दिल्ली : 94,000 करोड़ के कर्ज में दबी आइएल एंड एफएस के 30 स्वतंत्र और पूर्व निदेशकों और दो ऑडिटर्स बीएसआर एंड को और डेलाओट हस्कीन एंड सेल्स के खिलाफ अपराधिक षडयंत्र का आरोप लगाया है. गंभीर धोखाधड़ी और जांच विभाग (एसएफआइओ) ने गुरुवार को दायर अपनी पहली चार्जशीट में यह आरोप लगाया है.
इंफ्रास्ट्रक्चर लीजिंग एंड फाइनेंशिएल सर्विसेज (आइएल एंड एफस) में धोखाधड़ी का पता तब चला जब सितंबर 2018 में ग्रुप की कंपनियां अपने कर्ज के भुगतान में चूक करने लगीं. लोन की किश्त चुकाने में असमर्थता जताने लगीं. इसके बाद सरकार ने आइएल एंड एफएस के बोर्ड को भंग कर उदय कोटक के नेतृत्व में नया बोर्ड गठित किया.
कंपनी डूबती रही, निदेशक नौकरी बचाते रहे
आइएल एफएस और आइएफ आइएन के निदेशक हरिशंकरन और रमेश बावा को कंपनीज एक्ट, धोखाधड़ी और षडयंत्र का आरोपी बताया गया है. एसएफआइओ ने अपनी चार्जशीट में आरोप लगाया है कि यह निदेशक कंपनी के संकट से परिचित थे, लेकिन कोई कदम उठाने के बजाय नौकरी सुरक्षित करने में लगे रहे.
आइएफआइएन के बहुत से कर्जदार कर्ज लेने के बाद लोन की किश्त नहीं चुका रहे थे. कंपनी का टॉप मैनेजमेंट कर्ज नहीं चुकाने वाले खातों के बारे में जानता था. प्रबंधन को मैनेजमेंट इंफोर्मेंशन सिस्टम के तहत मासिक रिपोर्ट मिल रही थी लेकिन इसके बाद भी उन्होंने कुछ नहीं किया. कर्जदारों के एसेट्स को एनपीए नहीं घोषित किया. कर्ज में डूबे कर्जदारों को ग्रुप की दूसरी सब्सिडियरी उनका रिकॉर्ड देखे बिना कर्ज बांट रही थीं.
ऑडिटर्स
चार्जशीट में ऑडिटर्स बीएसआर और डेलॉयट हस्कीन एंड सेल्स को दोषी बताया. उन्होंने खातों की गलत जानकारी को छिपाया और खतरे से आगाह नहीं किया.
