डिजिटल लेन-देन ने कम की, बैंक शाखा व एटीएम की भीड़

नहीं दिखतीं अब पर्व के दौरान लगने वाली कतारें वरीय संवाददाता, मुजफ्फरपुर डिजिटल लेन-देन ने बैंक शाखा व एटीएम की भीड़ को कम कर दिया है. पहले की तरह अब

नहीं दिखतीं अब पर्व के दौरान लगने वाली कतारें

वरीय संवाददाता, मुजफ्फरपुर

डिजिटल लेन-देन ने बैंक शाखा व एटीएम की भीड़ को कम कर दिया है. पहले की तरह अब एटीएम पर सामान्य दिन में तो छोड़ ही दें; त्योहार के समय में भी कतार नहीं लगती. ग्राहक अब यूपीआइ और अन्य डिजिटल भुगतानों के बढ़ने से ऑनलाइन और मोबाइल के माध्यम से पैसे का लेन-देन कर रहे हैं. बैंकों के नये नियम के अनुसार एक माह में एटीएम से पांच ट्रांजेक्शन (लेनदेन) ही मुफ्त है. इससे अधिक ट्रांजेक्शन होने पर सभी बैंकों ने प्रति ट्रांजेक्शन अलग-अलग शुल्क तय कर रखे हैं. वहीं जहां भी बैंकों द्वारा नयी एटीएम मशीन लगायी जा रही है वह सीडीएम (कैश डिपोजिट मशीन) या एटीएम रिसाइकलर (जमा निकासी) दोनों की सुविधायुक्त है.एटीएम मशीन से केवल निकासी होती थी, लेकिन अब उस मशीन में दोनों सुविधाएं उपलब्ध करायी जा रही है.बैंक शाखा के बाद एटीएम से भी भीड़ गायब हो गयी है. यह प्रमाणित करती है कि लोग कैश लेन-देन से अधिक डिजिटल लेनदेन कर रहे हैं.

जिले में विभिन्न बैंकों के चार सौ एटीएम

सरकारी व निजी बैंकों को मिलाकर चार सौ एटीएम हैं. इनमें भी सर्वाधिक सरकारी बैंकों के हैं. अधिकांश एटीएम में कैश लोडिंग का काम निजी एजेंसी करती हैं. केवल एसबीआइ ही अपने दो दर्जन एटीएम में खुद से कैश लोडिंग करता है. इसके अलावा सभी एटीएम में कैश लोडिंग और उसके देखरेख का काम पूरी तरह से निजी एजेंसी के हाथों में है. जिन एटीएम में निकासी की संख्या कम होती है वैसे एटीएम साइट को उस जगह शिफ्ट कर दिया जाता है जहां उस एटीएम में अधिक निकासी हो सके. बिहार स्टेट सेंट्रल बैंक ऑफिसर्स एसोसिएशन के महामंत्री मृत्युंजय मिश्रा ने बताया कि पहले की तुलना में एटीएम से निकासी करने वालों की संख्या में कमी आयी है. वहीं डिजिटल लेनदेन का असर भी कैश निकासी पर पड़ा है. त्योहारी सीजन में कैश निकासी बढ़ती है, लेकिन एटीएम मशीन की संख्या अधिक होने के कारण पहले की तरह भीड़ नहीं होती है.

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Author: KUMAR GAURAV

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