शिमला : हिमाचल प्रदेश के कल्पा के रहने वाले 102 साल के श्याम सरन नेगी मतदान के लिए तैयार हैं. नेगी ने अपना पहला वोट 1951 में दिया था अब 2019 में एक बार फिर नेगी मतदान के लिए तैयार हैं. किन्नौर के डीसी ने कहा, हमने पूरी व्यवस्था कर ली है. हम उन्हें सुरक्षित तरीके से पोलिंग बूथ तक ले जायेंगे और वोट दिलाने में पूरी मदद करेंगे.
शिमला से लगभग 280 किमी की दूर पर किन्नौर जिला है जहां श्याम सरन नेगीर हते हैं. नेगी मतदान केलिए उत्साहित है. स्वतंत्र भारत के पहले मतदाता के तौर पर मशहूर नेगी को भारतीय लोकतंत्र का लीविंग लीजेंड भी कहा जाता है. उन्हें 19 मई का इंतजार है, जब किन्नौर सहित हिमाचल प्रदेश में चुनाव होना है. किन्नौर, मंडी संसदीय क्षेत्र का हिस्सा है. नेगी की लोकप्रियता के चलते उनके गांव कल्पा भी अब पर्यटन केंद्र बन गया है. राज्य सरकार ने इस गांव के लिए कई योजनाएं शुरू की और उसे विरासत वाला गांव घोषित किया है.नेगी को 15 हज़ार रुपये का पेंशन मिलती है, हालांकि उनका अंतिम वेतन 700 रुपये प्रति महीने था.
चुनाव आयोग ने नेगी का पता कैसे लगाया, इस बारे में 2007 में मुख्य चुनाव अधिकारी (सीईओ) रहीं मनीषा नंदा इसके बारे में दिलचस्प कहानी बताती हैं. वह कहती हैं, "मैंने किन्नौर में फ़ोटो मतदाता सूची बनाने का काम 2007 में पायलट प्रोजेक्ट के तौर पर शुरू किया था. तब श्याम सरन नेगी की छोटी सी तस्वीर पर मेरी नज़र ठहर गई थी. उनकी उम्र 90-91 साल लिखी हुई थी. मैंने फ़ोन उठाया और तब कि किन्नौर की डीसी सुधा देवी को इस बुजुर्ग से मिलने और उनका इंटरव्यू करने को कहा, इसके बाद हमें पता चला कि उन्होंने अपना पहला वोट 1951 में दिया था.
