पोठिया दुर्गा मंदिर दो सौ वर्ष है पुराना, यहां भक्तों की मन्नतें होती है पूरी

पोठिया दुर्गा मंदिर दो सौ वर्ष है पुराना, यहां भक्तों की मन्नतें होती है पूरी

– इस दुर्गा मंदिर से लोगों की असीम आस्था जुड़ी है फलका फलका प्रखंड के पोठिया में 201 वर्ष पुराने ऐतिहासिक श्रीश्री 108 दुर्गा मंदिर से लोगों की असीम आस्था जुड़ी है. इस मंदिर में भक्तों द्वारा सच्चे दिल से मिन्नत मांगने पर दुर्गा मां मुराद पूरी करती है. इस मंदिर का इतिहास भी काफी पुराना है. फलका प्रखंड के मानचित्र पर बसा पोठिया बाजार स्थित दुर्गा मंदिर की ख्याति बहुत दूर-दूर तक फैली है. 201 वर्ष पुरानी है मंदिर वर्ष 1813 में सार्वजनिक रूप से मंदिर की स्थापना की गई थी. आज से 200 वर्ष पूर्व पोठिया बाजार से सटे गद्दी घाट के कोसी नदी में मां दुर्गा की एक मूर्ति बहकर पहुंची थी. पोठिया गांव वासी स्व संतलाल मंडल और जयलाल मंडल के पूर्वजों ने इस मूर्ति को लाकर मां दुर्गा की पिंडी स्थापित कर एक झोपड़ी नुमा मंदिर का निर्माण कर दिया था. करीब 20 वर्ष पूर्व यहां 65 फीट ऊंचा विशाल भव्य मंदिर का निर्माण कराया गया. यहां शब्दा गांव के लोगों को पहले बलि देने और कोहवारा गांव के लोगों का मुख्य ध्वजारोहण का अधिकार है. दुर्गा मंदिर को लेकर कहते हैं लोग पूजा कमेटी के दुखहरण पंडित ने बताया कि दुर्गा माता के विसर्जन को लेकर लोगों का मानना है कि एक बार दुर्गा मां की विसर्जन जहां होती थी. उस पोखर में पानी नहीं था. जिस कारण दुर्गा मां का विसर्जन गद्दी घाट में कर दिया गया था तो गांव में काफी महामारी फैल गई थी. गांव के मरड़ को मां दुर्गा ने सपना दिया कि मुझे पुनः पोखर में विसर्जन करो फिर गांव वालों ने गद्दी घाट से दुर्गा मां की प्रतिमा को निकालकर पोखर में विसर्जित किया. तब जाकर गांव में महामारी खत्म हुई. मंदिर की सबसे बड़ी विशेषता इस मंदिर की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि यहां दशहरा में माता दुर्गा और काली पूजा में मां काली की प्रतिमा स्थापित होती है. साथ ही यहां 51 किलो वजन के लड्डू का भोग भी लगाया जाता है. कहते हैं मंदिर के पुजारी मंदिर के पुजारी निर्मल झा ने कहा कि पोठिया के इस दुर्गा मंदिर में सच्चे मन से भक्तों के द्वारा जो भी मन्नतें मांगी जाती है. दुर्गा माता उसे अवश्य पूरी करती हैं. कहा कि मां दुर्गा काफी शक्तिशाली है और मां के दरबार में जो भी अपने कष्ट और दुख दर्द लेकर आते हैं. माता उनके कष्ट को हर लेती है. कहते हैं कमेटी के लोग मंदिर कमेटी के अध्यक्ष मुखिया हृदय नरायण यादव ने कहा कि इस मंदिर में सबसे पहले शब्दा गांव के द्वारा बली का चढ़ावा किया जाता है. मंदिर में पहला ध्वजारोहण को कोहवारा गांव से सामूहिक रूप से ध्वजारोहण किया जाता है. पूजा व मेला में भक्तों को कोई परेशानी ना हो इसका ख्याल कमेटी के सदस्यों के साथ तमाम ग्रामीणों के द्वारा रखा जाता है. इस मंदिर के प्रांगण में भव्य मेले का आयोजन किया जाता है विसर्जन के दिन मशाल जुलुस निकाली जाती है. कहते हैं ग्रामीण मुखिया हृदय यादव, पूर्व मुखिया अखिलेश यादव, गौरव भगत, निरंजन झा,अशोक केशरी, संजीव कुमार उर्फ़ भोलू, पुरुषत्म पोद्दार, प्रदीप प्रभा बताते है कि दुर्गापूजा में मेला में दुर्गा भक्त एवं श्रद्धालुओं को किसी प्रकार का कठिनाई ना हो. इस पर कमेटी के द्वारा विशेष ध्यान रखा जाता था. मंदिर के प्रांगण भव्य मेला का आयोजन किया जाता है. मंदिरों में पूजा अर्चना की जाती है.

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By RAJKISHOR K

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