श्रीनगर/नयी दिल्ली : जम्मू-कश्मीर में आतंकियों के सफाये के लिए अब केंद्र सरकार ने नैशनल सिक्यॉरिटी गार्ड यानी एनएसजी के कमांडोज भेजने का निर्णय लिया है. आतंक विरोधी अभियानों के लिए विशेष तौर पर प्रशिक्षित ये कमांडो जम्मू-कश्मीर पुलिस और अन्य सुरक्षाबलों को प्रशिक्षण देने का काम करेंगे. खुफिया इनपुट के आधार पर खतरे वाली लोकेशन पर भी ये आतंकियों पर टूट पड़ेंगे. आधुनिक हथियारों से लैस एनएसजी कमांडो की तैनाती को आतंकियों के खिलाफ सरकार का बड़ा कदम बताया जा रहा है.
यदि आपको याद हो तो 1984 में ऑपरेशन ब्लू स्टार और इंदिरा गांधी की हत्या के बाद भारत की स्पेशल फोर्स के तौर पर एनएसजी का गठन किया गया. ब्लैक ड्रेस में हथियारों से लैस दिखनेवाले इन जवानों को ‘ब्लैक कैट’ कमांडो के भी नाम से पुकारा जाता है. आतंकी वारदातों से निपटने के मकसद से ही इनका गठन हुआ था.
आइए आपको बताते हैं इन स्पेशल कमांडोज के बड़े मिशन के बारे में…
1. एक वक्त था जब पंजाब में सिख अलगाववादियों की सक्रियता बढ़ती जा रही थी. ऐसे समय में 29-30 अप्रैल 1986 को 300 एनएसजी कमांडोज ने बीएसएफ के साथ मिलकर स्वर्ण मंदिर में छिपे सिख उग्रवादियों को सबक सिखाया था. 1984 के सैन्य अभियान ‘ऑपरेशन ब्लू स्टार’ की तुलना में यह ऑपरेशन काफी अलग नजर आया था क्योंकि इस दौरान गुरुद्वारे को बहुत कम नुकसान हुआ.
2. 12 मई 1988 को 1,000 एनएसजी कमांडोज ने एक और ऑपरेशन के लिए स्वर्ण मंदिर को घेरा. स्नाइपर टीम ने 300 फुट ऊंची जगहों पर अपनी पोजिशन संभाली. तीन दिन 15-18 मई 1988 तक चले ऑपरेशन के बाद एनएसजी ने स्वर्ण मंदिर से उग्रवादियों को भगाया था. इस ऑपरेशन में 40 उग्रवादी मारे गये थे और 200 लोगों ने सरेंडर कर दिया था.
3. पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी की हत्या के बाद 1 जुलाई-20 सितंबर 1991 के दौरान एनएसजी को सर्च और स्ट्राइक मिशन के लिए एसआइटी के साथ तैनात किया गया था.
4. विवादित बाबरी मस्जिद ढहाने के वक्त भी इनकी तैनाती की गयी थी. हालात पर काबू पाने के लिए 25 नवंबर-16 दिसंबर 1992 के दौरान 160 कमांडोज की तैनाती की गयी थी.
5. इंडियन एयरलाइंस के प्लेन बोइंग 737 हाइजैक होने के बाद एनएसजी कमांडोज ने 24-25 अप्रैल 1993 को ऑपरेशन अश्वमेध चलाया. अमृतसर में इस प्लेन पर 141 यात्री सवार थे. ऑपरेशन के दौरान दो हाइजैकर्स, जिसमें उनका सरगना मोहम्मद यूसुफ शाह भी शामिल था, ढेर कर दिये गये. ऑपरेशन के दौरान किसी भी बंधक को नुकसान नहीं पहुंचा था.
6. एनएसजी कमांडोज ने जम्मू-कश्मीर में 21 अगस्त 1999 को 30 घंटे तक चला बंधक संकट खत्म करने का काम किया था. ऑपरेशन के दौरान दो आतंकी मारे गये थे और सभी 12 बंधकों को सुरक्षित बचाया गया था. दरअसल, आतंकियों ने श्रीनगर के करीब बीएसएफ के एक कैंपस पर हमला बोला था, जिसमें 3 अधिकारी और एक अन्य की पत्नी की मौत हो गयी थी. 12 बंधकों को एक कमरे में कैद कर दिया गया था.
7. 29 नवंबर 2008 को मुंबई में कई जगहों पर आतंकियों ने हमले किये. आतंकियों के सफाये और बंधकों को मुक्त कराने के लिए ऑपरेशन ब्लैक टॉरनेडो और ऑपरेशन साइक्लोन चलाया गया. ऑपरेशन के दौरान दो जांबाज कमांडो शहीद भी हुए थे. हालांकि कमांडोज की मदद से 600 से ज्यादा बंधकों को छुड़ाया गया था. कमांडोज ने 900 से ज्यादा कमरों की तलाशी ली और 9 आतंकियों को ढेर कर दिया.
8. पठानकोट हमले के दौरान एनएसजी के साथ मिलकर चलाये गये ऑपरेशन में 6 आतंकियों को मार गिराया गया था. एक मृत आतंकी के शरीर में फिट किये गये आइइडी में विस्फोट के कारण लेफ्टिनेंट कर्नल निरंजन शहीद हो गये थे. यूनिट के 12 लोग इस दौरान जख्मी भी हो गये थे.
