एम्स (AIIMS) और सफदरजंग अस्पताल के रेजिडेंट डॉक्टरों के संगठन (RDA) ने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू से सोनम वांगचुक से जुड़े मामले में हस्तक्षेप करने और जंतर-मंतर पर हुई घटनाओं की स्वतंत्र जांच कराने की मांग की है. दोनों अस्पतालों के संगठन ने राष्ट्रपति को दिए ज्ञापन में कहा कि मीडिया रिपोर्ट्स में दावा किया गया है कि सोनम वांगचुक को अपनी इच्छा के बावजूद अस्पताल छोड़ने की अनुमति नहीं दी गई. यदि यह सच है, तो यह मरीज की स्वतंत्रता, उसकी सहमति और संवैधानिक अधिकारों से जुड़ा गंभीर मामला है.
अस्पताल किसी को हिरासत में रखने की जगह नहीं
सफदरजंग अस्पताल के डॉक्टरों ने राष्ट्रपति को सौंपे गए ज्ञापन में कहा है कि अस्पताल इलाज और देखभाल की जगह होते हैं, किसी को हिरासत में रखने की नहीं. किसी मरीज पर ऐसी पाबंदियां केवल उन्हीं मामलों में लगाई जा सकती हैं, जिनकी कानून अनुमति देता हो. डॉक्टरों ने यह भी मांग की कि जंतर-मंतर पर हुई घटनाओं की निष्पक्ष जांच कराई जाए. उनका कहना है कि वांगचुक को वहां से जबरन सफदरजंग अस्पताल लाया गया था. डॉक्टरों ने अस्पताल में उन्हें लगातार भर्ती रखे जाने पर भी चिंता जताई है.
हर मरीज के साथ सम्मानजनक व्यवहार को
डाॅक्टर्स एसोसिएशन ने कहा है कि किसी मरीज को अस्पताल में रखना है या नहीं, इसका फैसला डॉक्टरों की जांच और सलाह पर आधारित होना चाहिए. हर मरीज के साथ सम्मानजनक और संवेदनशील व्यवहार होना चाहिए और उसका इलाज चिकित्सा नैतिकता तथा संविधान के अनुसार होना चाहिए. सफदरजंग अस्पताल के डॉक्टरों ने अस्पताल में की गई कड़ी सुरक्षा व्यवस्था पर भी सवाल उठाए हैं. उनका कहना है कि मीडिया रिपोर्ट्स और वीडियो के अनुसार अस्पताल के कुछ हिस्सों में लोगों की आवाजाही सीमित कर दी गई थी, कुछ क्षेत्रों को बंद कर दिया गया था और बड़ी संख्या में सुरक्षाकर्मी तैनात किए गए थे, जिससे अस्पताल के सामान्य कामकाज पर असर पड़ा.
शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे छात्रों पर लाठीचार्ज अनुचित
एम्स के रेजिडेंट डॉक्टरों के संगठन ने भी राष्ट्रपति को पत्र लिखकर जंतर-मंतर पर हुई घटनाओं की स्वतंत्र और समयबद्ध जांच की मांग की है. संगठन ने कहा कि शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे छात्रों, डॉक्टरों और अन्य लोगों के खिलाफ लाठीचार्ज, आंसू गैस और बल प्रयोग की खबरें चिंताजनक हैं. डॉक्टरों के संगठन का कहना है कि घटना के कुछ पहलुओं को लेकर अलग-अलग दावे हैं, लेकिन सामने आए वीडियो और प्रत्यक्षदर्शियों के बयान इस बात पर गंभीर सवाल खड़े करते हैं.
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