अपनी शिकायत के लिये फेसबुक पर टिप्पणी करना अपराध नहीं : कोर्ट
नयी दिल्ली : उच्चतम न्यायालय ने व्यवस्था दी है कि सोशल नेटवर्किंग साइट्स पर जनता की मदद हेतु कानून व्यवस्था लागू करने वाली एजेन्सियों के पेज पर अपनी शिकायत के लिये टिप्पणी करना अपराध नहीं है. न्यायमूर्ति वी गोपाल गौडा और न्यायमूर्ति आर बानुमति की खंडपीठ ने इस व्यवस्था के साथ ही बेंगलुरु के एक […]
By Prabhat Khabar Digital Desk | Updated at :
नयी दिल्ली : उच्चतम न्यायालय ने व्यवस्था दी है कि सोशल नेटवर्किंग साइट्स पर जनता की मदद हेतु कानून व्यवस्था लागू करने वाली एजेन्सियों के पेज पर अपनी शिकायत के लिये टिप्पणी करना अपराध नहीं है. न्यायमूर्ति वी गोपाल गौडा और न्यायमूर्ति आर बानुमति की खंडपीठ ने इस व्यवस्था के साथ ही बेंगलुरु के एक दंपति को राहत प्रदान की. इस दंपति ने एक पुलिस अधिकारी के दुव्यर्वहार के बारे में फेसबुक पर बेंगलुरु यातायात पुलिस के पेज पर अपनी शिकायत की थी. पुलिस ने इसी आधार पर दंपति के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की थी.
न्यायालय ने कहा कि यातायात पुलिस ने फेसबुक पर जनता के लिये ही पेज बनाया था. न्यायालय ने कहा कि हमारी सुविचारित राय है कि इस दंपति ने यह सोच कर आन लाइन टिप्पणी की कि उनका यह कृत्य स्वीकृति सीमा के भीतर ही है. न्यायालय ने इसके साथ ही कर्नाटक उच्च न्यायालय का फैसला निरस्त कर दिया. उच्च न्यायालय ने इस दंपति के खिलाफ दर्ज प्राथमिकी निरस्त करने की उनकी याचिका खारिज कर दी थी.
इस मामले में माणिक तनेज और उनकी पत्नी साक्षी जावा से 13 जून 2013 को एक सडक दुर्घटना हो गयी थी जिसमें आटो रिक्शा में जा रहा एक व्यक्ति जख्मी हो गया था. इस व्यक्ति को अस्पताल में भर्ती कराया गया था और मामला परस्पर सहमति से सुलझा लिया गया था. लेकिन दुर्घटनास्थल के पास ही मौजूद एक सिपाही ने दंपति को अपने वरिष्ठ अधिकारी से मिलने का निर्देश दिया. यह दंपति जब इस अधिकारी से मिलने गये तो उन्होंने उनके साथ दुर्व्यवहार किया और धमकी दी.
इस अधिकारी के आचरण से आहत दंपति ने इस संबंध में बेंगलुरु यातायात पुलिस के फेसबुक पेज पर अपनी टिप्पणी पोस्ट की और इस घटना के बारे में ई मेल भी भेजी. पुलिस निरीक्षक ने बाद में फेसबुक पर टिप्पणी करने के मामले में शिकायत की और बाद में इस अपराध के लिये दंपति के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कर ली गयी थी.