आदिवासी प्रकृति के पुजारी होते हैं, हर त्योहार हमें प्रकृति संरक्षण की सिख देता है : अभिनव सिद्धार्थ

आदिवासी प्रकृति के पुजारी होते हैं, हर त्योहार हमें प्रकृति संरक्षण की सिख देता है : अभिनव सिद्धार्थ

कैरो़ जेठ जतरा टांड़ में करमा पूर्व संध्या आयोजन समिति के तत्वावधान में प्रखंड स्तरीय करमा पूर्व संध्या कार्यक्रम का आयोजन किया गया. जतरा टांड़ स्थित निर्माणाधीन शक्ति खुटा के समीप पहान, पुजार और महतो द्वारा विधि-विधान से पूजा-अर्चना की गयी. इस दौरान प्रखंड क्षेत्र से आये खोड़हा दलों ने पूजा-अर्चना कर बारी-बारी से अपनी कला और संस्कृति का प्रदर्शन किया. कार्यक्रम में पहुंचे अतिथियों का स्वागत आयोजन समिति ने बैच पहना कर, सरना गमछा भेंटकर और पारंपरिक रीति-रिवाज से किया. मौके पर यूथ कांग्रेस के राष्ट्रीय सचिव सह ओडिशा विधानसभा प्रभारी अभिनव सिद्धार्थ ने कहा कि आदिवासी समाज प्रकृति का पुजारी है. हर पर्व हमें प्रकृति संरक्षण का संदेश देता है. करमा पर्व हमारी सांस्कृतिक धरोहर है जिसमें बहनें अपने भाइयों की लंबी उम्र और अच्छी फसल की कामना करती हैं. उन्होंने कहा कि समाज को प्रगति के लिए शिक्षा पर विशेष ध्यान देना होगा और नशा पान से दूर रहना होगा. भाजपा प्रदेश अनुसूचित जनजाति मोर्चा के प्रदेश महामंत्री विंदेश्वर उरांव ने कहा कि करमा पूजा आदिवासी समाज का लोकप्रिय उत्सव है. ढोल-मांदर की थाप पर झूमते-गाते लोग इस पर्व को यादगार बनाते हैं. उन्होंने कहा कि सभी को अपनी परंपरा, कला और संस्कृति को संरक्षित करना चाहिए तभी समाज और देश आगे बढ़ सकेगा. कार्यक्रम में वक्ताओं ने करमा पर्व के इतिहास, करमा-धर्मा भाइयों की कहानी तथा आदिवासी सभ्यता और परंपरा पर प्रकाश डाला. प्रखंड क्षेत्र के 30 खोड़हा दलों ने अपनी कला का प्रदर्शन किया जिन्हें अतिथियों द्वारा पुरस्कृत कर सम्मानित किया गया. कार्यक्रम में काफी संख्या में लोग मौजूद थे.

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By SHAILESH AMBASHTHA

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