NSA शक्तियों के विस्तार पर बोली दिल्ली पुलिस, CJP आंदोलन से कोई लेना-देना नहीं, अफवाहों से बचें

दिल्ली पुलिस ने राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (NSA) के तहत अपनी निवारक हिरासत शक्तियों के विस्तार पर उठे सवालों पर स्पष्टीकरण दिया है। यह कदम CJP के विरोध प्रदर्शनों के बीच आया है, लेकिन पुलिस ने इसके संबंध से इनकार किया है।

Preventive Detention: दिल्ली के उपराज्यपाल ने राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (NSA) के तहत दिल्ली पुलिस की निवारक हिरासत (Preventive Detention) की शक्तियां 18 अक्टूबर तक बढ़ा दी हैं. गृह विभाग ने साफ किया है कि यह हर तीन महीने में होने वाली सामान्य प्रशासनिक प्रक्रिया का हिस्सा है. दिल्ली पुलिस ने भी कहा कि इसका सीजेपी के मौजूदा विरोध-प्रदर्शनों से कोई संबंध नहीं है. पुलिस के अनुसार, सोशल मीडिया पर इस आदेश को गलत तरीके से सीजेपी के आंदोलन से जोड़ा जा रहा है, जबकि यह एक नियमित प्रक्रिया के तहत जारी किया गया आदेश है.

प्रदर्शन शुरू होने से पहले जारी हुआ था आदेश

दिल्ली पुलिस ने बताया कि यह नवीनीकरण (Renewal) 19 जुलाई से 18 अक्टूबर तक की अवधि के लिए है. इसका आदेश 7 जुलाई को जारी किया गया था, जबकि कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) का आंदोलन बाद में शुरू हुआ था.

पुलिस ने कहा कि इस मामले में किसी विशेष अनुरोध के आधार पर यह फैसला नहीं लिया गया है, बल्कि यह हर तीन महीने में होने वाली सामान्य प्रशासनिक प्रक्रिया है. दिल्ली पुलिस

मीडिया रिपोर्ट्स में गलत अर्थ निकालने का आरोप

दिल्ली पुलिस ने कहा कि कुछ मीडिया रिपोर्टों में इस नियमित प्रक्रिया को गलत तरीके से पेश किया गया है. पुलिस ने लोगों से अपील की है कि वे अफवाहों और गलत सूचनाओं से बचें और किसी भी जानकारी के लिए केवल आधिकारिक स्रोतों पर भरोसा करें.

रासुका के तहत किन लोगों को हिरासत में ले सकती है पुलिस?

15 जुलाई को जारी अधिसूचना के अनुसार, दिल्ली पुलिस को राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (NSA) की धारा 3(2) के तहत ऐसे लोगों को निवारक हिरासत (Preventive Detention) में लेने का अधिकार दिया गया है, जिनकी गतिविधियां भारत की सुरक्षा या सार्वजनिक व्यवस्था के लिए खतरा बन सकती हैं.

रासुका में तीन से 12 महीने तक हिरासत का प्रावधान

राष्ट्रीय सुरक्षा कानून के तहत किसी व्यक्ति को तीन महीने से लेकर अधिक से अधिक 12 महीने तक निवारक हिरासत (Preventive Detention) में रखा जा सकता है. हालांकि, अगर जरूरत नहीं रहती है तो हिरासत की अवधि पहले भी खत्म की जा सकती है.

सीजेपी के विरोध प्रदर्शन के बीच आया फैसला

यह फैसला ऐसे समय में आया है, जब परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं को लेकर कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) का जंतर-मंतर पर प्रदर्शन जारी है. केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग को लेकर सोमवार को हजारों प्रदर्शनकारियों ने संसद तक मार्च करने की कोशिश की थी, जिसके दौरान हिंसा भी हुई.

निवारक हिरासत और गिरफ्तारी में क्या है अंतर?

रासुका के तहत की गई कार्रवाई सामान्य गिरफ्तारी नहीं, बल्कि निवारक हिरासत (Preventive Detention) होती है. इसमें किसी व्यक्ति को संभावित खतरे को देखते हुए पहले से हिरासत में लिया जा सकता है. ऐसे मामलों में हिरासत में लिए गए व्यक्ति को तुरंत अदालत में पेश करना अनिवार्य नहीं होता.

20 जून से जारी है सीजेपी का आंदोलन

कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) ने 20 जून से जंतर-मंतर पर परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं के खिलाफ विरोध प्रदर्शन शुरू किया था. इसके बाद से संगठन लगातार सरकार और केंद्रीय शिक्षा मंत्री के खिलाफ प्रदर्शन कर रहा है.

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लेखक के बारे में

12 वर्षों से टीवी पत्रकारिता और डिजिटल मीडिया में सेवाएं दे रहा हूं. रांची विश्वविद्यालय के पत्रकारिता विभाग से पढ़ाई की है. राजनीतिक, अंतरराष्ट्रीय विषयों के साथ-साथ विज्ञान और ब्रह्मांड विषयों पर रुचि है. बीते छह वर्षों से प्रभात खबर.कॉम के लिए काम कर रहा हूं. इलेक्ट्रॉनिक मीडिया में काम करने के बाद डिजिटल जर्नलिज्म का अनुभव काफी अच्छा रहा है.
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