नयी दिल्ली : सुप्रीम कोर्ट ने न्यायाधीशों के नाम पर कथित रूप से रिश्वत लेने से संबंधित याचिका संविधान पीठ को सौंप दी है. इस मामले में शीर्ष अदालत के पांच वरिष्ठतम न्यायाधीश सुनवाई करेंगे. शीर्ष अदालत ने याचिका पर केंद्र और सीबीआई को नोटिस जारी किये. याचिका में इस मामले की जांच के लिए शीर्ष अदालत के सेवानिवृत्त न्यायाधीश की अध्यक्षता में एक विशेष जांच दल गठित करने और सुप्रीम कोर्ट की आेर से इसकी निगरानी करने का अनुरोध किया गया है.
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न्यायमूर्ति जे चेलामेश्वर और न्यायमूर्ति एस अब्दुल नजीर की पीठ ने सीबीआई को निर्देश दिया कि उसके द्वारा 19 सितंबर को दर्ज की गयी प्राथमिकी से संबंधित सामग्री और दस्तावेज सुरक्षित रखें जायें. इस प्राथमिकी में उड़ीसा हार्इकोर्ट के एक पूर्व न्यायाधीश को भी आरोपी के रूप में नामित किया गया है. पीठ ने कहा कि जांच ब्यूरो को 13 नवंबर को सीलबंद लिफाफे में ये दस्तावेज और संबंधित सामग्री संविधान पीठ के समक्ष पेश करनी चाहिए. जांच ब्यूरो की प्राथमिकी में आरोप लगाया गया है कि हार्इकोर्ट के पूर्व न्यायाधीश और अन्य लोगों ने मेडिकल कालेज में प्रवेश से संबंधित मामला शीर्ष अदालत में अपने पक्ष में निबटारा कराने का आश्वासन देते हुए साजिश रची और इसके लिए रिश्वत के रूप में मोटी रकम मांगी.
इस मामले की सुनवाई शुरू होते ही सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन के पूर्व अध्यक्ष और वरिष्ठ अधिवक्ता दुष्यंत दवे ने कहा कि प्रधान न्यायाधीश इस मामले की सुनवाई नहीं कर सकते, क्योंकि आरोप एक ऐसे मामले से संबंधित हैं जिसकी सुनवाई उनकी अध्यक्षता वाली पीठ ने की थी. इससे पहले, शीर्ष अदालत न्यायाधीशों के नाम पर रिश्वत के आरोप लगाने वाली याचिका पर शीघ्र सुनवाई के लिए तैयार हो गया था.
