करम पर्व हमारे समाज की आस्था प्रकृति संरक्षण का प्रतीक है : विमला प्रधान

करम पर्व हमारे समाज की आस्था प्रकृति संरक्षण का प्रतीक है : विमला प्रधान

सिमडेगा़ शहरी क्षेत्र के गोंडवाना छात्रावास में करम पूर्व करमा सांस्कृतिक कार्यक्रम का आयोजन किया गया. मौके पर दर्जन से ज्यादा नृत्य दलों ने भाग लिया. एक से बढ़कर एक पारंपरिक नृत्य प्रस्तुत किये. मांदर की थाप पर नृत्य दलों के सदस्य झुमते-गाते नजर आये. जिससे पूरा वातावरण सांस्कृतिक रंग में रंग गया. कार्यक्रम की शुरुआत मुख्य अतिथि गोंडवाना महासभा की अध्यक्ष विमला प्रधान के साथ अन्य गणमान्य अतिथियों ने पूजा अर्चन कर की. मौके पर स्थानीय ग्रामीणों और युवाओं की भारी भीड़ उमड़ी. सबने पारंपरिक नृत्यों का भरपूर आनंद लिया. सांस्कृतिक कार्यक्रम के दौरान गोंडवाना महासभा की अध्यक्ष सह पूर्व मंत्री विमला प्रधान ने अपने संबोधन में कहा कि करम पर्व हमारे आदिवासी समाज की आस्था, एकता और प्रकृति संरक्षण का प्रतीक है. यह पर्व केवल धार्मिक अनुष्ठान नहीं है, बल्कि समाज को जोड़ने और अपनी परंपरा-संस्कृति को संजोए रखने का अवसर है. करम पूजा के माध्यम से हम प्रकृति, धरती माता और करम देवता से सुख-समृद्धि एवं अच्छे जीवन की कामना करते हैं. विमला प्रधान ने युवाओं से आह्वान किया कि वे अपनी परंपराओं और सांस्कृतिक धरोहर को संजोकर रखें. आधुनिकता के बीच अपनी जड़ों से जुड़े रहना ही हमारी सबसे बड़ी ताकत है. नृत्य समूह आगामी सांस्कृतिक कार्यक्रम में कुल पंद्रह नृत्य दल शामिल हुए. मनसाय महिला समूह, सेवई टोली महिला समूह, सुखमैईत युवक समूह , बसंती देवी एवं समूह, मां दूर्गा एवं समूह , अलका ग्रुप, फरसापानी महिला समूह, गुड़िया समूह, सीता समूह, खुशबु समूह, जामबहार नृत्य समूह, चंद्रनगर खैरन टोली महिला समूह, लोंबोई ओहदार टोली, तारा महिला समूह तथा गुलाब नृत्य ग्रुप ने एक से बढ़ कर एक प्रस्तुति दी.

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