मध्य प्रदेश के कटनी में एयर होस्टेस से पुलिस अधिकारी बनीं नेहा पच्चीसिया इन दिनों गंभीर आरोपों को लेकर जांच के घेरे में हैं. हत्या के एक मामले की जांच में लापरवाही, आरोपी को तय समय में चार्जशीट से राहत मिलने और उसके परिवार की जमीन कथित दबाव में बेहद कम कीमत पर बिकवाने के आरोपों के बाद उनके खिलाफ FIR दर्ज हो चुकी है. अब इस पूरे मामले की जांच के लिए SIT गठित की गई है. ताजा रिपोर्टों के मुताबिक नेहा पच्चीसिया फिलहाल फरार बताई जा रही हैं.
हत्या के आरोपी को 90 दिन में नहीं मिली चार्जशीट
मामला कटनी के कुठला थाना क्षेत्र में युवक झब्बू कोल की हत्या से जुड़ा है. इस केस में रमेश लोधी आरोपी बनाया गया था. कटनी एसपी के मुताबिक आरोप है कि रमेश लोधी की गिरफ्तारी में देरी हुई और तय 90 दिनों के भीतर उसके खिलाफ चार्जशीट दाखिल नहीं की गई. इसके बाद उसे जुलाई के पहले सप्ताह में डिफॉल्ट बेल मिल गई। इसी घटनाक्रम ने पुलिस की जांच और भूमिका पर सवाल खड़े किए.
जमीन की कीमत और रजिस्ट्री में बड़ा अंतर
इसके बाद मामला जमीन के सौदे तक पहुंचा. शिकायत और विभागीय जांच के मुताबिक कटनी के कन्हवारा गांव में खसरा नंबर 2618/1 की जमीन की सरकारी गाइडलाइन कीमत करीब ₹82.86 लाख थी. वहीं जांच में जमीन की बाजार कीमत करीब ₹2 करोड़ तक बताई गई, आरोप है कि इस जमीन की रजिस्ट्री महज ₹18.20 लाख में मारूफ अहमद हनफी के नाम कराई गई. दस्तावेजों में करीब ₹15 लाख चेक और ₹3.20 लाख नकद भुगतान दिखाया गया है.
परिवार पर दबाव बनाने का आरोप
शिकायतकर्ता पक्ष का आरोप है कि पुलिस के प्रभाव और दबाव का इस्तेमाल कर रमेश लोधी और उसके परिवार को जमीन बेचने के लिए मजबूर किया गया. कुछ रिपोर्टों में जमीन का सौदा करीब ₹1.07 करोड़ में होने का दावा भी सामने आया है, लेकिन रजिस्ट्री के दस्तावेजों में रकम इससे काफी कम दिखाई गई. इन दावों की वास्तविकता अब आपराधिक जांच में तय होगी.
नेहा समेत तीन लोगों पर FIR
पुलिस ने 19 अगस्त को कुठला थाने में नेहा पच्चीसिया समेत क्षितिज राज बारापात्रे और मारूफ अहमद के खिलाफ FIR दर्ज की। मामले में BNS की संबंधित धाराओं के तहत कार्रवाई की गई है. FIR के बाद मुख्यमंत्री मोहन यादव के निर्देश पर नेहा पच्चीसिया को निलंबित कर दिया गया.
अब SIT करेगी पूरे मामले की जांच
मध्य प्रदेश पुलिस ने जमीन सौदे और हत्या के मामले में कथित भूमिका की जांच के लिए विशेष जांच दल यानी SIT बनाई है. जांच में जमीन की रजिस्ट्री, बैंक खातों से हुए लेनदेन, कथित दबाव, पुलिस कार्रवाई और चार्जशीट में हुई देरी समेत कई पहलुओं को खंगाला जा रहा है, रिपोर्ट के मुताबिक जमीन की खरीद से जुड़े कुछ एजेंट भी जांच के दायरे में हैं.
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