Nirbhaya Case: 'भगवान भी कहे तो भी दोषियों को माफ नहीं करूंगी', न्याय के लिए वर्षों लड़ती रही मां, कई बार रोई और...

Nirbhaya Case: दिसंबर 2012 में राष्ट्रीय राजधानी में चलती बस में 23 साल की पैरामेडिकल की छात्रा के साथ सामूहिक दुष्कर्म किया गया था. अब शुक्रवार सुबह दोषियों को फांसी पर लटका दिया जाएगा. निर्भया की मां वर्षों न्याय के कोर्ट के चक्कर लगातीं रहीं.

Nirbhaya Case: निर्भया गैंगरेप के दोषियों को शुक्रवार सुबह 5:30 बजे फांसी पर लटकाने की तैयारी पूरी कर ली गयी है. पवन जल्लाद तिहाड़ जेल दो दिन पहले ही पहुंच चुका है और उसने यहां डमी को फांसी देकर अभ्‍यास भी कर लिया है. इसी बीच सुप्रीम कोर्ट ने निर्भया गैंगरेप के दोषी पवन की क्यूरेटिव पिटिशन गुरुवार खारिज कर दी है जो फांसी टालने की आखिरी कोशिश थी. दोषियों को फांसी के फंदे तक पहुंचाने में एक महिला का रोल बहुत ही महत्वपूर्ण रहा है. जी हां , हम जिस महिला की बात कर रहे हैं वह है निर्भया की मां…

आज सुप्रीम कोर्ट का फैसला आने के बाद निर्भया की मां ने कहा कि कल चारों को फांसी होगी और जरूरी होगी. उन्होंने कहा कि कोर्ट ने वारदात के वक्त पवन के नाबालिग होने की दलील को ठुकरा दिया है. पवन का आखिरी दांव फी फेल हुआ. फांसी बार-बार इसलिए टल रही थी, क्योंकि इनकी दया याचिका शेष बची हुई थी. हमारी अदालतों को भी इनकी हकीकत की जानकारी है. ये अब फांसी पर लटकेंगे. शुक्रवार को निर्भया को इंसाफ मिलेगा और जरूर मिलेगा.

कई बार आहत हुई मां

यूं तो दोषियों की चाल से कई बार निर्भया की मां आहत हुई, लेकिन उन्हें उस वक्त ज्यादा ठेस लगी जब सुप्रीम कोर्ट की वकील इंदिरा जयसिंह ने उनसे दोषियों को माफी देने की बात कही…इसपर निर्भया की मां आशा देवी ने कहा था कि भगवान भी कहे तो भी माफ नहीं करूंगी. उनकी इस भावना के पीछे जरूर ही उनकी बेटी की वो चीखें होंगी जिसमें सिर्फ और सिर्फ एक ही बात थी कि दरिंदों को सजा दिलाना…

तब एक साल चक्कर लगाती रही मां…

निर्भया की मां वर्षों से कोर्ट का चक्कर लगा रहीं हैं. उन्हें इंतजार है तो बस दोषियों की फांसी का. नवंबर 2019 में एक खबर आयी कि निर्भया की मां पिछले एक साल से दोषियों को फांसी दिलाने की मांग को लेकर दिल्ली की पटियाला हाउस कोर्ट के चक्कर काट रहीं हैं. इस खबर ने मीडिया में सुर्खियां बटोरी थी. कोर्ट में चक्कर लगाते हुए उनकी आंखें कई बार नम नजर आयी. वह इंसाफ की आस में कोर्ट पहुंच रहीं थीं, लेकिन उस वक्त वह फूट-फूटकर रोने लगीं थीं, जब कोर्ट ने दोषियों के खिलाफ डेथ वारंट जारी करने से इनकार कर दिया था. दरअसल, निर्भया कांड के चार दोषियों में से एक ने राष्ट्रपति के पास दया याचिका दायर की थी और अन्य तीन दोषियों ने उस वक्त तक राष्ट्रपति के पास दया याचिका दायर नहीं की थी, जिसपर कोर्ट ने कहा था कि जब तक दया याचिका पर कोई फैसला नहीं हो जाता, तब तक दोषियों के खिलाफ डेथ वॉरंट जारी नहीं किया जा सकता है.

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Author: Amitabh Kumar

Published by: Prabhat Khabar

अमिताभ कुमार झारखंड की राजधानी रांची के रहने वाले हैं और पिछले कई वर्षों से पत्रकारिता की दुनिया में सक्रिय हैं. डिजिटल न्यूज में अच्छी पकड़ है और तेजी के साथ सटीक व भरोसेमंद खबरें लिखने के लिए जाने जाते हैं. वर्तमान में अमिताभ प्रभात खबर डिजिटल में नेशनल और वर्ल्ड न्यूज पर फोकस करते हैं और तथ्यों पर आधारित खबरों को प्राथमिकता देते हैं. हरे-भरे झारखंड की मिट्टी से जुड़े अमिताभ ने अपनी शुरुआती पढ़ाई जिला स्कूल रांची से पूरी की और फिर Ranchi University से ग्रेजुएशन के साथ पत्रकारिता की पढ़ाई की. पढ़ाई के दौरान ही साल 2011 में रांची में आयोजित नेशनल गेम को कवर करने का मौका मिला, जिसने पत्रकारिता के प्रति जुनून को और मजबूत किया.1 अप्रैल 2011 से प्रभात खबर से जुड़े और शुरुआत से ही डिजिटल पत्रकारिता में सक्रिय रहे. खबरों को आसान, रोचक और आम लोगों की भाषा में पेश करना इनकी खासियत है. डिजिटल के साथ-साथ प्रिंट के लिए भी कई अहम रिपोर्ट कीं. खासकर ‘पंचायतनामा’ के लिए गांवों में जाकर की गई ग्रामीण रिपोर्टिंग करियर का यादगार अनुभव है. प्रभात खबर से जुड़ने के बाद कई बड़े चुनाव कवर करने का अनुभव मिला. 2014, 2019 और 2024 के लोकसभा चुनाव के साथ-साथ झारखंड विधानसभा चुनावों (2014, 2019 और 2024) की भी ग्राउंड रिपोर्टिंग की है. चुनावी माहौल, जनता के मुद्दे और राजनीतिक हलचल को करीब से समझना रिपोर्टिंग की खास पहचान रही है.

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