बेतला़ पलामू टाइगर रिजर्व के बेतला नेशनल पार्क परिसर में सर्पदंश प्रबंधन व सांप रेस्क्यू ऑपरेशन को लेकर एक दिवसीय प्रशिक्षण शिविर का आयोजन किया गया. इसका नेतृत्व पीटीआर उत्तरी प्रमंडल के उप निदेशक प्रजेश कांत जेना ने किया. जूलॉजिकल सर्वे ऑफ इंडिया के विशेषज्ञों द्वारा प्रतिभागियों को प्रैक्टिकल डेमोंस्ट्रेशन के माध्यम से सांप पकड़ने और रेस्क्यू करने की विधियां सिखायी गयी. प्रशिक्षण में लातेहार, पलामू और गढ़वा जिले के वनकर्मियों, जिला पुलिस बल के जवानों व स्थानीय रेस्क्यू विशेषज्ञों ने हिस्सा लिया. प्रशिक्षण के दौरान सांप के डंसने की स्थिति में प्राथमिक उपचार व रोगी को सुरक्षित अस्पताल तक पहुंचाने की प्रक्रिया की पूरी जानकारी दी गयी. बताया गया कि सांप के डंसने के बाद एक घंटा का समय गोल्डन आवर के नाम से जाना जाता है. इस दौरान सांप के डंसने वाले व्यक्ति को बहुत ही सावधानी के साथ उसकी जान बचाने की दिशा में काम करने की जरूरत होती है. अंधविश्वास के चक्कर में आकर झाड़-फूंक से बचना चाहिए़ प्रशिक्षण के दौरान विषैले और गैर-विषैले सांपों की पहचान करायी गयी. बताया गया कि सभी सांप जहरीले नहीं होते हैं. लोग जानकारी के अभाव में सभी सांपों को मार देते हैं. सांप पर्यावरण का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है. इसलिये उसके संरक्षण के लिए उसका रेस्क्यू कर पुनर्वासित करना जरूरी है. प्रशिक्षण के दौरान सुरक्षित रेस्क्यू तकनीकों की जानकारी दी गयी. प्रशिक्षण में 70 से अधिक प्रतिभागियों ने हिस्सा लिया. शिविर में उपनिदेशक ने कहा कि पलामू टाइगर रिजर्व विविधताओं से भरा है इनमें सांपों की संख्या भी अधिक है. लेकिन आज जानकारी के अभाव में लोग सांप देखते ही उसे मार देते हैं. जबकि सभी सांप जहरीले नहीं होते हैं. इसलिए लोगों को सांप से बचने का हर संभव प्रयास करना चाहिए. वहीं सांपों को रेस्क्यू कर उसे सुरक्षित स्थान तक पहुंचाने के लिए वन विभाग से मदद लेनी चाहिए. उन्होंने कहा कि यदि किसी भी तरह की सांप से संबंधित कोई मामला आता है तो सीधे निकट के वनकर्मियों को इसकी जानकारी दें निश्चित रूप से उन्हें सांप से निजात दिलाने में मदद किया जायेगा.
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