भारती के अंग दूरदर्शन और आकाशवाणी के साथ भी काम किया, जहां उन्होंने एंकरिंग, वॉइस-ओवर और रिपोर्टिंग के गुर सीखे. साल 2011 में वह 'प्रभात खबर डॉट कॉम' से जुड़े और तब से लगातार डिजिटल पत्रकारिता के क्षेत्र में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं.

प्रमुख उपलब्धियां और ग्राउंड रिपोर्टिंग

खेल पत्रकारिता और जमीनी रिपोर्टिंग में अरबिंद का योगदान उल्लेखनीय रहा है. उनकी कुछ सबसे बड़ी उपलब्धियों में शामिल हैं:

34वें राष्ट्रीय खेल: झारखंड में आयोजित ऐतिहासिक 34वें नेशनल गेम्स की बेहतरीन और व्यापक ग्राउंड रिपोर्टिंग.

अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट: रांची के जेएससीए (JSCA) स्टेडियम में आयोजित कई इंटरनेशनल क्रिकेट मैचों को करीब से कवर किया.

पुरुष हॉकी वर्ल्ड कप (2018): भुवनेश्वर में आयोजित वर्ल्ड कप के फाइनल मुकाबले की शानदार स्पोर्ट्स रिपोर्टिंग.

पंचायतनामा: प्रभात खबर के इस खास विंग के लिए ग्रामीण इलाकों का दौरा कर कई प्रेरक 'सक्सेस स्टोरीज' लिखीं.

शैक्षणिक योग्यता (Education & Credentials)

UGC NET: साल 2019 में यूजीसी नेट (UGC NET) की परीक्षा उत्तीर्ण की.

बैचलर ऑफ जर्नलिज्म (BJMC): रांची विश्वविद्यालय से साल 2011 में पत्रकारिता में स्नातक की डिग्री हासिल की.

एम.ए. (नागपुरी भाषा): रांची विश्वविद्यालय के 'जनजातीय एवं क्षेत्रीय भाषा विभाग' से साल 2009 में नागपुरी भाषा में स्नातकोत्तर (MA) की डिग्री हासिल की.

लेखन शैली और विशेषज्ञता: एक्सप्लेनर, रिसर्च बेस्ड स्टोरीज, स्पोर्ट्स जर्नलिज्म, इंटरनेशनल अफेयर्स और झारखंड की लोक-संस्कृति.

Read More
ePaper

अपने दैनिक समाचार अनुभव को और बेहतरीन बनाएं

सिर्फ ₹399 ₹149

एक साल के लिए

आज ही सब्सक्राइब करें

संबंधित खबरें >

यह भी पढ़ें >