‘सामना’ ने संपादकीय में लिखा : मुंबई शिवसेना की थी और शिवसेना की ही रहेगी

मुंबई : महाराष्ट्र में सहयोगी दल भाजपा के खिलाफ आक्षेपों को जारी रखते हुए शिवसेना ने आज कहा कि यह बात कोई मायने नहीं रखती कि मुंबई में किस दल के ज्यादा निर्वाचित प्रतिनिधि हैं क्योंकि मुंबई शिवसेना की थी और शिवसेना की ही रहेगी. शिवसेना के मुखपत्र ‘सामना’ के संपादकीय में कहा गया, ‘‘वे […]

मुंबई : महाराष्ट्र में सहयोगी दल भाजपा के खिलाफ आक्षेपों को जारी रखते हुए शिवसेना ने आज कहा कि यह बात कोई मायने नहीं रखती कि मुंबई में किस दल के ज्यादा निर्वाचित प्रतिनिधि हैं क्योंकि मुंबई शिवसेना की थी और शिवसेना की ही रहेगी.

शिवसेना के मुखपत्र ‘सामना’ के संपादकीय में कहा गया, ‘‘वे (भाजपा) कहते हैं कि मुंबई में उनके ज्यादा निर्वाचित प्रतिनिधि हैं, इसलिए शहर उनका है. मराठी भाषी लोगों ने शहर के लिए संघर्ष किया है और उन्होंने इस संघर्ष को जीता है. ये लोग शिवसेना के पीछे दृढता के साथ खडे हैं.’’

संपादकीय में कहा गया, ‘‘इसलिए यह समझना आसान है कि यह शहर उन लोगों का होगा, जिसके पीछे जनता दृढता के साथ खडी है.’’ इसमें कहा गया कि मुंबई तब भी शिवसेना की ही थी, जब उसके पास शहर में एक भी निर्वाचित प्रतिनिधि नहीं था. इस समय ग्रेटर मुंबई की 36 विधानसभा सीटों में शिवसेना के 14 विधायक हैं जबकि भाजपा के विधायकों की संख्या 15 है.

संपादकीय में कहा गया, ‘‘अगर मुंबई में शिवसेना न होती, तो इसे कब का केंद्र शासित बना दिया गया होता। इस बात से तो हमारे राजनीतिक प्रतिद्वंद्वी भी सहमत होंगे.’’ संपादकीय में यह आरोप लगाया गया कि निहित स्वार्थों के चलते सरकारी दफ्तरों, व्यापार और उद्योगों को मुंबई से बाहर स्थानांतरित करने की कोशिश की जा रही है. इसके साथ ही शिवसेना ने जोर देकर कहा कि जब तक शिवसेना मुंबईकरों के साथ है, तब तक कोई भी मुंबई को शेष महाराष्ट्र से अलग करने में सफल नहीं हो पाएगा.

इससे पहले बुधवार को पेश किए गए राज्य सरकार के बजट में मुंबई के लिए धन के आवंटन के मुद्दे पर शिवसेना और भाजपा के बीच तकरार देखने को मिली थी. शिवसेना ने कहा था कि मुंबई को ‘नजरअंदाज’ किया गया है और इसे पर्याप्त धन आवंटित नहीं किया गया. भाजपा ने तुरंत पलटवार करते हुए कहा था कि इस तरह की टिप्पणियां गठबंधन के कनिष्ठ सहयोगी की ‘अज्ञानता’ को दर्शाती हैं. भाजपा ने दावा किया कि शिवसेना वित्तीय राजधानी का संपर्क शेष राज्य से तोड देना चाहती है.

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