राघव चड्ढा ने चलाया ‘झाड़ू’, राज्यसभा में केजरीवाल की 'आप’ हो गयी ‘साफ’! 10 में 7 सांसदों ने पार्टी छोड़ी

Aam Aadmi Party: आम आदमी पार्टी (Aam Aadmi Party) को शुक्रवार (14 अप्रैल)को बड़ा झटका लगा. पार्टी के सात राज्यसभा सांसद AAP छोड़कर बीजेपी में शामिल हो गये हैं. दिल्ली चुनाव हार में मिली करारी हार के बाद पहली बार पार्टी में असंतोष बढ़ा और टूट की स्थिति सामने आई. 14 साल पुरानी AAP फिलहाल सबसे ज्यादा कठिनाइयों का सामना कर रही है.

Aam Aadmi Party: दिल्ली में सत्ता गंवाने के बमुश्किल एक साल बाद आम आदमी पार्टी (Aam Aadmi Party) को शुक्रवार (24 अप्रैल) को बड़ा राजनीतिक झटका लगा, जब उसके सात राज्यसभा सदस्यों ने पार्टी से इस्तीफा दे दिया और भारतीय जनता पार्टी (BJP) में शामिल हो गये. पार्टी छोड़ने वालों में प्रमुख नाम राज्यसभा सांसद राघव चड्ढा (Raghav Chadha), संदीप पाठक, पूर्व क्रिकेटर हरभजन सिंह, स्वाति मालीवाल, अशोक मित्तल, राजेंद्र गुप्ता और विक्रम साहनी शामिल हैं.

राज्यसभा से ‘आप’ हो गयी ‘साफ’!

राघव चड्ढा ने संदीप पाठक और अशोक मित्तल के साथ प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि आम आदमी पार्टी के राज्यसभा सांसदों में से दो-तिहाई ने पार्टी छोड़ दी है और वे एक समूह के रूप में भाजपा में शामिल हो रहे हैं. उन्होंने कहा कि यह निर्णय पार्टी के भीतर बढ़ते असंतोष और दिशा परिवर्तन के कारण लिया गया है. संसद में अब पार्टी के छह सदस्य रह गए हैं, जिनमें से तीन लोकसभा में और तीन राज्यसभा में हैं.

क्यों AAP सांसदों ने छोड़ दी पार्टी

स्वाती मालीवाल (2024 में राज्यसभा के लिए चुनी गई थीं) ने मई 2024 में पार्टी नेतृत्व पर गंभीर आरोप लगाते हुए आलोचना शुरू की थी. वहीं संदीप पाठक, जिन्होंने कैम्ब्रिज, ऑक्सफोर्ड और एमआईटी जैसी संस्थाओं में शिक्षा प्राप्त की, 2022 में AAP से जुड़े थे और बाद में पार्टी संगठन में अहम जिम्मेदारी संभाली. पूर्व क्रिकेटर हरभजन सिंह, उद्योगपति अशोक मित्तल, पद्मश्री सम्मानित राजेंद्र गुप्ता और विक्रम साहनी भी 2022 और 2025 के बीच पार्टी से जुड़े थे, लेकिन अब सभी ने एक साथ पार्टी छोड़ दिया है.

दिल्ली चुनाव के बाद बढ़ी मुश्किलें

पांच फरवरी 2025 को हुए दिल्ली विधानसभा चुनाव में AAP को करारी हार का सामना करना पड़ा था. भारतीय जनता पार्टी ने 70 में से 48 सीटें जीतकर 26 साल बाद राष्ट्रीय राजधानी की सत्ता में वापसी की थी, जबकि AAP को केवल 22 सीटें मिली थीं. इस चुनावी हार के बाद से ही पार्टी के भीतर असंतोष की खबरें लगातार सामने आ रही थीं, जो अब बड़े पैमाने पर टूट के रूप में सामने आई हैं.

बीजेपी के हुए राघव चड्ढा

राघव चड्ढा ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में दावा किया था कि वो आप छोड़कर बीजेपी का दामन थामेंगे. इसके कुछ घंटे के भीतर उन्होंने बीजेपी कार्यालय जाकर पार्टी की सदस्यता ले ली. इस घटनाक्रम को दिल्ली की राजनीति में बड़े बदलाव के रूप में देखा जा रहा है, जिसने आम आदमी पार्टी की भविष्य की रणनीति पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं.

बस यह देखना है कि केजरीवाल कब बीजेपी में होते हैं शामिल- बघेल

राजनीतिक गहमा गहमी के बीच कांग्रेस ने AAP सुप्रीमो केजरीवाल पर कड़ा कटाक्ष किया है. कांग्रेस महासचिव भूपेश बघेल ने आम आदमी पार्टी के सात राज्यसभा सदस्यों के दल-बदल कर बीजेपी के साथ जाने को लेकर कटाक्ष किया कि आप और भाजपा में कोई अंतर नहीं है और बस अब यह देखना है कि अरविंद केजरीवाल कब भाजपा में शामिल होते हैं. पार्टी के पंजाब प्रभारी बघेल ने अन्ना हजारे आंदोलन का जिक्र करते हुए सोशल मीडिया एक्स पर पोस्ट किया- केजरीवाल विवेकानंद फाउंडेशन में बैठने वाले लोग हैं. उनके साथ बाबा रामदेव भी बैठे और भी लोग थे जिन्होंने आंदोलन की शुरूआत की. आम आदमी पार्टी वहीं से निकली है और ये भाजपा की बी टीम है.

स्थापना के 14 साल बाद AAP को सबसे बड़ा झटका

करीब 14 साल पहले क्रांतिकारी बदलावों के दावे के साथ भ्रष्टाचार विरोधी आंदोलन से उपजी आम आदमी पार्टी के लिए मौजूदा समय गंभीर संकट पैदा कर रहा है. पार्टी के 10 में से सात राज्यसभा सदस्यों ने भाजपा का दामन थाम लिया है. आप के करीब दो-तिहाई राज्यसभा सदस्यों के इस दल-बदल ने पार्टी की आंतरिक एकता पर सवाल खड़े कर दिए हैं. आम आदमी पार्टी को इतना बड़ा झटका ऐसे समय में लगा है. जब पार्टी 2027 में गुजरात, गोवा और पंजाब में चुनावी मुकाबले के लिए कमर कस रही है.

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लेखक के बारे में

By Pritish Sahay

12 वर्षों से टीवी पत्रकारिता और डिजिटल मीडिया में सेवाएं दे रहा हूं. रांची विश्वविद्यालय के पत्रकारिता विभाग से पढ़ाई की है. राजनीतिक, अंतरराष्ट्रीय विषयों के साथ-साथ विज्ञान और ब्रह्मांड विषयों पर रुचि है. बीते छह वर्षों से प्रभात खबर.कॉम के लिए काम कर रहा हूं. इलेक्ट्रॉनिक मीडिया में काम करने के बाद डिजिटल जर्नलिज्म का अनुभव काफी अच्छा रहा है.

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