Acid Attack Case: चीफ जस्टिस सूर्यकांत, जस्टिस आर महादेवन और जस्टिस जॉयमाल्य बागची की पीठ ने राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों से कहा कि वे तेजाब हमले के उन मामलों की जानकारी दें जिनमें अधीनस्थ अदालतों में आरोपपत्र दाखिल किए गए हैं.
सुप्रीम कोर्ट ने राज्य सरकारों को दिया चार हफ्ते का समय
सुप्रीम कोर्ट ने सभी राज्य सरकारों और हाई कोर्ट्स को एसिड अटैक मामलों में पेंडिंग ट्रायल्स की स्थिति के बारे में जानकारी देने के लिए चार हफ्ते का समय दिया है. भारत के चीफ जस्टिस सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली बेंच ने ऐसे मामलों में आरोपियों के खिलाफ नए दंडात्मक उपायों की जरूरत पर भी जोर दिया.
आरोपी के लिए कार्रवाई बहुत दर्दनाक होना चाहिए : कोर्ट
कोर्ट ने यह भी कहा कि जिन मामलों में आरोपी पीड़ित को मुआवजा देने में असमर्थ है, वहां अधिकारी ऐसे उपाय करें जिससे आरोपी की सभी संपत्तियों को जब्त करके नीलाम किया जाए और उससे मिलने वाले पैसे से पीड़ित/विक्टिम को मुआवजा दिया जाए. कोर्ट ने कहा, कानून के दायरे से बाहर कुछ असाधारण दंडात्मक उपायों की जरूरत है. आरोपी के लिए कार्रवाई बहुत दर्दनाक होनी चाहिए. केंद्र सरकार को यह देखना चाहिए कि क्या पीड़ितों की मदद के लिए कोई खास फोरम होना चाहिए.
शाहीन मलिक की जनहित याचिका पर सुनवाई कर रहा सुप्रीम कोर्ट
पीठ शाहीन मलिक की जनहित याचिका पर सुनवाई कर रही थी, जो खुद तेजाब हमले की शिकार हैं. मलिक कानून के तहत दिव्यांग लोगों की परिभाषा को व्यापक करने की मांग कर रही हैं ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि जिन पीड़ितों के अंदरूनी अंगों को जबरदस्ती तेजाब पिलाने से जानलेवा नुकसान हुआ है, उन्हें पर्याप्त मुआवजा और चिकित्सा देखभाल समेत अन्य राहत मिलें.
