नयी दिल्ली: देश के अग्रणी इस्लामिक संगठन जमीयत उलमा-ए-हिन्द ने कश्मीर मसले को लेकर बयान जारी किया है. दिल्ली में परिषद् की बैठक में संगठन के सदस्यों ने अपने संकल्प को दोहराया कि कश्मीर भारत का अभिन्न हिस्सा है और कश्मीरी हमारे हमवतन हैं. उन्होंने कहा कि कोई भी अलगाववादी आंदोलन न केवल देश के लिए बल्कि कश्मीर के लिए भी हानिकारक है.
जमीयत उलमा-ए-हिन्द ने कहा कि कश्मीरी के लोगों के लोकतांत्रिक और मानव अधिकारों की रक्षा करना हमारा राष्ट्रीय कर्तव्य है. लेकिन फिर भी हमारा दृढ़ विश्वास है कि उनका कल्याण भारत के साथ आने में ही है. इन्होंने कहा कि कुछ अलगाववादी ताकतें और पड़ोसी देश कश्मीर को नष्ट करने पर तुले हुए हैं.
साल 1919 में हुई थी संगठन की स्थापना
बता दें कि जमीयत उलमा-ए-हिन्द हिन्दुस्तान में शीर्ष इस्लामिक संगठन है जिसकी स्थापना साल 1919 में की गई थी. इसकी स्थापना शेख उल हिन्द मौलाना महमूद अल-हसन ने किया था. तब से ही ये संगठन द्विराष्ट्र सिद्धांत की अवधारणा का विरोध और एकीकृत हिन्दुस्तान की वकालत करता आया है.
आतंकियों की घुसपैठ की कोशिश
उल्लेखनीय है कि बीते पांच अगस्त को केंद्र सरकार ने जम्मू कश्मीर को अलग ध्वज और संविधान की सुविधा देने वाले अनुच्छेद 370 को हटा दिया था. उसके बाद से घाटी में कई इलाकों में मोबाइल-इंटरनेट सेवाओं कों बंद कर दिया गया है. इस बीच खबर आती रही कि पाकिस्तान लगातार वहां अशांति फैलाने के उद्देश्य से अलगाववादी तत्वों को समर्थन देने के लिए आतंकियों की घुसपैठ कराने की कोशिश कर रहा है.
पाक गृहमंत्री का बड़ा कबूलनामा
पाकिस्तान अतंर्राष्ट्रीय मंचो पर भी भारत पर ये आरोप लगाता आ रहा है कि वहां की सरकार ने मनमाने तरीके से अनुच्छेद 370 हटाया और वहां मानवाधिकारों का उल्लंघन कर रही है. हालांकि किसी भी देश से उसका समर्थन नहीं किया है. हाल ही में एक इंटरव्यू के दौरान पाकिस्तान के गृहमंत्री एजाज अहमद शाह ने कहा कि कोई भी हम पर भरोसा नहीं कर रहा है. पाकिस्तान की छवि एक गैर जिम्मेदार राष्ट्र की बन गई है.
