जब चिलचिलाती धूप में अटल बिहारी वाजपेयी ने भरा था जोश

पूर्व प्रधानमंत्री दिवंगत अटल बिहारी वाजपेयी देश के ऐसे नेता थे, जिनसे दूसरे नेता और दलों के कार्यकर्ता भी प्रेरणा लेते थे. बात 1990 की है. अटल बिहारी वाजपेयी ने 1991 के लोकसभा चुनाव से पहले अप्रैल, 1990 में मैनपुरी में एक जनसभा की थी. धूप काफी तीखी होने लगी थी. गर्मी से सभा में […]

पूर्व प्रधानमंत्री दिवंगत अटल बिहारी वाजपेयी देश के ऐसे नेता थे, जिनसे दूसरे नेता और दलों के कार्यकर्ता भी प्रेरणा लेते थे. बात 1990 की है. अटल बिहारी वाजपेयी ने 1991 के लोकसभा चुनाव से पहले अप्रैल, 1990 में मैनपुरी में एक जनसभा की थी. धूप काफी तीखी होने लगी थी.
गर्मी से सभा में आये लोग भी परेशान हो उठे थे. ऐसे में कार्यकर्ताओं में जोश भरने के लिए अटल ने अपनी कविता की पंक्तियां ‘जन्म मरण का खेल अनूठा, इसमें हार नहीं है, वह क्या चल पायेगा, जिसको पथ से प्यार नहीं है’ सुनायी. चिलचिलाती धूप से परेशान लोगों ने जब ये पंक्तियां सुनीं, तो उनके मुरीद हो गये.

प्रभात खबर डिजिटल प्रीमियम स्टोरी

लेखक के बारे में

यह प्रभात खबर का डिजिटल न्यूज डेस्क है। इसमें प्रभात खबर के डिजिटल टीम के साथियों की रूटीन खबरें प्रकाशित होती हैं।

Read More

संबंधित खबरें >

यह भी पढ़ें >